Dilip Buildcon को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सिकासार-कोडार परियोजना पर चुनौती देने वाली याचिका खारिज

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने Dilip Buildcon से जुड़ी सिकासार-कोडार जल परियोजना की टेंडर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है. फैसले के बाद परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ होने की उम्मीद बढ़ गई है.

Dilip Buildcon को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सिकासार-कोडार परियोजना पर चुनौती देने वाली याचिका खारिज

छत्तीसगढ़ की बहुप्रतीक्षित सिकासार-कोडार जल परियोजना को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने परियोजना की टेंडर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है. इस फैसले के बाद करीब 2,524 करोड़ रुपये की इस परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता लगभग साफ हो गया है.

फैसले के साथ ही परियोजना के निर्माण कार्य और बाकी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है.

याचिका में क्या आरोप लगाए गए थे?

याचिकाकर्ता का कहना था कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया और पूरी प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं. इसी आधार पर हाईकोर्ट से टेंडर को रद्द करने और प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई थी.

सरकार ने अदालत में क्या कहा?

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और संबंधित विभाग ने अदालत को बताया कि पूरी निविदा प्रक्रिया तय नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार पूरी की गई. सरकार ने यह भी कहा कि सभी पात्र कंपनियों को समान अवसर दिया गया और मूल्यांकन निर्धारित मानकों के आधार पर किया गया. इसलिए टेंडर प्रक्रिया में किसी तरह की मनमानी या पक्षपात नहीं हुआ.

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर टेंडर प्रक्रिया में ऐसा कोई स्पष्ट कानूनी दोष या गंभीर अनियमितता नहीं मिली, जिससे अदालत के हस्तक्षेप की जरूरत पड़े.

इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी.

दिलीप बिल्डकॉन की पात्रता पर लगी मुहर

हाईकोर्ट के फैसले के बाद परियोजना से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में दिलीप बिल्डकॉन की पात्रता बरकरार मानी जा रही है. इसके साथ ही परियोजना के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में आने वाली बड़ी कानूनी अड़चन भी खत्म हो गई है.

परियोजना पूरी होने से क्या होगा फायदा?

राज्य सरकार का कहना है कि सिकासार-कोडार जल परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी. इससे किसानों को खेती के लिए बेहतर जल उपलब्ध होगा और ग्रामीण इलाकों में जल प्रबंधन भी सुधरेगा. सरकार का मानना है कि परियोजना का लाभ लंबे समय तक स्थानीय लोगों और कृषि क्षेत्र को मिलेगा.