Saudi Arabia को F-35 फाइटर जेट देगा US: $24 अरब की डील को मंजूरी, China तक तकनीक पहुंचने का डर
सऊदी अरब को 48 F-35 फाइटर जेट देगा अमेरिका: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ₹2.3 लाख करोड़ की डील को दी मंजूरी, अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में टेक्नोलॉजी लीक होने की आशंका
America ने Saudi Arabia को 48 F-35 फाइटर जेट बेचने की संभावित डील को मंजूरी दे दी है। अमेरिकी State Department ने 17 सितंबर को इसकी जानकारी दी। पूरी डील की अनुमानित कीमत करीब 24 अरब डॉलर यानी ₹2.3 लाख करोड़ है। इसमें F-35 विमान के साथ 49 इंजन, कम्युनिकेशन सिस्टम, स्पेयर पार्ट्स और दूसरी सहायता शामिल है। हालांकि, डील अभी पूरी तरह अंतिम नहीं हुई है। इसे अमेरिकी कांग्रेस की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

Trump ने पहले ही कर दी थी बिक्री की घोषणा
US President Donald Trump ने नवंबर 2025 में Saudi Arabia को F-35 बेचने की योजना की घोषणा की थी। Saudi Arabia लंबे समय से इन विमानों को खरीदना चाहता है। अब State Department की मंजूरी के बाद यह सौदा आगे बढ़ गया है। अगर डील पूरी होती है तो Saudi Arabia F-35 इस्तेमाल करने वाला Middle East का दूसरा देश होगा। इस समय Israel ही इस क्षेत्र में F-35 संचालित करता है।

F-35 की तकनीक को लेकर China का डर
इस डील के बीच America की खुफिया एजेंसियों की चिंता भी सामने आई है। The New York Times की रिपोर्ट के मुताबिक, Pentagon की Defense Intelligence Agency (DIA) की एक रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि China Saudi Arabia के साथ अपने सैन्य और तकनीकी संबंधों का इस्तेमाल कर F-35 से जुड़ी संवेदनशील तकनीक तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, चिंता सिर्फ जासूसी तक सीमित नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों को यह भी डर है कि Saudi Arabia में मौजूद Chinese सैन्य या तकनीकी नेटवर्क के जरिए F-35 से जुड़ी जानकारी तक पहुंच बनाई जा सकती है। इसी वजह से F-35 से जुड़े ठिकानों और संवेदनशील सिस्टम की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
Saudi Arabia और China के बढ़ते संबंध
Saudi Arabia के China के साथ पहले से सैन्य और तकनीकी संबंध हैं। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने Saudi सैन्य ठिकानों तक संभावित Chinese पहुंच और देश के टेलीकॉम नेटवर्क में Chinese तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन परिस्थितियों में F-35 जैसी संवेदनशील अमेरिकी तकनीक की सुरक्षा चुनौती बन सकती है।

Israel की सैन्य बढ़त भी मुद्दा
इस डील को लेकर Israel की चिंता भी सामने आई है। Israel अभी Middle East का एकमात्र देश है जिसके पास F-35 विमान हैं। America लंबे समय से यह नीति अपनाता रहा है कि Middle East में Israel की सैन्य बढ़त बनी रहे। State Department ने कहा है कि प्रस्तावित बिक्री से क्षेत्रीय सैन्य संतुलन में बदलाव नहीं होगा।

Saudi Arabia को विमान तुरंत नहीं मिलेंगे
State Department की मंजूरी का मतलब यह नहीं है कि Saudi Arabia को F-35 तुरंत मिलने लगेंगे। प्रस्ताव को कांग्रेस की समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बाद उत्पादन और डिलीवरी में भी कई साल लग सकते हैं। F-35 को America की Lockheed Martin कंपनी बनाती है।

इस तरह 24.3 अरब डॉलर की यह डील केवल हथियारों की खरीद नहीं, बल्कि America और Saudi Arabia के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग से भी जुड़ी है। वहीं China से जुड़ी तकनीकी सुरक्षा और Israel की सैन्य बढ़त जैसे मुद्दे इस सौदे की आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
Varsha Shrivastava 
