भोजशाला मंदिर या मस्जिद? हाईकोर्ट आज सुनाएगा फैसला, इंदौर-धार में हाई अलर्ट
धार भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच आज सुना सकती है फैसला, जुमे की नमाज के दिन 12 लेयर में बंटी सुरक्षा, 1200 पुलिसकर्मी तैनात
धार की विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले में आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच अहम फैसला सुना सकती है। इस बहुचर्चित और संवेदनशील मामले को लेकर इंदौर और धार दोनों शहरों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। शुक्रवार होने और जुमे की नमाज के चलते सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सख्त कर दिया गया है। पुलिस और प्रशासन लगातार लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।

इंदौर और धार में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
फैसले को देखते हुए धार जिले में करीब 1200 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पूरे शहर को 12 सुरक्षा लेयर में बांटा गया है। पुलिस कंट्रोल रूम से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स को भी अलर्ट पर रखा गया है।

धार एसपी सचिन शर्मा ने अधिकारियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। प्रशासन ने दोनों पक्षों के लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है। किसी भी तरह की अफवाह या भड़काऊ पोस्ट फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
एक नजर में जाने क्या है भोजशाला विवाद?
धार स्थित भोजशाला लंबे समय से विवाद का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और विद्या का केंद्र मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार मंगलवार को हिंदू समाज यहां पूजा करता है और शुक्रवार को मुस्लिम समाज जुमे की नमाज अदा करता है।

यह मामला मई 2022 में फिर से चर्चा में आया, जब हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से रंजना अग्निहोत्री और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने, हिंदू समाज को नियमित पूजा का अधिकार देने और परिसर में नमाज पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इसके अलावा भोजशाला के लिए ट्रस्ट गठन और ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने की भी मांग रखी गई।
HC के निर्देश पर ASI ने किया 98 दिनों तक सर्वे
हाईकोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI ने भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया था। यह सर्वे करीब 98 दिनों तक चला। ASI ने अपनी जांच के बाद 2100 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। सर्वे के दौरान परिसर की संरचना, शिलालेख, पुरातात्विक अवशेष और अन्य ऐतिहासिक तथ्यों का अध्ययन किया गया। हिंदू पक्ष ने ASI रिपोर्ट को अपने दावों के समर्थन में महत्वपूर्ण बताया।

हिंदू पक्ष की दलील, मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट पर उठाए सवाल
हिंदू पक्ष के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि भोजशाला मां सरस्वती का मंदिर है और यहां प्राचीन समय में शिक्षा का केंद्र हुआ करता था। उन्होंने ऐतिहासिक दस्तावेज, स्थापत्य शैली, शिलालेख और ASI रिपोर्ट का हवाला दिया। अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने परमार राजा भोज के ग्रंथ ‘समरांगण सूत्रधार’ का जिक्र करते हुए कहा कि भोजशाला की संरचना मंदिर निर्माण की प्राचीन शैली से मेल खाती है। हिंदू पक्ष ने यह भी कहा कि वसंत पंचमी पर यहां पूजा की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

वहीं, मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में कहा कि यह परिसर लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग में रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट के पास है मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने ASI सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सर्वे के दौरान उपलब्ध कराई गई तस्वीरें और वीडियोग्राफी स्पष्ट नहीं थीं। साथ ही उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले के विपरीत यहां कोई स्थापित मूर्ति मौजूद नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा धार भोजशाला मामला
भोजशाला विवाद का मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा था। इसी साल वसंत पंचमी के मौके पर सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी 2026 को पूरे दिन पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी। इसके बाद हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से 12 मई तक लगातार सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद डबल बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

जहां, हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने अपने-अपने पक्ष में फैसला आने की उम्मीद जताई है। वहीं, प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि फैसले के बाद किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें।
Varsha Shrivastava 
