CM डॉ. मोहन यादव ने किया इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन। विकास के नए युग की शुरुआत। इंदौर बनेगा इंटरनेशनल इंडस्ट्रियल हब।

CM डॉ. मोहन यादव ने किया इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन

मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के विकास इतिहास में 3 मई का दिन एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनकर दर्ज हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर (IPEC) का विधिवत भूमिपूजन किया। ग्राम नैनोद में आयोजित इस कार्यक्रम प्रोजेक्ट के पहले चरण का काम अब शुरू हो सकेगा।

इस अवसर पर सीएम ने किसानों को विकसित भूखंडों के अलॉटमेंट लेटर भी वितरित किए। इस दौरान कार्यक्रम में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसी सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक मधु वर्मा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, उद्योगपति और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। 

इंदौर को मिलेगा वैश्विक औद्योगिक पहचान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि यह परियोजना सिर्फ एक कॉरिडोर नहीं, बल्कि इंदौर के भविष्य का महामार्ग है। आज का दिन वास्तव में शहर के लिए ऐतिहासिक है। यह कॉरिडोर मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति की रीढ़ बनेगा और इंदौर को इंटरनेशनल इंडस्ट्रियल हब के रूप में स्थापित करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार विकास से जुड़े हर बड़े प्रोजेक्ट को प्राथमिकता से आगे बढ़ा रही है और यह कॉरिडोर उनमें से सबसे महत्त्वपूर्ण है।

इससे पहले सीएम  यादव ने बताया कि यह सपना वर्षों की मेहनत के बाद साकार हुआ है। किसानों की सहमति न मिलने से योजना अटकी हुई थी, लेकिन बीजेपी सरकार द्वारा मुआवजा राशि को 50% से बढ़ाकर 70% किए जाने के बाद अधिकांश किसानों ने भूमि अधिग्रहण पर सहमति दे दी। यही कारण है कि लंबे समय से पेंडिंग यह प्रोजेक्ट अब जमीन पर उतरने जा रहा है।इस कॉरिडोर में कई अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। 

सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर तक मजबूत कनेक्टिविटी

यह महत्वाकांक्षी परियोजना सुपर कॉरिडोर को पीथमपुर निवेश क्षेत्र से जोड़ेगी। लगभग 20.28 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर औद्योगिक इकाइयों के लिए तेज, सुगम और व्यवस्थित परिवहन सुविधा प्रदान करेगा। इस कॉरिडोर के माध्यम से लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य उद्योगों को एकीकृत कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे उत्पादन और वितरण प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी।

लगभग 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में नियोजित विकास का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए कुल 2360 करोड़ रुपए की लागत निर्धारित की गई है। अधोसंरचना के तहत 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क तथा उसके दोनों ओर विकसित होने वाला बफर जोन इस कॉरिडोर को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विस्तार योग्य बनाएगा।

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा कॉरिडोर

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है। इसमें कई आधुनिक और अत्याधुनिक सुविधाओं का समावेश किया गया है। कॉरिडोर में अंडरग्राउंड सर्विस सिस्टम, प्रस्तावित मेट्रो लाइन, मल्टी-लॉजिस्टिक हब, ऑटोमोबाइल क्लस्टर से सीधा संपर्क, आईटी और फिनटेक सेक्टर के लिए विशेष ज़ोन, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर यूनिट्स जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।

इसके अलावा होटल और बिजनेस जोन भी बनाए जाएंगे, जो निवेशकों और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगे। यह महत्त्वाकांक्षी परियोजना न केवल इंदौर की कनेक्टिविटी को नया रूप देगी, बल्कि आने वाले दशक में शहर की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान भी देगी। 

निवेश और रोजगार के नए अवसर

इस परियोजना को आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के अनुमान के अनुसार, इस कॉरिडोर में करीब 20 हजार करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित होने की संभावना है। साथ ही, लगभग एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में इंदौर की जीडीपी लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपए है, जो इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद बढ़कर 2.70 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। यह वृद्धि इंदौर को देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों में शामिल करने में मदद करेगी।

किसानों की सहमति से साकार हुआ प्रोजेक्ट

यह परियोजना कई वर्षों से लंबित थी, जिसका मुख्य कारण भूमि अधिग्रहण में आ रही बाधाएं थीं। किसानों की सहमति नहीं मिलने से प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पा रहा था। हालांकि, राज्य सरकार ने मुआवजा राशि को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया, जिसके बाद अधिकांश किसानों ने सहमति दे दी। इससे परियोजना का मार्ग प्रशस्त हुआ। सरकार ने किसानों को विकसित भूखंड देने की भी योजना बनाई है, जिससे वे भविष्य में इस विकास का हिस्सा बन सकें।

राष्ट्रीय राजमार्गों से बेहतर कनेक्टिविटी

यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग 47 और राष्ट्रीय राजमार्ग 52 के बीच प्रभावी कनेक्टिविटी स्थापित करेगा। इससे औद्योगिक परिवहन अधिक सुगम और समयबद्ध हो जाएगा। इसके साथ ही, यह परियोजना इंदौर क्षेत्र में संतुलित शहरीकरण और अधोसंरचना आधारित विकास को भी नई दिशा प्रदान करेगी।

मध्यप्रदेश को मिलेगा निवेश का नया केंद्र

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर न केवल क्षेत्रीय बल्कि राज्य स्तर पर भी बड़ा बदलाव लाने वाला प्रोजेक्ट है। यह मध्यप्रदेश को एक आदर्श निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा। कॉरिडोर के माध्यम से देश और विदेश के निवेशकों को आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही, गिफ्ट सिटी मॉडल पर फिनटेक सिटी विकसित करने की योजना भी निवेश के नए अवसर पैदा करेगी।