‘किसी महिला की सलवार उतारना रेप की कोशिश नहीं’: CJI बोले - पटना हाई कोर्ट का बयान आपत्तिजनक

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट की कुछ टिप्पणियों को आपत्तिजनक मानते हुए मामले पर स्वतः संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बिहार के एडवोकेट जनरल से आरोपी को नोटिस भेजने को कहा है।

‘किसी महिला की सलवार उतारना रेप की कोशिश नहीं’: CJI बोले - पटना हाई कोर्ट का बयान आपत्तिजनक

सुप्रीम कोर्ट ने पटना में एक दुष्कर्म मामले में हाई कोर्ट की टिप्पियों को आपत्तिजनक बताते हुए स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि फैसले में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं। साथ ही अदालत की रजिस्ट्री को नोटिस जारी किया. पटना हाईकोर्ट ने 9 जुलाई को रेप के आरोपी को बरी करते हुए कहा था कि किसी महिला की सलवार उतारने की कोशिश करना और उसकी छाती को दबाने से "यह स्पष्ट रूप से स्थापित" नहीं होता कि यह रेप का प्रयास था।

CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस आदेश पर खुद ही सुनवाई कर रही थी। उन्होंने कहा कि आरोपी का पक्ष सुनने के बाद इसे खारिज भी किया जा सकता है। CJI सूर्यकांत ने बिहार के एडवोकेट जनरल एसडी संजय से कहा कि स्थानीय पुलिस के जरिए आरोपी को नोटिस भेजा जाए।

पटना हाई कोर्ट ने क्या कहा?

पटना हाई कोर्ट ने मामले में स्टूडियो के अंदर युवती से रेप के प्रयास को ख़ारिज करते हुए फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा वादी पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा। महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने को दबाने की घटना को रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता। खासकर तब, जब शारीरिक संबंध बनाने का कोई सबूत न हो और रेप के इरादे का कोई कृत्य सामने न आए। महिला की गरिमा भंग करने का अपराध बनता है, लेकिन रेप की कोशिश का अपराध साबित नहीं होता।

क्या है बिहार रेप मामला?

18 साल पहले 20 जनवरी 2008 को बिहार के बांका में एक स्टूडियो के मालिक के खिलाफ रेप की कोशिश की FIR हुई। युवती ने आरोप लगाया कि वह पिता के साथ फोटो खिंचवाने गई थी। स्टूडियो मालिक हिमांशु ने स्टूडियो का दरवाजा बंद कर लिया। मेरी सलवार उतारने की कोशिश की। रेप के इरादे से छाती दबाने लगा। 2013 में बांका कोर्ट ने हिमांशु को रेप का प्रयास का दोषी करार दिया था। 3 साल कारावास की सजा सुनाई। लोअर कोर्ट के फैसले को हिमांशु ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।