CSMCL घोटाला: जेल में ही रहेंगे अनवर ढेबर, बिलासपुर हाईकोर्ट ने नहीं दी जमानत

मैनपावर घोटाले में अनवर ढेबर की जमानत खारिज, हाईकोर्ट ने आर्थिक अपराध को बताया देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा

CSMCL घोटाला: जेल में ही रहेंगे अनवर ढेबर, बिलासपुर हाईकोर्ट ने नहीं दी जमानत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मैनपावर सप्लाई घोटाले में आरोपी अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि आर्थिक अपराध सामान्य आपराधिक मामले नहीं होते, बल्कि ये सुनियोजित तरीके से की गई ऐसी साजिशें होती हैं जो देश की अर्थव्यवस्था और सरकारी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सिर्फ इसलिए राहत नहीं दी जा सकती क्योंकि आरोपी प्रभावशाली है या सीधे तौर पर उसके पास से पैसा बरामद नहीं हुआ है।

CSMCL में ओवरटाइम भुगतान गड़बड़ी से जुड़ा केस

यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में मैनपावर सप्लाई और कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान में हुई कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, निजी मैनपावर सप्लाई एजेंसियों को भुगतान तभी किया जाता था जब वे तय रकम कमीशन के रूप में देती थीं। शुरुआत में यह कमीशन एक निश्चित दर पर था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर बिल राशि का एक-तिहाई या उससे भी ज्यादा कर दिया गया।

कमीशन और अवैध वसूली के गंभीर आरोप

जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बिल पास कराने के लिए एजेंसियों से अवैध वसूली की जाती थी। आरोप है कि चुनाव के नाम पर भी वसूली बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। इस मामले में निगम के कुछ अधिकारियों और निजी लोगों की मिलीभगत की बात सामने आई है, जो बीच में पैसे लेकर कथित तौर पर बड़े स्तर तक पहुंचाते थे।

ED की कार्रवाई में नकदी और सबूत बरामद

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दौरान 29 नवंबर 2023 को एक ट्रैप कार्रवाई की गई थी, जिसमें ईगल हंटर सॉल्यूशंस एजेंसी के कर्मचारियों को 28.80 लाख रुपये की रिश्वत देते हुए पकड़ा गया। इसी कार्रवाई में मिले सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ी और अनवर ढेबर की भूमिका सामने आई। इसके बाद उन्हें 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया।

जमानत याचिका में अनवर ढेबर की ओर से कहा गया कि उन्हें राजनीतिक कारणों से इस मामले में फंसाया गया है। यह भी दलील दी गई कि एक ही मामले में बार-बार अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल में रखा जा रहा है, जिसे “कस्टडी का एवरग्रीनिंग” बताया गया। राज्य सरकार ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि जांच में उनके खिलाफ गंभीर सबूत मिले हैं।

हाईकोर्ट ने कहा- पर्याप्त सबूत इसलिए जमानत नहीं

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अनवर ढेबर इस मामले के मुख्य साजिशकर्ता और लाभार्थी प्रतीत होते हैं। कोर्ट ने कहा कि शुरुआती जांच में उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे घोटाले केवल सरकारी धन की लूट नहीं होते, बल्कि जनता के भरोसे और व्यवस्था पर भी चोट पहुंचाते हैं।

फिलहाल, इस फैसले के साथ अनवर ढेबर की मुश्किलें बढ़ गई हैं और वह फिलहाल जेल में ही रहेंगे। मामला अभी जांच के अधीन है और आगे ट्रायल में कई और तथ्य सामने आ सकते हैं।