ईरान की सख्त चेतावनी: अमेरिकी ठिकाने और जहाज निशाने पर, 14-पॉइंट प्रस्ताव पर जवाब का इंतजार
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसके तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों पर हमला हुआ तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और जहाजों को निशाना बनाया जाएगा।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को स्पष्ट और कड़ी चेतावनी दी है कि अगर फारस की खाड़ी या होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों पर कोई हमला हुआ तो अमेरिकी ठिकानों और सैन्य जहाजों पर भारी हमला किया जाएगा। IRGC की नौसेना शाखा के कमांडर ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान अब किसी भी उकसावे को बर्दाश्त नहीं करेगा। इसके कुछ ही देर बाद IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने और भी आक्रामक पोस्ट किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी मिसाइलें और ड्रोन पहले ही अमेरिकी ठिकानों तथा दुश्मन के सैन्य जहाजों पर लॉक हो चुके हैं। बस हमले का अंतिम आदेश मिलना बाकी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज स्ट्रेट, विश्व के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग, पूरी तरह से तनाव की चपेट में है।
अमेरिका का प्रस्ताव..
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को एक विस्तृत ड्राफ्ट प्रस्ताव भेजा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद पत्रकारों से बात करते हुए उम्मीद जताई थी कि शनिवार सुबह तक ईरान का जवाब आ जाएगा, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है।
1.ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और इसकी आंतरराष्ट्रीय गारंटी देगा।
2.कम से कम 12 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोक देगा।
3.वर्तमान में उसके पास मौजूद लगभग 440 किलोग्राम 60% एनरिच्ड यूरेनियम को तीसरे देश (संभवतः रूस) को सौंपना होगा।
4.IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) को निरीक्षण की पूरी छूट दी जाएगी।
5.क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स (हिजबुल्लाह, हूती आदि) को हथियार सप्लाई बंद करनी होगी।

बदले में अमेरिका क्या दे रहा है..
A.ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध चरणबद्ध तरीके से हटाए जाएंगे।
B.ईरान की अमेरिका और यूरोप में जमी हुई अरबों डॉलर की संपत्ति रिलीज की जाएगी।
C.होर्मुज स्ट्रेट पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी तुरंत हटाई जाएगी।
D.समझौते के 30 दिनों के अंदर स्ट्रेट को पूर्ण रूप से खोल दिया जाएगा।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने साफ कहा, अमेरिकी प्रस्ताव अभी समीक्षा के दौर में है। हम किसी भी समय-सीमा को मान्यता नहीं देते। ईरान अपना फैसला अपने तरीके से और सही समय पर लेगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रस्ताव की समीक्षा में ईरानी संसद, IRGC, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और अंत में सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई की मंजूरी जरूरी है। इसलिए प्रक्रिया में समय लगना स्वाभाविक है।
होर्मुज स्ट्रेट..
विश्व अर्थव्यवस्था की धमनी पर खतरा, होर्मुज स्ट्रेट विश्व के कुल तेल व्यापार का करीब 20-25% हिस्सा गुजरता है। पिछले कुछ हफ्तों में यहां हुए संघर्ष में कई जहाज क्षतिग्रस्त हुए हैं। ईरान ने मार्च में ही इस रूट पर अपना नियंत्रण घोषित किया था। अमेरिका ने प्रोजेक्ट फ्रीडम के तहत जहाजों को निकालने की कोशिश की, लेकिन ईरान के हमलों के बाद यह अभियान सीमित हो गया। 8 मई को हुई झड़प में दोनों पक्षों के बीच सीधी गोलीबारी हुई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर AI जनरेटेड इमेज शेयर कीं, जिनमें ईरानी नौसेना को बुरी तरह क्षतिग्रस्त दिखाया गया था। उन्होंने दावा किया कि ईरान के 159 जहाज क्षति का शिकार हुए हैं।

वर्तमान में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहा तो कीमत 130-150 डॉलर तक जा सकती है। इससे दक्षिण एशिया (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश) में पेट्रोल, डीजल, खाद्य पदार्थ और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें आसमान छू लेंगी। UN ने पहले ही चेतावनी जारी कर दी है कि गरीब देशों में मुद्रास्फीति और खाद्य सुरक्षा का संकट गहरा सकता है।
पर्यावरणीय आपदा..
खार्ग आईलैंड के पास तेल रिसाव, ईरान के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्र खार्ग आईलैंड के पास बड़ा तेल रिसाव हुआ है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों में 20 वर्ग मील क्षेत्र में तेल फैला दिख रहा है। अनुमान है कि 3000 बैरल से ज्यादा तेल समुद्र में बह चुका है। रिसाव सऊदी अरब की दिशा में बढ़ रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र पर्यावरणीय संकट की कगार पर पहुंच गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार अमेरिकी नाकेबंदी और तनाव के कारण ईरान के पुराने तेल बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ा है, जिसके चलते रखरखाव में कमी आई है।

लेबनान मोर्चा..
39 मौतें, तनाव बढ़ा, दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमले जारी हैं। पिछले 24 घंटे में 39 लोगों की मौत हुई है। साक्साकियेह और नबातीह शहरों में आवासीय इमारतों को निशाना बनाया गया। हिजबुल्लाह ने जवाबी हमलों में इजराइल पर दर्जनों ड्रोन और रॉकेट दागे।
14-15 मई को अमेरिकी मध्यस्थता में इजराइल-लेबनान शांति वार्ता होने वाली है। इसमें सीमा विवाद, पुनर्निर्माण और हिजबुल्लाह के हथियारों जैसे मुद्दे उठाए जाएंगे। लेकिन बेरूत की राजनीतिक विश्लेषक रानिया खलेक कहती हैं कि लेबनान में इन वार्ताओं को समर्पण वार्ता के रूप में देखा जा रहा है। शिया समुदाय, जो सबसे ज्यादा प्रभावित है, का इन वार्ताओं में प्रतिनिधित्व न के बराबर है।

अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं..
कतर तट पर जहाज पर हमला: ब्रिटेन की मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने बताया कि एक मालवाहक जहाज अज्ञात प्रोजेक्टाइल से टकराया। आग लगी लेकिन बुझा ली गई। कोई हताहत नहीं।
ब्रिटेन का युद्धपोत:
HMS ड्रैगन को होर्मुज सुरक्षा अभियान के लिए भेजा जा रहा है। फ्रांस भी लाल सागर में अपना कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात कर चुका है।

रूस की पेशकश:
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम सुरक्षित रखने को तैयार है। 2015 में भी रूस यह काम कर चुका है।

ईरान का नया प्लान:
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली सबमरीन इंटरनेट केबलों पर टोल लगाने की तैयारी। इन केबलों से रोजाना 10 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का वित्तीय लेनदेन होता है।

इजराइल में विरोध:
तेल अवीव में नेतन्याहू सरकार के खिलाफ बड़े प्रदर्शन। लोग युद्ध और घरेलू नीतियों का विरोध कर रहे हैं।

वैश्विक प्रभाव और विशेषज्ञ राय..
यह पूरा संकट सिर्फ ईरान-अमेरिका द्विपक्षीय मुद्दा नहीं है। इसमें क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, परमाणु अप्रसार, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के बड़े सवाल जुड़े हैं। भारत जैसे देश, जो ईरान से तेल आयात करते हैं और चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट में निवेश कर चुके हैं, इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में 20,000 से ज्यादा नाविक फंसे हुए हैं। कई महीनों से जहाजों पर हमलों का खतरा, ड्रोन-मिसाइलों की आवाजें और अलगाव ने नाविकों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला है। अब तक कम से कम 11 नाविकों की मौत हो चुकी है।
आगे क्या..
अगले हफ्ते इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच नई वार्ता की संभावना है। लेकिन दोनों पक्षों के बीच अविश्वास गहरा है। ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय प्रभाव को बनाए रखना चाहता है, जबकि अमेरिका परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोकना चाहता है।
ट्रंप प्रशासन मैक्सिमम प्रेशर नीति पर अड़ा दिख रहा है, वहीं ईरान “प्रतिरोध की अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सहयोगियों के जरिए जवाब देने की रणनीति पर काम कर रहा है। विश्व इस समय सांस रोके इंतजार कर रहा है कि ईरान 14-पॉइंट प्रस्ताव पर क्या जवाब देता है। अगर समझौता होता है तो होर्मुज स्ट्रेट खुल सकता है और तेल कीमतें गिर सकती हैं। लेकिन अगर बातचीत विफल हुई तो पूरे मध्य पूर्व में बड़ा युद्ध छिड़ सकता है, जिसके आर्थिक और मानवीय नतीजे भयावह होंगे।

