Food Inflation: 5 महीने में दाल-तेल से लेकर दूध-चीनी तक महंगे, त्योहारों में और बढ़ सकती है महंगाई

Ration Price Hike: 5 महीने में दाल, तेल और दूध समेत जरूरी राशन की 99% चीजों के दाम बढ़े, Festive Season में राहत के आसार कम, बढ़ सकती है महंगाई

Food Inflation: 5 महीने में दाल-तेल से लेकर दूध-चीनी तक महंगे, त्योहारों में और बढ़ सकती है महंगाई

देश में आम लोगों की रसोई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। Consumer Affairs Department के Price Monitoring System के अनुसार, पिछले 5 महीनों में खाने-पीने की 16 प्रमुख वस्तुओं में से 15 के दाम बढ़े हैं।

28 February से 3 August के बीच दाल, खाद्य तेल, दूध, चीनी, चावल और नमक जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें महंगी हुई हैं। अब Raksha Bandhan, Janmashtami, Ganesh Utsav, Navratri और Diwali जैसे त्योहारों के दौरान कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

दाल और खाद्य तेल में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

पिछले पांच महीनों में सबसे अधिक असर दालों और Edible Oil की कीमतों पर देखा गया है। Mustard Oil और विभिन्न दालों के दाम तेजी से बढ़े हैं। वहीं दूध, चीनी और चावल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केवल आटे की कीमत लगभग स्थिर बनी रही है।

पिछले 5 महीनों में बढ़े दाम

जरूरी सामान बढ़ोतरी
Chana Dal ₹4.65 प्रति किलो
Arhar Dal ₹5.96 प्रति किलो
Urad Dal ₹5.71 प्रति किलो
Moong Dal ₹4.55 प्रति किलो
Mustard Oil ₹7.56 प्रति लीटर
अन्य खाद्य तेल करीब ₹6 प्रति लीटर तक
दूध ₹3 प्रति लीटर
चीनी ₹2.25 प्रति किलो
चावल ₹1.57 प्रति किलो
नमक ₹0.85 प्रति किलो
आटा ₹0.22 प्रति किलो

त्योहारों में और बढ़ सकती हैं कीमतें

विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त से शुरू होने वाले त्योहारों के दौरान दाल, घी, खाद्य तेल और अन्य राशन की मांग बढ़ेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में राहत नहीं मिलती और आयात महंगा बना रहता है, तो आने वाले महीनों में Food Inflation और बढ़ सकती है।

हालांकि, गेहूं का सरकारी भंडार पर्याप्त होने और बाजार में अच्छी उपलब्धता के कारण आटे की कीमतों में फिलहाल बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम मानी जा रही है। लेकिन बाकी जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम फिलहाल ऊंचे बने रहने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

महंगाई बढ़ने की बड़ी वजह

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, इस बार कमजोर और असमान Monsoon के कारण खरीफ दालों की बुवाई प्रभावित हुई है। जुलाई के अंत तक दालों का रकबा पिछले साल की तुलना में लगभग 7 प्रतिशत कम रहा। इससे उत्पादन घटने और आयात बढ़ने की आशंका के कारण बाजार में कीमतें बढ़ गईं।

वहीं खाद्य तेलों के मामले में भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Palm Oil और Soybean Oil की कीमतें बढ़ने के साथ West Asia में जारी भू-राजनीतिक तनाव से आयात लागत भी बढ़ी है। इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिल रहा है।