INDIA ब्लॉक की बड़ी बैठक : शिवराज बोले- राहुल गांधी की लीडरशिप स्वीकार नहीं... इसलिए सहयोगी नहीं आ रहे
Shivraj Singh Chouhan on INDI Bloc Meeting : मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सवाल किया कि जिसे कांग्रेसी नेता नहीं मान रहे उसे देश नेता कैसे मानेगा।
Shivraj Singh Chouhan on INDI Bloc Meeting : नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंडी ब्लॉक की प्रस्तावित बैठक को लेकर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन राहुल गांधी को नेता मानने को तैयार नहीं है। कांग्रेस के नेता भी राहुल गांधी को नेता मानने को राजी नहीं हैं। मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सवाल किया कि जिसे कांग्रेसी नेता नहीं मान रहे उसे देश नेता कैसे मानेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की लीडरशिप स्वीकार नहीं होने के कारण सहयोगी दल बैठक में नहीं आ रहे।
बैठक से पहले ही बिखराव के आरोप
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इंडी गठबंधन बैठक से पहले ही बिखर गया है। डीएमके बैठक में नहीं आ रही है। अखिलेश यादव कहीं और व्यस्त हैं। आप ने पहले ही बैठक में आने से मना कर दिया है। उद्धव ठाकरे फिजिकली नहीं बल्कि वर्चुअली जुड़ेंगे। उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी खुद कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में कह रहे हैं कि मुझे नेता मानो और मुझ पर विश्वास करो।
शुद्ध वोटर लिस्ट पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने शुद्ध वोटर लिस्ट को लोकतंत्र की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट में गलत नाम जुड़े तो लोकतंत्र ही मर जाएगा। जो जीवित नहीं बचा उसका नाम वोटर लिस्ट से काटने पर आपत्ति क्यों है। जो देश का नागरिक नहीं है उसका नाम वोटर लिस्ट में क्यों जुड़ना चाहिए। पवित्र लोकतंत्र के लिए वोटर लिस्ट का शुद्ध होना जरूरी है।
हार का ठीकरा फोड़ने का आरोप
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे मैदान में जीत नहीं पाते इसलिए हार का ठीकरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फोड़ते हैं। उन्होंने सवाल किया कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की 37 सीटें कैसे आ गईं। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग चुनाव परिणाम क्यों आते हैं। हार गए तो वोट चोरी का बहाना बनाते हैं।
जनता अब समझती है
उन्होंने कहा कि वोट चोरी नहीं हुए हैं। देश अब समझता है इसलिए ऐसे लोगों को कांग्रेस को जनता ने वोट देना बंद कर दिया है। शिवराज सिंह चौहान के इन बयानों ने राजनीतिक चर्चा को नया मोड़ दे दिया है। विपक्षी दलों की एकजुटता और नेतृत्व के मुद्दे पर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं वोटर लिस्ट की शुद्धता को लेकर भी बहस तेज होने की संभावना है।

