रूस-यूक्रेन ने किया युद्धविराम का ऐलान, 20 साल में पहली बार विक्ट्री डे पर नहीं दिखेंगे बड़े हथियार

रूस-यूक्रेन के बीच 2 दिन के युद्धविराम की घोषणा, दो दशकों में ये पहली बार है जब रूस बड़े हथियारों के बिना विक्ट्री डे मनाएगा

रूस-यूक्रेन ने किया युद्धविराम का ऐलान, 20 साल में पहली बार विक्ट्री डे पर नहीं दिखेंगे बड़े हथियार

रूस और यूक्रेन ने 9 मई को मनाए जाने वाले विक्ट्री डे से पहले अलग-अलग समय पर सीमित युद्धविराम की घोषणा की है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने 8 और 9 मई के लिए यूक्रेन में एकतरफा युद्धविराम लागू करने की बात कही है। यह फैसला द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी की हार की 81वीं वर्षगांठ के मौके पर लिया गया है। वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी कहा है कि उनका देश बुधवार रात 12 बजे से युद्धविराम का पालन करेगा, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि रूस की किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा।

विक्ट्री डे परेड में बड़ा बदलाव

इस बार मॉस्को के रेड स्क्वायर में होने वाली विक्ट्री डे परेड पहले से काफी अलग होगी। सुरक्षा कारणों और ड्रोन हमलों की आशंका के चलते परेड में टैंक, मिसाइल और अन्य भारी सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। करीब दो दशकों में यह पहली बार होगा जब रूस अपनी सबसे महत्वपूर्ण सैन्य परेड को सीमित स्वरूप में आयोजित करेगा। इसके अलावा, देश के कई अन्य शहरों में होने वाली परेडों को भी या तो छोटा कर दिया गया है या पूरी तरह रद्द कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरों को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।

हालांकि, युद्धविराम की घोषणा के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ है। रूस ने चेतावनी दी है कि अगर यूक्रेन विक्ट्री डे समारोह में कोई बाधा डालता है, तो कीव पर बड़ा जवाबी मिसाइल हमला किया जाएगा। दूसरी ओर, यूक्रेन ने भी साफ किया है कि वह रूस की किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार रहेगा। इस तरह दोनों पक्षों की स्थिति अभी भी आक्रामक बनी हुई है।

रूस के लिए विक्ट्री डे का महत्व

विक्ट्री डे रूस के लिए केवल एक ऐतिहासिक दिन नहीं बल्कि राष्ट्रीय गौरव और शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक माना जाता है। हर साल 9 मई को रूस द्वितीय विश्व युद्ध में अपनी जीत को बड़े सैन्य प्रदर्शन के साथ मनाता है। राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन इस दिन को देशभक्ति और सैन्य शक्ति से जोड़कर देखते हैं। पिछले साल इस परेड में कई विदेशी नेता भी शामिल हुए हैं, जो इसे वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण बनाता है। हालांकि इस बार बदलते सुरक्षा हालात और चल रहे युद्ध ने समारोह के स्वरूप को प्रभावित किया है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान इससे पहले भी कई बार अस्थायी युद्धविराम की कोशिशें की गई हैं, लेकिन ज्यादातर बार वे ज्यादा प्रभावी साबित नहीं हुईं। मौजूदा स्थिति में भी दोनों देशों के बीच अविश्वास और सैन्य टकराव बना हुआ है, जिससे यह नया सीजफायर भी अनिश्चित माना जा रहा है।