UPI MDR Charges: क्या UPI पर लगेगा चार्ज? आम यूजर पर कितना असर
UPI MDR Charges को लेकर चर्चा तेज है. जानिए क्या आम यूजर्स और छोटे दुकानदारों से UPI पेमेंट पर चार्ज लिया जाएगा और MDR का असर किस पर पड़ सकता है.
UPI ने भारत में पैसे भेजने और भुगतान करने का तरीका काफी बदल दिया है. छोटी सी चाय की दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक QR कोड से पेमेंट करना अब सामान्य बात है. ऐसे में UPI से जुड़े किसी भी संभावित शुल्क की खबर सीधे करोड़ों लोगों की चिंता बढ़ा देती है.
हाल में Merchant Discount Rate यानी MDR को लेकर ऐसी ही चर्चा शुरू हुई है. कानूनी बदलाव के बाद अब डिजिटल पेमेंट पर शुल्क लगाने की संभावनाओं पर बहस हो रही है. लेकिन इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि हर UPI ट्रांजैक्शन पर ग्राहक से पैसा वसूला जाना शुरू हो गया है.
सबसे पहले जानिए MDR होता क्या है
जब कोई ग्राहक डिजिटल माध्यम से किसी व्यापारी को भुगतान करता है, तो उस पेमेंट को प्रोसेस करने में बैंक, पेमेंट नेटवर्क और दूसरी कंपनियों की भूमिका होती है. इस व्यवस्था में व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क Merchant Discount Rate यानी MDR कहलाता है.
UPI के मामले में अभी तक सामान्य बैंक अकाउंट से होने वाले पेमेंट के लिए Zero-MDR व्यवस्था रही है. इसी वजह से ग्राहक और छोटे दुकानदार दोनों बिना अतिरिक्त शुल्क के UPI का इस्तेमाल करते आए हैं.
क्या अब हर UPI पेमेंट पर पैसे कटेंगे?
फिलहाल ऐसा नहीं है.
मौजूदा जानकारी के मुताबिक आम ग्राहक से UPI इस्तेमाल करने के लिए कोई अलग शुल्क लेने की व्यवस्था लागू नहीं हुई है. यानी दोस्त को पैसे भेजना, दुकान पर QR स्कैन करना या किसी सेवा का भुगतान करना- इन सामान्य UPI ट्रांजैक्शन के लिए ग्राहक से MDR वसूलने की बात नहीं है.
इसलिए अगर सोशल मीडिया पर आपको यह दावा दिखाई दे कि "अब हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा", तो उसे मौजूदा स्थिति का सही चित्र नहीं माना जा सकता.
छोटे दुकानदारों के लिए भी राहत
UPI की सबसे बड़ी ताकत यही रही है कि छोटे कारोबारियों के लिए डिजिटल पेमेंट स्वीकार करना आसान हुआ. किराना दुकान, सब्जी विक्रेता, चाय की दुकान और छोटे कारोबार में QR पेमेंट आम हो चुका है.
MDR को लेकर चल रही चर्चा में छोटे व्यापारियों को लेकर भी राहत की बात सामने आई है. छोटे merchants पर UPI स्वीकार करने का शुल्क डालने की व्यवस्था फिलहाल नहीं बताई गई है.
इसका मतलब यह है कि रोजमर्रा की छोटी खरीदारी करने वाले ग्राहक और छोटे दुकानदार इस संभावित बदलाव से सीधे प्रभावित होने वाले वर्ग में नहीं हैं.
फिर MDR की चर्चा क्यों हो रही है?
असल मुद्दा UPI के पीछे चलने वाले पूरे payment ecosystem की लागत से जुड़ा है.
UPI पर हर दिन भारी संख्या में ट्रांजैक्शन होते हैं. इन्हें संभालने के लिए सर्वर, तकनीकी ढांचा, साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड मॉनिटरिंग और दूसरे सिस्टम पर लगातार खर्च होता है.
अब बहस यह है कि इस पूरे सिस्टम की लागत लंबे समय तक कैसे पूरी की जाए. इसी संदर्भ में बड़े कारोबारियों से MDR लेने की संभावना पर चर्चा हो रही है.
बड़े कारोबारियों पर पड़ सकता है असर
अगर MDR की नई व्यवस्था आती है तो उसका मुख्य असर बड़े merchants पर पड़ने की संभावना है. हालांकि अभी यह तय नहीं है कि कौन से व्यापारी इसके दायरे में आएंगे और शुल्क की दर कितनी होगी.
कुछ रिपोर्टों में बड़े मूल्य वाले UPI merchant transactions पर सीमित MDR की संभावित व्यवस्था का जिक्र किया गया है. लेकिन इसे अंतिम नियम समझना सही नहीं होगा.
यानी अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हर बड़े UPI पेमेंट पर कोई निश्चित प्रतिशत शुल्क लगना तय हो चुका है.
ग्राहक की जेब पर क्या असर होगा?
फिलहाल आम UPI यूजर के लिए राहत की बात है.
अगर भविष्य में बड़े merchants के लिए MDR लागू किया जाता है, तो यह व्यापारी और पेमेंट ecosystem के बीच शुल्क की व्यवस्था होगी. इसका मतलब अपने आप यह नहीं है कि ग्राहक को हर बार UPI से भुगतान करने पर अलग से चार्ज देना पड़ेगा.
आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार और संबंधित संस्थाएं MDR का अंतिम ढांचा किस तरह तय करती हैं.
अभी क्या समझें?
सीधी भाषा में बात करें तो UPI बंद नहीं हो रहा, न ही आम ग्राहक के लिए हर पेमेंट पर चार्ज शुरू हुआ है.
MDR को लेकर कानूनी और नीतिगत स्तर पर बदलाव की चर्चा जरूर तेज हुई है. लेकिन शुल्क की वास्तविक दर, दायरा और लागू होने की शर्तें स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चलेगा कि इसका बड़े कारोबारियों पर कितना असर पड़ेगा.
फिलहाल UPI इस्तेमाल करने वाले आम लोगों और छोटे दुकानदारों के लिए घबराने जैसी कोई नई फीस लागू नहीं हुई है.
Anubhav Dubey 
