डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, पहली बार 96.18 पर पहुंचा:कच्चा तेल भी 2% बढ़कर 110 डॉलर के पार
मिडिल ईस्ट तनाव से भारतीय बाजार हिला, तेल महंगा और रुपया टूटा, सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार 18 मई 2026 को भारतीय रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 96.18 के स्तर तक गिर गया। वहीं कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जिससे शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 550 से 850 अंक तक टूटकर 74,700 के आसपास पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 200 अंकों से ज्यादा गिरकर 23,450 के करीब कारोबार करता दिखा। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव सरकारी बैंक, ऑटो, मेटल और ऑयल सेक्टर के शेयरों पर रहा।
मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान युद्ध और यूएई के न्यूक्लियर प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद ग्लोबल मार्केट में डर का माहौल है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर रुपए और महंगाई पर पड़ रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार मार्च 2026 से अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 23 अरब डॉलर से ज्यादा निकाल चुके हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया लगातार कमजोर होता गया।
कच्चे तेल के दाम बढ़ने से महंगाई का खतरा
कच्चे तेल में तेजी से देश में महंगाई बढ़ने की आशंका भी गहरा गई है। पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हाल ही में सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी भी कर चुकी है।
RBI की नजर बाजार पर
जानकारों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक रुपए को संभालने के लिए डॉलर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। हालांकि अगर मिडिल ईस्ट तनाव और तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
Varsha Shrivastava 
