कांगो और युगांडा में इबोला का प्रकोप: अब तक 80 मौतें, WHO ने घोषित की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी
इबोला के बढ़ते मामले से अफ्रीका में चिंता, युगांडा-सूडान में अलर्ट, केन्या ने भी निगरानी बढ़ाई, 80 मौतें और 246 संदिग्ध केस, WHO ने घोषित की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी
अफ्रीका के कांगो और युगांडा में इबोला वायरस (Ebola Virus) का खतरा तेजी से फैल रहा है। हालात को गंभीर देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। अब तक इस वायरस से करीब 80 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 246 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं। कई देशों में इस बीमारी के फैलने की आशंका के चलते निगरानी और बढ़ा दी गई है।
कांगो के इटुरी प्रांत में सबसे ज्यादा असर
सबसे ज्यादा मामले कांगो के पूर्वी इटुरी प्रांत में सामने आए। यहां के बुनीया, रवामपारा और मोंगब्वालू जैसे इलाकों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। शुरुआती जांच में पता चला है कि पहला मामला एक नर्स से जुड़ा हो सकता है, जिसकी मौत अप्रैल के अंत में हुई थी। इसके बाद संक्रमण धीरे-धीरे अन्य लोगों में फैल गया।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार अब तक 8 मामलों की लैबोरेट्री में पुष्टि हो चुकी है, जबकि दर्जनों अन्य संदिग्ध हैं। स्थानीय लोगों के बीच डर का माहौल है, क्योंकि कई जगहों पर अचानक मौतों की खबरें सामने आ रही हैं।

युगांडा तक पहुंचा संक्रमण
इबोला का असर अब पड़ोसी देश युगांडा तक भी पहुंच चुका है। राजधानी कंपाला में कांगो से आए 2 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें से एक मरीज की अस्पताल में मौत हो गई। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक स्थानीय स्तर पर बड़े फैलाव की पुष्टि नहीं की है।
इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार आवाजाही के कारण संक्रमण के फैलने का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से युगांडा और आसपास के देशों में निगरानी प्रणाली को मजबूत किया गया है।

वायरस के नए स्ट्रेन से बढ़ी चिंता
इस बार संक्रमण का कारण “बुंडिबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन” बताया जा रहा है। यह वही वायरस परिवार है जो इबोला बीमारी का कारण बनता है, लेकिन इसके अलग-अलग स्ट्रेन होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार चिंता की बात यह है कि अब तक जो वैक्सीन और इलाज उपलब्ध हैं, वे मुख्य रूप से जायरे (Zaire) स्ट्रेन को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। ऐसे में नए स्ट्रेन के सामने आने से नियंत्रण में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
इबोला क्या है और कैसे फैलता है?
Ebola Virus Disease एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे खून, उल्टी, पसीना या वीर्य के संपर्क से फैलता है। यह बीमारी सामान्य संपर्क, हवा या पानी से नहीं फैलती, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा होता है।

इसके लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त और शरीर से खून बहना शामिल हो सकता है। इस बीमारी की मृत्यु दर काफी अधिक रही है, कुछ प्रकोपों में यह 25% से 90% तक दर्ज की गई है।
स्वास्थ्यकर्मियों की मौत, पड़ोसी देशों में सतर्कता
रिपोर्ट के अनुसार इस प्रकोप में कम से कम चार स्वास्थ्यकर्मियों की भी मौत हो चुकी है। इससे अस्पतालों और इलाज केंद्रों में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई स्वास्थ्य केंद्रों में संक्रमण रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानियां अपनाई जा रही हैं। सुरक्षात्मक उपकरणों की कमी और जागरूकता की कमी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
कांगो और युगांडा के हालात को देखते हुए आसपास के देशों ने भी अलर्ट जारी कर दिया है। केन्या जैसे देशों ने सीमा पर जांच बढ़ा दी है और निगरानी टीमों को सक्रिय कर दिया है। यात्रियों की स्क्रीनिंग की जा रही है ताकि संक्रमण को दूसरे देशों में फैलने से रोका जा सके।

इतिहास में इबोला का सबसे बड़ा प्रकोप
2014–2016 West Africa Ebola Outbreak इबोला का सबसे बड़ा और खतरनाक प्रकोप माना जाता है। इस दौरान 11 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इबोला का पहला मामला 1976 में सामने आया था और तभी से यह समय-समय पर अफ्रीका के अलग-अलग हिस्सों में फैलता रहा है।
फिलहाल, स्वास्थ्य एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं। WHO ने इमरजेंसी कमेटी की बैठक बुलाने की तैयारी की है ताकि संक्रमण के फैलाव को रोका जा सके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय बढ़ाया जा सके। हालांकि अभी स्थिति गंभीर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर निगरानी, रोकथाम और इलाज के जरिए इसके फैलाव को नियंत्रित किया जा सकता है।
Varsha Shrivastava 
