Chrome vs Edge : कौन सा ब्राउजर ज्यादा सुरक्षित? जानिए दोनों की सिक्योरिटी में क्या है अंतर

Chrome vs Edge : दोनों ब्राउजर कई एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स देते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा तकनीक और प्राइवेसी विकल्पों में कुछ अंतर जरूर है।

Chrome vs Edge : कौन सा ब्राउजर ज्यादा सुरक्षित? जानिए दोनों की सिक्योरिटी में क्या है अंतर

Chrome vs Edge : टेक डेस्क आज के समय में इंटरनेट ब्राउजर सिर्फ वेबसाइट खोलने का माध्यम नहीं रह गया है। ब्राउजर में पासवर्ड, बैंकिंग से जुड़ी जानकारी, सोशल मीडिया अकाउंट और कई तरह का निजी डेटा सेव रहता है। ऐसे में Chrome और Edge में से कौन ज्यादा सुरक्षित है, यह सवाल काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। दोनों ब्राउजर कई एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स देते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा तकनीक और प्राइवेसी विकल्पों में कुछ अंतर जरूर है।

Chrome में मिलते हैं कई सिक्योरिटी फीचर्स

Google Chrome में Safe Browsing फीचर दिया गया है। यह खतरनाक वेबसाइट, फिशिंग लिंक और संदिग्ध डाउनलोड के बारे में चेतावनी देने में मदद करता है। किसी संदिग्ध वेबसाइट पर जाने से पहले Chrome चेतावनी दिखा सकता है। इससे यूजर को फर्जी वेबसाइट पर संवेदनशील जानकारी दर्ज करने से बचने का मौका मिलता है।

इसके अलावा Chrome में Password Manager, Site Permissions और Safety Check जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। ब्राउजर को लगातार अपडेट किया जाता है ताकि नए साइबर खतरों से सुरक्षा बेहतर की जा सके।

Edge में भी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था

Microsoft Edge में Defender SmartScreen सुरक्षा फीचर मौजूद है। यह खतरनाक वेबसाइटों और डाउनलोड को पहचानने में मदद करता है और संभावित फिशिंग या मालवेयर से जुड़े जोखिम पर चेतावनी दे सकता है।

Edge में Tracking Prevention भी मिलता है। इसके जरिए यूजर वेबसाइटों द्वारा अपनी ऑनलाइन एक्टिविटी को ट्रैक किए जाने को सीमित कर सकता है। इसमें अलग-अलग स्तर की ट्रैकिंग प्रिवेंशन सेटिंग्स उपलब्ध हैं।

दोनों में क्या है बड़ा अंतर?

Chrome और Edge दोनों में फिशिंग, मालवेयर और संदिग्ध वेबसाइटों से बचाने वाली सुरक्षा तकनीक मौजूद है। इसलिए हर स्थिति में किसी एक ब्राउजर को पूरी तरह सुरक्षित और दूसरे को असुरक्षित कहना सही नहीं होगा।

Chrome का सुरक्षा सिस्टम Google की Safe Browsing तकनीक से जुड़ा है, जबकि Edge Microsoft के Defender SmartScreen और उसके सुरक्षा इकोसिस्टम के साथ काम करता है। इसके अलावा दोनों में प्राइवेसी और परमिशन कंट्रोल के अलग-अलग विकल्प मिलते हैं।

यूजर की सावधानी भी है जरूरी

ब्राउजर की सुरक्षा सिर्फ उसके फीचर्स पर निर्भर नहीं करती। ब्राउजर को हमेशा लेटेस्ट वर्जन पर अपडेट रखना, अनजान एक्सटेंशन इंस्टॉल नहीं करना और संदिग्ध लिंक या डाउनलोड से बचना जरूरी है।

साथ ही सेव किए गए पासवर्ड और वेबसाइट परमिशन की समय-समय पर समीक्षा करनी चाहिए। मजबूत सिक्योरिटी फीचर्स के बावजूद अगर यूजर खुद किसी फर्जी लिंक पर संवेदनशील जानकारी साझा कर देता है, तो जोखिम बना रह सकता है।