‘एक देश, एक चुनाव’ पर JPC की बैठक: अध्यक्ष पीपी चौधरी ने किया 7 लाख करोड़ की बचत दावा, खुजराहो सांसद वीडी शर्मा भी रहे मौजूद

गांधीनगर में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर मंथन, गुजरात सरकार ने किया समर्थन

‘एक देश, एक चुनाव’ पर JPC की बैठक: अध्यक्ष पीपी चौधरी ने किया 7 लाख करोड़ की बचत दावा, खुजराहो सांसद वीडी शर्मा भी रहे मौजूद

गांधीनगर में बुधवार को ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (One Nation, One Election) के प्रस्ताव को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की महत्वपूर्ण परामर्श बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी सहित कई सदस्य शामिल हुए। बैठक में गुजरात सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने भी भाग लिया और इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की गई।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी, विधानसभा अध्यक्ष, JPC के सदस्य व मध्य प्रदेश के खुजराहो से भाजपा सांसद वीडी शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में विभिन्न सुझाव रखे गए। बैठक का उद्देश्य देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने की संभावनाओं और प्रभावों पर विचार करना था।

विकास और चुनाव सुधारों पर केंद्रित चर्चा

बैठक के दौरान चुनावी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और कम खर्चीला बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। समिति अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से प्रशासनिक मशीनरी पर दबाव बढ़ता है और विकास कार्य प्रभावित होते हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं, तो इससे लगभग 7 लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। इसके साथ ही देश की GDP में लगभग 1.6 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना भी जताई गई। यह बचत देश के बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीब कल्याण योजनाओं में उपयोग की जा सकती है।

प्रशासनिक कार्यों पर असर का मुद्दा

समिति के अनुसार, लगातार चुनाव होने से अधिकारी और मंत्री बार-बार चुनावी कार्यों में व्यस्त रहते हैं, जिससे सामान्य प्रशासनिक कामों में देरी होती है। विकास परियोजनाएं भी धीमी पड़ जाती हैं और जनता से जुड़े काम प्रभावित होते हैं। कई राज्यों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उदाहरण के तौर पर कुछ राज्यों ने बताया कि चुनावी वर्षों में योजनाओं के क्रियान्वयन की गति कम हो जाती है और कई योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पातीं।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि चुनावी प्रक्रिया का असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। कुछ राज्यों ने बताया कि उनके राजस्व का बड़ा हिस्सा पर्यटन से आता है और चुनावी माहौल में पर्यटन गतिविधियां प्रभावित होती हैं। इस संदर्भ में बताया गया कि चुनावों के दौरान सुरक्षा, आचार संहिता और प्रशासनिक प्रतिबंधों के कारण पर्यटकों की आवाजाही कम हो जाती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है।

दो प्रस्तावित कानूनों की जांच

जेपीसी इस समय दो प्रमुख विधेयकों की समीक्षा कर रही है। इनमें संविधान (129वां संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक शामिल हैं। इन प्रस्तावों का उद्देश्य देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए कानूनी ढांचा तैयार करना है। समिति का मानना है कि यदि इन कानूनों पर सहमति बनती है, तो चुनाव प्रणाली में बड़ा सुधार संभव है और संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।

बैठक में यह भी बताया गया कि कई विशेषज्ञों और पूर्व न्यायाधीशों ने समिति को सुझाव दिया है कि एक साथ चुनाव कराने से संविधान की मूल संरचना, संघीय ढांचा या मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता। इसके अलावा, विधि आयोग और नीति आयोग भी पहले इस विचार का समर्थन कर चुके हैं। संसद की एक स्थायी समिति ने भी इस दिशा में सकारात्मक रुख दिखाया है।

गुजरात सरकार का समर्थन, विपक्ष का विरोध

बैठक के बाद गुजरात सरकार ने इस प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया। उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ राष्ट्रहित में है और इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी। गुजरात सरकार ने यह भी बताया कि राज्य में हाल ही में नगर निगम, नगरपालिका, जिला पंचायत और तालुका पंचायत के चुनाव एक साथ कराकर इस दिशा में एक उदाहरण पेश किया गया है।

वहीं दूसरी ओर, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह योजना संघीय ढांचे के खिलाफ है और इससे सत्ता का केंद्रीकरण बढ़ सकता है।

बता दें, जेपीसी इससे पहले महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्यों का दौरा कर चुकी है। इन दौरों में विभिन्न राज्य सरकारों और प्रशासनिक अधिकारियों से सुझाव लिए गए हैं। गुजरात दौरे को इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है, क्योंकि यहां से मिले सुझावों को अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।