ईरान को परमाणु बम से रोकने निकले थे ट्रंप, अब बिना न्यूक्लियर डील के भी पीछे हटने को तैयार
ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बीच डोनाल्ड ट्रंप का रुख बदलता नजर आ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने पर ट्रंप बिना न्यूक्लियर डील के भी पीछे हट सकते हैं।
US-Iran War Updates: ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख बदलता नजर आ रहा है. ट्रंप अब सैन्य हमलों के बजाय ईरान की खराब होती अर्थव्यवस्था के जरिए दबाव बनाने की रणनीति पर जोर दे रहे हैं. इसी बीच रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर ईरान रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल देता है, तो ट्रंप बिना किसी नए परमाणु समझौते के भी पीछे हटने पर विचार कर सकते हैं.
परमाणु बम रोकने से शुरू हुई थी जंग, अब फोकस होर्मुज पर
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को मुख्य तौर पर उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने की कोशिश के तौर पर पेश किया था. लेकिन करीब पांच महीने बाद अमेरिकी रणनीति में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है.
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अब ईरान के साथ किसी औपचारिक परमाणु समझौते के बजाय होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को बड़ी प्राथमिकता दे रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर ईरान इस अहम समुद्री रास्ते को पूरी तरह खोल देता है, तो ट्रंप बिना न्यूक्लियर डील के भी सैन्य टकराव से पीछे हटने की स्थिति में हो सकते हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है. यहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल और गैस की आवाजाही होती है. इसके लंबे समय तक बंद रहने से तेल बाजार और ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.

ट्रंप बोले- ईरान की अर्थव्यवस्था पहले ही चरमराई
रविवार को एक इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को लेकर अपेक्षाकृत नरम रुख दिखाया. उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका फिलहाल किसी बड़े नए सैन्य अभियान की बजाय ईरान की आर्थिक कमजोरी का फायदा उठाकर दबाव बनाए रखना चाहता है. ट्रंप के मुताबिक ईरान की आर्थिक हालत बेहद खराब है और उसके पास अपने सैनिकों को वेतन देने तक के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी ने ईरान के आर्थिक संकट को और गहरा कर दिया है.
यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि महज एक सप्ताह पहले तक ट्रंप ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान को फिर से शुरू करने के करीब नजर आ रहे थे.अब उनका सार्वजनिक रुख सैन्य कार्रवाई की धमकी से ज्यादा आर्थिक दबाव पर केंद्रित दिखाई दे रहा है.

होर्मुज खोलने के बदले ईरान की लंबी शर्तें
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने कई शर्तें रख दी हैं. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलघद्र ने कहा है कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा.
ईरान की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- अमेरिका ईरान को धमकी देना और उसका अपमान करना बंद करे.
- अमेरिका ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ क्षेत्रीय सैन्य अभियान खत्म करे.
- ईरान के आसपास से अमेरिकी सैन्य ताकतें हटाई जाएं.
- अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाए.
- ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाएं.
- विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड जारी किए जाएं.
- युद्ध से हुए नुकसान के लिए ईरान को मुआवजा दिया जाए.
इन मांगों के चलते होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आसान होती नजर नहीं आ रही है. वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, ईरान की मांगें ट्रंप के लिए सैन्य और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी चुनौती बन गई हैं.

ईरान में भी दो गुटों के बीच खींचतान?
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान में भी रणनीति को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं. एक धड़ा आर्थिक संकट को देखते हुए अमेरिका के साथ समझौते की तरफ बढ़ने का पक्षधर माना जा रहा है, जबकि दूसरा धड़ा अमेरिका के सामने किसी बड़ी रियायत के खिलाफ है.
यानी एक तरफ ट्रंप प्रशासन सैन्य कार्रवाई से निकलने का रास्ता तलाश रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान भी अपनी शर्तों के साथ बातचीत की मेज पर दबाव बनाए रखना चाहता है.
बदली कहानी में किसका पलड़ा भारी?
कुछ महीने पहले तक अमेरिका का मुख्य फोकस ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर था. लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है.
अमेरिका के लिए होर्मुज खोलना एक बड़ी रणनीतिक और आर्थिक प्राथमिकता बन गया है, जबकि ईरान इसे अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों और अमेरिकी सैन्य दबाव को कम कराने के लिए leverage की तरह इस्तेमाल कर रहा है.

यही वजह है कि जिस युद्ध की शुरुआत ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के दावे के साथ हुई थी, उसकी मौजूदा बातचीत का केंद्र अब परमाणु समझौते से ज्यादा होर्मुज जलडमरूमध्य बनता जा रहा है.
और सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ट्रंप बिना न्यूक्लियर डील के पीछे हटकर होर्मुज खुलने को ही अपनी जीत मानेंगे, या ईरान की बाकी शर्तें इस संभावित समझौते का रास्ता रोक देंगी?

