CG ED Raid : CGPSC घोटाले में ED का एक्शन, भूपेश के PA रहे केके चंद्रवंशी और पूर्व पटवारी के घर दबिश
CG ED Raid : ED की टीम ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निजी सहायक रहे केके चंद्राकर के ठिकाने पर भी तलाशी ली। टीम दस्तावेजों की जांच कर रही है।
CG ED Raid : दुर्ग। छत्तीसगढ़ में कथित CGPSC घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने मंगलवार को राज्य में सात ठिकानों पर तलाशी शुरू की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच के तहत की जा रही है। जांच का संबंध CGPSC की 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी से है। अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी की कार्रवाई अभी जारी है।
पूर्व CM के PA रहे केके चंद्राकर के घर भी रेड
ED की टीम ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निजी सहायक रहे केके चंद्राकर के ठिकाने पर भी तलाशी ली। रिपोर्ट के मुताबिक, भिलाई स्थित उनके घर पर सुबह करीब 6 बजे ED की टीम पहुंची। टीम दस्तावेजों और अन्य जरूरी सामग्री की जांच कर रही है। घर के बाहर सुरक्षा के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा। हालांकि, तलाशी में अब तक क्या मिला है, इसकी आधिकारिक जानकारी ED की ओर से सामने नहीं आई है।
कमलेश राजपूत के घर भी जांच
दुर्ग के सिकोला भाठा इलाके में पूर्व पटवारी कमलेश सिंह राजपूत के घर पर भी जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, ED की टीम सुबह से यहां मौजूद है। जांच में परिवार से जुड़े सरकारी पदों पर नियुक्तियों और CGPSC मामले से संबंधित संभावित पहलुओं को खंगाले जाने की बात कही जा रही है। इन दावों की विस्तृत पुष्टि जांच एजेंसी की ओर से अभी नहीं हुई है। कार्रवाई पूरी होने के बाद ही जांच से जुड़े तथ्यों की तस्वीर साफ होगी।
टामन सिंह की गिरफ्तारी के बाद तेज हुई जांच
यह कार्रवाई CGPSC के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की गिरफ्तारी के करीब एक महीने बाद हुई है। ED ने 25 जुलाई 2026 को सोनवानी को PMLA के तहत गिरफ्तार किया था। ED के मुताबिक, मामला 2020 और 2021 की CGPSC राज्य सेवा परीक्षाओं में भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में कथित हेरफेर से जुड़ा है। सोनवानी को रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया था और अदालत ने उन्हें ED की हिरासत में भेजा था।
पेपर लीक - चयन में गड़बड़ी के आरोप
ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच एक CBI FIR से जुड़ी है। एजेंसी का आरोप है कि CGPSC की परीक्षा प्रक्रिया में प्रश्नपत्र लीक कराने और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, कथित तौर पर अवैध रकम के लेन-देन के जरिए कुछ उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाया।
ED अब इसी मामले में पैसों के लेन-देन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। इन आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच और अदालत की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगी।
CBI ने भी की थी जांच
CGPSC मामले में ED से पहले CBI भी कार्रवाई कर चुकी है। CBI की जांच कथित पेपर लीक, भ्रष्टाचार और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़ी है। जांच में यह आरोप सामने आया कि प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को सरकारी पदों पर चयनित कराने के लिए परीक्षा प्रक्रिया में कथित तौर पर हेरफेर किया गया। ED अब इसी मामले के मनी ट्रेल यानी पैसों के लेन-देन की कड़ियों की जांच कर रही है।
रिश्तेदारों के चयन को लेकर भी लगे आरोप
जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल में रिश्तेदारों के चयन को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। ED ने आरोप लगाया है कि परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करके कुछ रिश्तेदारों और कथित तौर पर पैसे देने वाले उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाया गया। एजेंसी के अनुसार, 2021 में CGPSC के नियमों में भी बदलाव किया गया था। जांच में इस बदलाव और कथित नियुक्तियों के बीच संबंध की पड़ताल की जा रही है।
2021 की परीक्षा में 171 पद थे
CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 में 171 पदों के लिए आयोजित की गई थी। प्रारंभिक परीक्षा फरवरी 2022 में हुई थी। इसके बाद मुख्य परीक्षा आयोजित की गई। इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन सूची जारी की गई थी। इसी भर्ती प्रक्रिया को लेकर बाद में प्रश्नपत्र लीक, चयन में कथित गड़बड़ी और प्रभावशाली लोगों के उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने जैसे आरोप लगाए गए। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ अब ED कथित आर्थिक लेन-देन की कड़ियां तलाश रही है।

