Analogue Paneer : नकली पनीर से सावधान! FSSAI बोला - हर सफेद टुकड़ा पनीर नहीं

Analogue Paneer : FSSAI ने एनालॉग पनीर की लेबलिंग पर नया ड्राफ्ट जारी किया है। यदि उत्पाद दूध से नहीं बना है तो उसे पनीर नाम से नहीं बेचा जा सकेगा।

Analogue Paneer : नकली पनीर से सावधान! FSSAI बोला - हर सफेद टुकड़ा पनीर नहीं

Analogue Paneer : बाजार में बिकने वाला हर सफेद टुकड़ा असली पनीर नहीं होता। कई उत्पाद देखने में बिल्कुल पनीर जैसे लगते हैं, लेकिन उनमें दूध की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च और अन्य गैर-डेयरी सामग्री मिलाई जाती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अब ऐसे उत्पादों की लेबलिंग को लेकर सख्ती दिखाई है और नया ड्राफ्ट जारी किया है।

एनालॉग पनीर क्या होता है

बाजार में कई ऐसे उत्पाद आम हैं जो रूप-रंग में असली पनीर से मिलते-जुलते हैं। इन्हें बनाने में दूध का इस्तेमाल नहीं होता। इनकी जगह वनस्पति तेल, स्टार्च और अन्य सामग्री डाली जाती है। ऐसे उत्पादों को एनालॉग डेयरी उत्पाद कहा जाता है। इनका इस्तेमाल खाने-पीने की कई चीजों में होता है, लेकिन ग्राहक अक्सर पैकेट देखकर इन्हें असली पनीर समझ लेते हैं। सामग्री पूरी तरह अलग होने के बावजूद रूप और इस्तेमाल एक जैसा होने से भ्रम पैदा होता है।

नए नियमों में क्या बदलाव प्रस्तावित है

FSSAI के नए प्रस्ताव के अनुसार ऐसे उत्पादों को अब पनीर के नाम से बेचना या प्रचारित करना प्रतिबंधित हो सकता है। कंपनियों को इन्हें उनकी असली पहचान के साथ बाजार में उतारना होगा। प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि गैर-डेयरी सामग्री से बने उत्पादों पर “पनीर” शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इससे खरीदारी के समय ग्राहकों में भ्रम की स्थिति खत्म होगी और वे सही जानकारी के आधार पर फैसला ले सकेंगे।

ग्राहकों को कैसे मिलेगा फायदा

इस प्रस्ताव का मुख्य मकसद लेबलिंग को पूरी तरह साफ और पारदर्शी बनाना है। कई बार पैकेजिंग देखकर लोग उत्पाद को असली पनीर मान लेते हैं। बाद में पता चलता है कि उसमें दूध की जगह कुछ और मिलाया गया था। FSSAI चाहता है कि पैकेट पर उत्पाद की सही पहचान साफ लिखी जाए। इससे खासकर वे ग्राहक लाभान्वित होंगे जो सिर्फ दूध से बना उत्पाद खरीदना चाहते हैं। सही जानकारी मिलने से वे अपनी पसंद के अनुसार सही चुनाव कर सकेंगे।

पुराने उत्पादों पर भी पड़ेगा असर

यह प्रस्ताव सिर्फ नए उत्पादों तक सीमित नहीं रहेगा। बाजार में पहले से मौजूद उत्पादों पर भी इसका असर पड़ सकता है। जिन उत्पादों के पास पहले से लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन है, उन पर भी नए नियम लागू हो सकते हैं। अगर प्रस्ताव अंतिम रूप लेता है तो कंपनियों को पैकेजिंग और मार्केटिंग में बदलाव करना होगा। उत्पाद का नाम और लेबल इस तरह तैयार करना होगा जिससे उसकी असली प्रकृति साफ नजर आए।

60 दिनों में मांगी गई राय

FSSAI ने इस ड्राफ्ट पर संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। खाद्य उद्योग से जुड़े लोग, कंपनियां और आम नागरिक अपनी राय दे सकते हैं। इसके लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। इस दौरान मिलने वाले सभी सुझावों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ही नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

फिलहाल क्या स्थिति 

अभी यह सिर्फ प्रस्तावित ड्राफ्ट है। इसे अंतिम नियम नहीं माना जा सकता। इसलिए फिलहाल बाजार में बिकने वाले एनालॉग उत्पादों पर नए नियम लागू नहीं हुए हैं। अगले 60 दिनों में आने वाले सुझावों के आधार पर FSSAI अंतिम फैसला करेगा। तब तक ग्राहकों को खुद पैकेट ध्यान से पढ़कर सतर्क रहना चाहिए। यह कदम खाद्य पदार्थों में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है और आने वाले समय में डेयरी बाजार पर इसका साफ असर दिख सकता है।