इटली में बुर्का-नकाब पर लगाएंगे बैन : मेलोनी ने कहा - स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या होगी लिमिटेड
Italy Burqa Niqab Ban : मेलोनी ने यह ऐलान राजधानी रोम में अपनी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के युवा संगठन के राष्ट्रीय महोत्सव में किया।
Italy Burqa Niqab Ban : इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने की घोषणा की है। मेलोनी ने कहा कि इस संबंध में कैबिनेट जल्द फैसला लेगी। प्रस्तावित नियमों के तहत स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या को भी सीमित करने की योजना है। हालांकि, इन प्रस्तावों को लागू करने के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए भाषा की शर्त
मेलोनी ने रोम में अपनी पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ के युवा संगठन के राष्ट्रीय महोत्सव में इन प्रस्तावों की जानकारी दी। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, जिन विदेशी छात्रों को स्कूल में घुलने-मिलने में परेशानी होती है, उनके माता-पिता को इटैलियन भाषा सीखने की शर्त का सामना करना पड़ सकता है।
मेलोनी ने कहा कि इटली आने और यहां भविष्य बनाने वाले लोगों को देश की भाषा सीखनी चाहिए। उनके मुताबिक, लोगों को इटली की संस्कृति समझने और नियमों का सम्मान करने की जरूरत है।
संसद से मंजूरी जरूरी
प्रस्तावित नियमों को कानून का रूप देने के लिए सरकार की मंजूरी के बाद संसद की प्रक्रिया से गुजरना होगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसे 60 दिनों के भीतर संसद से पारित कराना होगा। फिलहाल यह एक प्रस्तावित नीति है।
इटली में 9.3 लाख विदेशी छात्र
रिसर्च इंस्टीट्यूट Fondazione ISMU के आंकड़ों के अनुसार, इटली के स्कूलों में करीब 9.3 लाख विदेशी छात्र पढ़ते हैं। यह कुल स्कूली छात्रों का लगभग 11.6 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में इटली में विदेशी नाबालिगों की संख्या में करीब 4.5 प्रतिशत की कमी आई है।
बुर्का, नकाब और हिजाब में अंतर
प्रस्तावित रोक चेहरे को ढकने वाले परिधानों से जुड़ी है। हिजाब में सिर, बाल, कान और गर्दन ढके जाते हैं, जबकि चेहरा खुला रहता है। नकाब में चेहरा ढका होता है और आमतौर पर आंखें दिखाई देती हैं। बुर्के में सिर से पैर तक शरीर ढका होता है और आंखों के सामने जालीदार हिस्सा होता है।
यूरोप में पहले भी हो चुके हैं ऐसे फैसले
फ्रांस और बेल्जियम में सार्वजनिक जगहों पर चेहरे को ढकने वाले परिधानों से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय में मामले पहुंचे हैं। अदालत ने फ्रांस और बेल्जियम के मामलों में संबंधित प्रतिबंधों को बरकरार रखा था। वहीं, मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की ओर से ऐसे प्रतिबंधों पर आपत्तियां भी जताई गई हैं।

