कान्हा टाइगर रिजर्व के मशहूर बाघ 'महावीर' की संदिग्ध मौत, दो महीने में 8 बाघों की गई जान

मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व से बेहद दुखद खबर सामने आई है। पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय बाघ ‘महावीर’ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। अपनी विशालकाय काया और शांत स्वभाव के लिए मशहूर महावीर अक्सर किसली और मुक्की जोन में दिखाई देता था।

कान्हा टाइगर रिजर्व के मशहूर बाघ 'महावीर' की संदिग्ध मौत, दो महीने में 8 बाघों की गई जान

भोपाल। मध्य प्रदेश के वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक बेहद दुखद खबर है। कान्हा टाइगर रिजर्व की शान और पर्यटकों के चहेते मशहूर नर बाघ 'महावीर' की मंगलवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। अपनी विशालकाय काया और शांत स्वभाव के लिए मशहूर महावीर की मौत से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। महावीर अक्सर कान्हा के किसली और मुक्की जोन में पर्यटकों को आसानी से दीदार देता था, जिससे वह सैलानियों के बीच बेहद लोकप्रिय था।

दो महीने के भीतर 7-8 बाघों की मौत, प्रबंधन पर उठे सवाल..
कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतें अब बेहद चिंताजनक स्थिति में पहुँच चुकी हैं। पिछले महज दो महीनों के भीतर ही यहाँ 7 से 8 बाघों की मौत हो चुकी है। कान्हा ही नहीं, बल्कि बांधवगढ़, सतपुड़ा और पेंच टाइगर रिजर्व में भी बाघों की लगातार मौतें हो रही हैं।

इस सिलसिलेवार मौतों ने वन मुख्यालय से लेकर फील्ड में तैनात बड़े अफसरों के वन्यजीव प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों (वन प्राणियों के जानकारों) का मानना है कि यदि इस स्थिति पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो हालात हाथ से निकल जाएंगे। विशेषज्ञों ने राज्य सरकार से मांग की है कि इस मामले में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक सर्जरी (कड़े कदम) करने की तत्काल आवश्यकता है।

एमपी में साल की शुरुआत से अब तक 34 बाघों की मौत..
मध्य प्रदेश को 'टाइगर स्टेट' का दर्जा हासिल है, लेकिन हालिया आंकड़े डराने वाले हैं। जनवरी 2026 से लेकर अब तक (यानी महज कुछ महीनों में) मध्य प्रदेश में 34 बाघों की मौत दर्ज की जा चुकी है।

बाघों की मौत का विश्लेषण..

कुल मौतें..
34 बाघ (जनवरी 2026 से अब तक)

शिकार के कारण मौत..
07 बाघ (सभी मौतें करंट/बिजली के झटके के कारण हुईं)

प्राकृतिक मौतें..
बाकी अन्य बाघों की मौत प्राकृतिक और आपसी संघर्ष की वजह से हुई।

शिकार का शिकार हुईं बाघिनें..
करंट की चपेट में आने से जिन 7 बाघों की मौत हुई, उनमें से 5 बाघिनें थीं, जिनकी उम्र 18 महीने से 8 साल के बीच थी।

संरक्षित क्षेत्रों से बाहर घूम रहे 35% बाघ, बढ़ रहा खतरा..
पिछली बाघ जनगणना के अनुसार, मध्य प्रदेश में कुल 785 बाघ हैं। लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इनमें से 35% बाघ संरक्षित क्षेत्रों (टाइगर रिजर्व की सीमाओं) से बाहर खुले वन क्षेत्रों या इंसानी बस्तियों के नजदीक रह रहे हैं। यही कारण है कि वे शिकारियों के जाल या अवैध बिजली के तारों (करंट) की चपेट में आ रहे हैं।

हाल ही में शिकार और करंट से हुई मौतें मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में दर्ज की गई हैं..

पूर्वी मंडला

उत्तरी शाहडोल

पश्चिमी छिंदवाड़ा वन प्रभाग

उमरिया

दक्षिणी सिवनी वन क्षेत्र

बाघ 'महावीर' की मौत ने एक बार फिर मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण के दावों की पोल खोल दी है। अब देखना यह है कि लगातार हो रही इन मौतों के बाद सरकार और वन विभाग की कुंभकर्णी नींद टूटती है या नहीं।