US Tariff Bill: ‘रूस से तेल खरीदना बंद करो, कहीं और से खरीदो’, अमेरिकी सीनेटर की भारत को चेतावनी

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US Tariff Bill: ‘रूस से तेल खरीदना बंद करो, कहीं और से खरीदो’, अमेरिकी सीनेटर की भारत को चेतावनी

भारत और अमेरिका के बीच रूस से कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे पर तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी सीनेट के डेमोक्रेट सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन को रूस से तेल और गैस खरीदने के बजाय दूसरे देशों से ऊर्जा खरीदने की सलाह दी है। उनका यह बयान अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर कड़े टैरिफ का प्रावधान करने वाले विधेयक के पारित होने के बाद आया है।

ब्लूमेंथल ने भारत को क्या कहा?

रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन को रूस से तेल खरीदने पर अपना रुख बदलने को कहा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को कहीं और से तेल और गैस खरीदनी चाहिए। उनका तर्क है कि रूस से ऊर्जा खरीद के जरिए मॉस्को को मिलने वाले राजस्व पर दबाव बनाने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।

100 फीसदी टैरिफ का क्या है मामला?

अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को 262-159 वोटों से मंजूरी दी है। इससे पहले यह विधेयक अमेरिकी सीनेट से भी पारित हो चुका है।

इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर परिस्थितियों के आधार पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर अभी 100 फीसदी टैरिफ लागू हो गया है। विधेयक को कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी है।

भारत ने भी साफ किया अपना रुख

भारत ने अमेरिकी कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उसकी ऊर्जा जरूरतें प्राथमिकता हैं और वह अलग-अलग देशों से तेल की खरीद करता है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि प्रस्तावित अमेरिकी कदम का असर सिर्फ भारत-अमेरिका संबंधों पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

भारत रूस से तेल खरीद को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और बाजार परिस्थितियों से जोड़कर देखता रहा है। सरकार का कहना है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग स्रोतों से कच्चा तेल खरीदा जाता है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर भी असर

अमेरिकी टैरिफ बिल ऐसे समय आगे बढ़ा है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत चल रही है। प्रस्तावित 100 फीसदी टैरिफ का इस्तेमाल होने की स्थिति में दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि अमेरिकी संसद से विधेयक पारित हो चुका है, लेकिन भारत पर 100 फीसदी टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है। आगे की स्थिति अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले और दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी।