सोना ₹10 हजार तो चांदी ₹18 हजार महंगी हुई, 6% से 15% इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का असर
सोना-चांदी पर बड़ा झटका: इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़कर 15%, कीमतों में जोरदार उछाल, सोना 10 हजार और चांदी 18 हजार रुपए महंगी
भारत सरकार ने सोना और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। इस फैसले के बाद घरेलू और फ्यूचर्स मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। MCX पर सोना और चांदी दोनों में बड़ी तेजी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और आम खरीदारों में हलचल बढ़ गई है।
सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर भी अनिश्चितता बनी हुई है और डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है। माना जा रहा है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करना और देश के व्यापार घाटे को नियंत्रित करना है।
सरकार ने क्या बदला है?
सरकार ने सोने और चांदी पर कुल आयात शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया है। यह शुल्क दो हिस्सों में है—10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC)।
इससे पहले 2024 के बजट में इस ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% किया गया था, लेकिन अब इसे फिर से बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही IGST नियमों में बदलाव ने भी बाजार पर असर डाला है, जिससे बैंकिंग सेक्टर में सोने के आयात को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

बाजार में क्या असर हुआ?
आयात शुल्क बढ़ते ही सोने और चांदी के दामों में तेज उछाल देखा गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, MCX पर सोना करीब 10,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक महंगा हो गया है, जबकि चांदी में लगभग 18,000 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सोने की कीमतें कई जगह 1.5 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम से ऊपर पहुंच गई हैं, जबकि चांदी का भाव लगभग 3 लाख रुपए प्रति किलो के करीब पहुंच गया है। यह तेजी निवेशकों के लिए बड़ा संकेत मानी जा रही है।
इंपोर्ट क्यों घटाया जा रहा है?
भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। देश में सोने की मांग बहुत अधिक है और इसका बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। इसके लिए भारत को भारी मात्रा में डॉलर खर्च करने पड़ते हैं।

जब आयात ज्यादा होता है तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) प्रभावित होता है। सरकार का मानना है कि इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर सोने की मांग को थोड़ा नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और रुपये को स्थिरता मिलेगी।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। सोना और चांदी पहले से ही महंगे थे और अब इनकी कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
शादी-विवाह और त्योहारों के सीजन में सोने की खरीदारी पर दबाव पड़ेगा। कई लोग अब खरीदारी टाल सकते हैं या कम मात्रा में खरीद सकते हैं। इससे ज्वैलरी बाजार में मांग घटने की संभावना है।
सप्लाई और बाजार पर असर
कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ बाजार में सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। टैक्स बढ़ने और कागजी प्रक्रिया जटिल होने के कारण थोक व्यापारी और बैंक सोने का आयात कम कर सकते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के समय में सोने का आयात पिछले कई दशकों के मुकाबले सबसे निचले स्तर पर पहुंच सकता है। इससे बाजार में उपलब्धता कम होगी और कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

तस्करी बढ़ने की आशंका
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जब टैक्स ज्यादा होता है, तो अवैध तरीके से सोने की तस्करी बढ़ने का खतरा भी रहता है। पहले जब ड्यूटी कम की गई थी, तब स्मगलिंग में गिरावट आई थी, लेकिन अब इसके फिर से बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि सरकार का मानना है कि सख्त निगरानी और नियमों के जरिए इस पर नियंत्रण रखा जा सकता है।
बैंक और इंपोर्ट सिस्टम पर दबाव
IGST नियमों में बदलाव के कारण बैंक अब सोना इंपोर्ट करते समय तुरंत टैक्स भरने के लिए मजबूर हैं। पहले यह टैक्स बाद में भुगतान किया जाता था, लेकिन अब एडवांस में पैसा देना पड़ रहा है।
इससे बैंकों की वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ा है और कई संस्थानों ने अस्थायी रूप से सोने का आयात कम या बंद कर दिया है। इसका सीधा असर सप्लाई चेन पर पड़ा है।

अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत का व्यापार घाटा कम हो सकता है और रुपये को कुछ मजबूती मिल सकती है। हाल के समय में डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ था, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ा था।
हालांकि दूसरी तरफ, घरेलू बाजार में महंगाई बढ़ने और ज्वैलरी सेक्टर पर दबाव का खतरा भी बना रहेगा।
Varsha Shrivastava 
