ChatGPT said: ब्रिक्स सम्मेलन में भोपाल की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भोपाल में आयोजित रेकी हीलिंग और मेडिटेशन सेशन में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं का अनुभव किया। वहीं, सांस्कृतिक महोत्सव में ब्रिक्स देशों के कलाकारों ने लोक संगीत और पारंपरिक नृत्यों के जरिए अपनी विरासत की झलक पेश की।
भोपाल। ब्रिक्स सम्मेलन के अवसर पर भोपाल में आयोजित एक विशेष रेकी हीलिंग एवं मेडिटेशन सेशन अंतरराष्ट्रीय आकर्षण का केंद्र बना। होटल ताज लेकफ्रंट में आयोजित इस कार्यक्रम में ब्रिक्स से जुड़े 10 देशों के डेलीगेट्स, भोपाल के प्रमुख इन्फ्लुएंसर्स तथा विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथियों ने भाग लेकर रेकी और मेडिटेशन का अनुभव किया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और ऊर्जा विज्ञान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना था।

सेशन का संचालन ऊर्जा गुरु आयुष गुप्ता ने किया। उन्होंने विदेशी प्रतिनिधियों को रेकी हीलिंग की विधि समझाते हुए बताया कि रेकी शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को मेडिटेशन के साथ रेकी का अभ्यास भी कराया।

आयुष गुप्ता ने कहा कि रेकी से मस्तिष्क की ऊर्जाओं को शांति मिलती है और मन एकाग्र होता है। उन्होंने बताया कि जब हम तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) के विशेष स्पर्श के साथ ध्यान करते हैं, तो ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने प्रतिभागियों से अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करने और प्रकृति की ऊर्जा को महसूस करने का आह्वान किया। उनके अनुसार रेकी व्यक्ति के भीतर छिपी ऊर्जा को जागृत कर मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होती है। कार्यक्रम में ऋषिकेश से आए शिशिर ऊषा भारती ने भी सहभागिता की। उन्होंने भारतीय योग और ध्यान परंपरा की महत्ता बताते हुए कहा कि योग, मेडिटेशन और रेकी का समन्वय व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है।

कार्यक्रम में उपस्थित दिलीप सूर्यवंशी जी ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में रेकी हीलिंग अत्यंत आवश्यक है। यह न केवल सांसों को सहज बनाती है, बल्कि व्यक्ति के भीतर छिपी आध्यात्मिक शक्ति और ज्ञान को भी जागृत करती है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा गुरु आयुष गुप्ता जिस समर्पण के साथ लोगों को ऊर्जा और आध्यात्मिक जागरूकता से जोड़ रहे हैं, वह भविष्य के लिए प्रेरणादायक है। ब्रिक्स सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन में इस प्रकार का योगदान भोपाल के लिए गौरव की बात है।
कार्यक्रम में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों ने भी रेकी हीलिंग और मेडिटेशन को सकारात्मक एवं अनूठा अनुभव बताते हुए भारतीय वेलनेस परंपरा की सराहना की। भोपाल के इन्फ्लुएंसर्स ने भी इस पहल को मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवनशैली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

भोपाल को 'एनर्जी हब' बनाने की पहल
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भोपाल को देश का "एनर्जी और वेलनेस हब" बनाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि योग, रेकी और मेडिटेशन जैसी भारतीय विधाओं के माध्यम से भोपाल वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक पर्यटन और वेलनेस गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकता है। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान आयोजित यह सेशन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
ब्रिक्स देशों के कलाकारों ने पेश की लोक परंपराओं की रंगारंग झलक
भोपाल में ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन चल रहा है। आज इसका दूसरा दिन था। इस दौरान सदस्य देशों के संस्कृति मंत्रियों ने सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की। घोषणा पत्र के मसौदे पर विचार-विमर्श किया और भविष्य की सांस्कृतिक साझेदारी को मजबूत करने से जुड़े विभिन्न विषयों पर मंथन किया।

वहीं, रवींद्र भवन में आयोजित ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव में सदस्य देशों के कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियां भी दीं। विभिन्न देशों के कलाकारों ने लोक संगीत, पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी समृद्ध विरासत की झलक पेश की।
ब्राजील के कलाकारों ने एफ्रो-ब्राजीलियाई सांस्कृतिक परंपरा ‘कैपोएरा’ का प्रदर्शन किया, जिसमें मार्शल आर्ट, नृत्य, संगीत और एक्रोबैटिक कला का अनूठा मेल देखने को मिला। वहीं, बेलारूस के गेनाडी त्सितोविच नेशनल एकेडमिक लोक कॉयर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ बेलारूस के कलाकारों ने पारंपरिक लोकगीतों और हास्य लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी।

भारत की ओर से “मारू रंग - राजस्थान की विरासत” कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसमें घूमर, चरी, कालबेलिया और भवाई जैसे लोकनृत्यों के माध्यम से राजस्थान की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन किया गया।


