1.70 लाख MT Iron Ore विवाद में Supreme Court का फैसला, Geomin vs Euro Pratik
Geomin Industries और Euro Pratik Ispat के बीच 1.70 लाख MT Iron Ore विवाद Supreme Court तक पहुंचा. जानिए विवाद, Mediation और Commercial Court की पूरी कहानी.
भोपाल: 1.70 लाख मीट्रिक टन आयरन ओर की खरीद से जुड़े Geomin Industries Private Limited और Euro Pratik Ispat India Private Limited के विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. विवाद में आयरन ओर की सप्लाई, खरीद समझौते और अनुबंध के पालन को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही है.मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. सुनवाई के दौरान अदालत ने Commercial Court में लंबित कार्यवाही को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए. अंतरिम राहत से जुड़ा मामला भी इसी विवाद का हिस्सा रहा है.
1.70 लाख मीट्रिक टन आयरन ओर से शुरू हुआ विवाद
मामले की शुरुआत Geomin Industries और Euro Pratik Ispat India के बीच हुए आयरन ओर के खरीद समझौते से जुड़ी है. Geomin का दावा है कि करीब 1 लाख 70 हजार मीट्रिक टन आयरन ओर के लिए समझौता किया गया था, लेकिन बाद में अनुबंध के अनुसार माल उपलब्ध नहीं कराया गया.इसके बाद Geomin Industries ने अपने अधिकारों और आयरन ओर की आपूर्ति को लेकर जबलपुर की Commercial Court में मामला दायर किया. इसी कानूनी विवाद के दौरान अंतरिम राहत का मुद्दा मध्यप्रदेश हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.
Supreme Court में भी पहुंचा मामला
Commercial Court की कार्यवाही और अंतरिम आदेशों को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद आगे बढ़ता गया. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा.सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए Commercial Court में लंबित आवेदन पर कानून के अनुसार फैसला करने की दिशा में कार्यवाही आगे बढ़ाने को कहा. विवाद से जुड़े अंतरिम आदेशों को लेकर भी अदालत में पक्षों की दलीलें सुनी गईं.
Mediation से भी नहीं निकला अंतिम रास्ता
दोनों कंपनियों के बीच विवाद को अदालत से बाहर सुलझाने की कोशिश भी की गई. इसके लिए मध्यस्थता की प्रक्रिया अपनाई गई थी. हालांकि, दोनों पक्षों के बीच विवाद का पूर्ण समाधान नहीं निकल सका और मामला फिर न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ा.इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामले में मध्यस्थता के जरिए समाधान खोजने की कोशिश का उल्लेख हुआ था.
कंपनी के निदेशकों के खिलाफ FIR का भी जिक्र
विवाद से जुड़े पक्ष की ओर से Euro Pratik Ispat India Private Limited के कुछ निदेशकों के खिलाफ कटनी में दर्ज आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया गया है.दिए गए विवरण के अनुसार, इन मामलों में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, जाली दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने जैसी धाराओं के तहत FIR दर्ज होने की बात कही गई है. इन मामलों में कंपनी से जुड़े कुछ लोगों पर दस्तावेजों और हस्ताक्षरों के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं.हालांकि, FIR में दर्ज आरोपों को अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने के बराबर नहीं माना जा सकता. इन मामलों में अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा.
महेंद्र गोयनका का भी विवाद से जुड़ा नाम
मामले में महेंद्र गोयनका का नाम भी सामने आया है. दिए गए विवरण में उन्हें Euro Pratik Ispat India से जुड़ा प्रमुख शेयरधारक बताया गया है. उनके खिलाफ अन्य मामलों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें कंपनी से जुड़े वित्तीय लेनदेन और शेयरों के हस्तांतरण को लेकर आरोप लगाए गए हैं.इन मामलों में भी आरोपों और न्यायिक रूप से साबित तथ्यों के बीच अंतर रखना जरूरी है. किसी FIR या शिकायत में नाम आने मात्र से किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी तय नहीं होती.
अब Commercial Court में आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण
1.70 लाख मीट्रिक टन आयरन ओर से जुड़े इस विवाद में अब Commercial Court की आगे की कार्यवाही अहम होगी. मुख्य विवाद आयरन ओर के खरीद समझौते, उसकी सप्लाई और अनुबंध की शर्तों के पालन से संबंधित है.सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के बाद अब निचली अदालत में लंबित मामलों पर आगे निर्णय की प्रक्रिया चलेगी. इस पूरे विवाद में अंतिम स्थिति Commercial Court और जरूरत पड़ने पर आगे की न्यायिक कार्यवाही में आने वाले आदेशों से स्पष्ट होगी.
Anubhav Dubey 
