1 करोड़ के स्वर्ण मुकुट से सजे गणपति:750 ग्राम सोने-रत्नों से तैयार मुकुट, Raipur में दर्शन को उमड़ी भक्तों की भीड़

117 साल पुराना Golbazar Ganeshotsav बना आकर्षण का केंद्र, सोने के मुकुट वाले Ganpati के दर्शन के लिए लगा श्रद्धालु का तांता

1 करोड़ के स्वर्ण मुकुट से सजे गणपति:750 ग्राम सोने-रत्नों से तैयार मुकुट,  Raipur में दर्शन को उमड़ी भक्तों की भीड़

Raipur। शहर का Golbazar Ganesh Utsav इस बार भी श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बना हुआ है। यहां Shri Bajrang Navyuvak Mitra Mandal Ganesh Utsav Samiti की ओर से भगवान Ganpati का विशेष स्वर्ण श्रृंगार किया गया है।

गणपति को करीब 1 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत का सोने और रत्नों से जड़ा मुकुट पहनाया गया है। 750 ग्राम वजन वाले इस मुकुट के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि देर रात के बाद भी भीड़ कम नहीं होती और सुबह करीब 4 बजे तक दर्शन का सिलसिला जारी रहता है।

117 साल पुराना है Golbazar का Ganesh Utsav

समिति के अनुसार, Golbazar में इस साल Ganesh Utsav के 117 साल पूरे हो रहे हैं। इतने लंबे समय से चली आ रही इस परंपरा से शहर के व्यापारी परिवारों की चौथी पीढ़ी जुड़ी हुई है। आयोजन में पुरानी परंपराओं के साथ नई पीढ़ी की भागीदारी भी दिखाई दे रही है।

समिति से जुड़े BJP नेता Kedar Gupta ने बताया कि वे पिछले 37 साल से Ganesh Utsav की सेवा में जुड़े हैं। उनके अनुसार, पहले Golbazar में गणेशोत्सव के दौरान गुफाएं बनाई जाती थीं, लेकिन अब जगह कम होने के कारण गुफाओं की जगह आकर्षक झांकी तैयार की जाती है।

750 ग्राम सोने और रत्नों से तैयार मुकुट

इस बार Ganpati का सबसे बड़ा आकर्षण उनका स्वर्ण मुकुट है। समिति के अनुसार, यह मुकुट 750 ग्राम सोने और रत्नों से तैयार किया गया है। इसकी मौजूदा बाजार कीमत 1 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई गई है। इसी मुकुट से भगवान Ganpati का स्वर्ण श्रृंगार किया गया है।

समिति के मुताबिक, Ganpati को सोने का मुकुट पहनाने की परंपरा साल 2018 से चली आ रही है। हर साल इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा कई नेता और जनप्रतिनिधि भी यहां भगवान Ganpati के दर्शन करने आते हैं।

Ganpati के साथ Balaji, Lakshmi और Padmavati के दर्शन

Golbazar के पंडाल में भगवान Ganpati के साथ Balaji, Mata Lakshmi और Maa Padmavati की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं। सुबह से लेकर देर रात तक यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है।

पंडाल में होने वाले भजन भी लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं। भजन के दौरान श्रद्धालु झूमते और नृत्य करते नजर आते हैं। रात बढ़ने के साथ भीड़ कम होने के बजाय दर्शन के लिए लोगों का आना जारी रहता है। सुबह करीब 4 बजे तक श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

रिद्धि-सिद्धि के लिए भी स्वर्ण मुकुट बनाने की इच्छा

समिति ने भविष्य में Riddhi-Siddhi के लिए भी स्वर्ण मुकुट तैयार कराने की इच्छा जताई है। समिति के अनुसार, यदि किसी श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है और उनका सहयोग मिलता है तो रिद्धि-सिद्धि के लिए भी सोने का मुकुट बनवाया जाएगा।

समिति के लोगों ने बताया कि पिछले साल एक श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होने के बाद उन्होंने 2 किलो चांदी अर्पित की थी। इसी तरह श्रद्धालुओं की आस्था और सहयोग से आयोजन की परंपरा आगे बढ़ रही है।