13.75 लाख के प्लॉट को 1.25 करोड़ दिखाकर लिया करोड़ों का लोन, EOW इंदौर ने बैंक अधिकारियों समेत 5 पर दर्ज की FIR

इंदौर EOW की बड़ी कार्रवाई: करोड़ों रुपए के बैंक लोन घोटाले का खुलासा, फर्जी रजिस्ट्री और नियमों की अनदेखी से बैंक को 1.70 करोड़ का नुकसान, अधिकारियों और लाभार्थी सहित पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

13.75 लाख के प्लॉट को 1.25 करोड़ दिखाकर लिया करोड़ों का लोन, EOW इंदौर ने बैंक अधिकारियों समेत 5 पर दर्ज की FIR

इंदौर में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने करोड़ों रुपए के बैंक लोन घोटाले का खुलासा करते हुए केनरा बैंक के तत्कालीन अधिकारियों और लाभार्थी सहित पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि 13 लाख 75 हजार रुपए में खरीदे गए एक प्लॉट को फर्जी दस्तावेजों के जरिए 1.25 करोड़ रुपए का दर्शाकर बैंक में गिरवी रखा गया और इसके आधार पर करीब 1.95 करोड़ रुपए के लोन की प्रक्रिया शुरू की गई। मामले में बैंक को लगभग 1.70 करोड़ रुपए की हानि पहुंचाने का आरोप है।

फर्जी दस्तावेज बनाकर बढ़ाई जमीन की कीमत

EOW की जांच में सामने आया कि मेसर्स ए.वी. ग्राफिक्स एंड ट्रेडिंग के प्रोपराइटर विमलेश चतुर्वेदी ने इंदौर के मनीष बाग क्षेत्र स्थित एक विवादित भूखंड के दस्तावेज तैयार कराए। आरोपियों ने प्लॉट की वास्तविक कीमत से कई गुना अधिक मूल्य दिखाकर उसे बैंक में बंधक रखा। जांच के अनुसार, जिस संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य करीब 23 लाख रुपए था, उसे फर्जी रजिस्ट्री के माध्यम से 1.25 करोड़ रुपए का दर्शाया गया।

जांच एजेंसी के मुताबिक, रजिस्ट्री में एचडीएफसी बैंक के चेक से भुगतान का उल्लेख किया गया, जबकि वास्तविक भुगतान केवल 13.75 लाख रुपए ही किया गया था। इसी आधार पर बैंक से भारी लोन लेने की योजना बनाई गई।

मशीन खरीदने के नाम पर लिया गया लोन

21 दिसंबर 2023 को आरोपी विमलेश चतुर्वेदी ने कलर प्रिंटिंग मशीनें खरीदने के नाम पर केनरा बैंक की कनाड़िया रोड शाखा में 1.75 करोड़ रुपए के टर्म लोन और 20 लाख रुपए की सीसी लिमिट के लिए आवेदन किया। उस समय शाखा प्रबंधक तरुण भार्गव थे।

आरोप है कि बैंक के “LAPS” एप पर इस लोन आवेदन की पूरी जानकारी अपलोड की गई, लेकिन इसके बाद बैंक अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए बिना उचित सत्यापन के लोन प्रक्रिया आगे बढ़ा दी।

बिना निरीक्षण और सत्यापन के स्वीकृत हुआ लोन

EOW की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक करोड़ रुपए से अधिक के बिजनेस लोन के लिए शाखा प्रबंधक और क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों द्वारा संयुक्त निरीक्षण अनिवार्य होता है। इसके बावजूद तत्कालीन शाखा प्रबंधक तरुण भार्गव ने अकेले ही संपत्ति और यूनिट का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार कर दी।

इसके अलावा प्रोसेसिंग अधिकारी खुशबू सिलावट पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच में पाया गया कि उन्होंने बिना किसी वास्तविक निरीक्षण और बिना रिपोर्ट संलग्न किए फाइल में यूनिट सत्यापन की सकारात्मक टिप्पणी दर्ज कर दी।

इसके बाद 30 दिसंबर 2023 को लोन को तेजी से स्वीकृति प्रदान की गई। आरोप है कि नियमों के विपरीत जाकर क्षेत्रीय कार्यालय की मंजूरी प्रक्रिया को दरकिनार किया गया और उसी दिन 1.50 करोड़ रुपए का टर्म लोन जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं, मशीनें स्थापित होने से पहले ही 20 लाख रुपए की सीसी लिमिट भी जारी कर दी गई।

EOW ने पांच आरोपियों को बनाया आरोपी

मामले में EOW ने पांच लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें ए.वी. ग्राफिक्स एंड ट्रेडिंग के प्रोपराइटर विमलेश चतुर्वेदी, तत्कालीन शाखा प्रबंधक तरुण भार्गव, तत्कालीन सेक्शन हेड कौशिक कुमार चतुर्वेदी, प्रोसेसिंग अधिकारी खुशबू सिलावट और मंडल प्रबंधक शर्मिष्ठा सिंह शामिल हैं।

जांच एजेंसी का कहना है कि सभी आरोपियों ने आपसी सांठगांठ से बैंकिंग नियमों का उल्लंघन किया और बैंक को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया। अधिकारियों पर पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार करने और आरोपी को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप भी लगाया गया है।

EOW इंदौर ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7(सी) भी लगाई गई है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और EOW वित्तीय लेन-देन तथा बैंकिंग दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही है।