बिहार में NDA 5 राज्यसभा सीटों पर जीतीं: वोट विवाद से हरियाणा में काउंटिंग रुकी, क्रॉस वोटिंग से ओडिशा में बढ़ा रोमांच

हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों के लिए हुआ मतदान। बिहार में NDA का क्लीन स्वीप, पांचों राज्यसभा सीटों पर दर्ज की जीत।

बिहार में NDA 5 राज्यसभा सीटों पर जीतीं: वोट विवाद से हरियाणा में काउंटिंग रुकी, क्रॉस वोटिंग से ओडिशा में बढ़ा रोमांच
Rajya Sabha Election 2026

बिहार, हरियाणा और ओडिशा की कुल 11 राज्यसभा सीटों के लिए सोमवार को मतदान हुआ। बिहार में सत्तारूढ़ NDA ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर ली है। इस जीत के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन राज्यसभा पहुंच गए हैं।

वहीं, हरियाणा में दो कांग्रेस विधायकों के वोटों पर आपत्ति के चलते मतगणना रोक दी गई है, जबकि ओडिशा में मतगणना जारी है और क्रॉस वोटिंग के कारण मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।

बिहार में NDA का दबदबा, सभी सीटों पर जीत

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में थे। विधानसभा में NDA के पास भारी बहुमत होने के कारण चार सीटों पर उसकी जीत पहले से लगभग तय मानी जा रही थी। अंततः NDA ने पांचों सीटें जीतकर महागठबंधन को बड़ा झटका दिया।

जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन को 44-44 वोट मिले। इसके अलावा रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा को 42-42 वोट प्राप्त हुए। पांचवीं सीट के लिए मुकाबला थोड़ा रोचक रहा।

पहली वरीयता के वोटों में भाजपा उम्मीदवार शिवेश राम को 30 वोट मिले, जबकि आरजेडी के एडी सिंह को 37 वोट मिले थे। हालांकि दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती में शिवेश राम ने बढ़त बना ली और अंततः जीत हासिल कर ली।

हालांकि आरजेडी के विधायक सर्वजीत ने दावा किया कि उनके उम्मीदवार एडी सिंह को 38 वोट मिले हैं। इस पर विवाद की स्थिति भी बनी हुई है। फिर भी अंतिम परिणाम में NDA ने पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर ली।

महागठबंधन के विधायक नहीं पहुंचे, NDA को मिला फायदा

बिहार में मतदान के दौरान महागठबंधन के कुछ विधायक वोटिंग में शामिल नहीं हुए, जिससे NDA को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिला। जानकारी के अनुसार NDA के सभी 202 विधायकों ने मतदान किया, जबकि महागठबंधन के सिर्फ 37 विधायक ही वोट डालने पहुंचे।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस के तीन और आरजेडी के एक विधायक वोटिंग के लिए नहीं पहुंचे। इससे विपक्ष की स्थिति कमजोर हो गई और NDA को पांचवीं सीट जीतने में भी आसानी मिल गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर महागठबंधन के सभी विधायक मौजूद रहते तो मुकाबला थोड़ा और कड़ा हो सकता था।

हरियाणा में वोटों पर आपत्ति, मतगणना रोकी गई

हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान के बाद मतगणना शुरू होने से पहले ही विवाद खड़ा हो गया। दो कांग्रेस विधायकों के वोटों पर आपत्ति जताए जाने के बाद मतगणना की प्रक्रिया रोक दी गई।

जानकारी के अनुसार भाजपा के पोलिंग एजेंट गौरव गौतम और पार्टी के चुनाव एजेंट किशन बेदी ने कांग्रेस के दो वोटों पर आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि इन वोटों में नियमों का उल्लंघन हुआ है। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी भाजपा के मंत्री अनिल विज के वोट पर सवाल उठाए हैं।

इस विवाद के चलते मतगणना एक घंटे से अधिक समय तक रुकी रही। चुनाव अधिकारियों द्वारा आपत्तियों की जांच की जा रही है। इसके बाद ही मतगणना दोबारा शुरू होने की संभावना है।

हरियाणा में मुकाबला रोचक, क्रॉस वोटिंग का डर

हरियाणा विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं। राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव हो रहा है और तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 31 वोटों की जरूरत है।

भाजपा के पास 48 विधायक हैं, इसलिए उसके एक उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। इसके बाद भाजपा के पास 17 वोट बचते हैं, जो निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को मिल सकते हैं। अगर तीन निर्दलीय और इनेलो के दो विधायक उनका समर्थन करते हैं तो यह संख्या 22 तक पहुंच सकती है, जो जीत से अभी भी 9 वोट कम है।

वहीं कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। अगर सभी विधायक एकजुट रहते हैं तो पार्टी के उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध आसानी से जीत सकते हैं। हालांकि पार्टी को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। पहले भी 2016 और 2022 के राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग के कारण नुकसान उठाना पड़ा था।

ओडिशा में क्रॉस वोटिंग से बढ़ा चुनावी रोमांच

ओडिशा में विधानसभा की 147 सीटों के लिए राज्यसभा की चार सीटों पर चुनाव हो रहा है। यहां कुल पांच उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प बन गया है। जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 30 वोटों की जरूरत है।

भाजपा के दो उम्मीदवार मनमोहन सामल और सुजीत कुमार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं बीजेडी के पास 48 विधायक हैं और उसने दो उम्मीदवार उतारे हैं—संत्रुप्त मिश्रा और दत्तेश्वर होता। मिश्रा की जीत लगभग निश्चित मानी जा रही है, जबकि चौथी सीट के लिए कड़ा मुकाबला है।

भाजपा ने इस सीट के लिए दिलीप राय को समर्थन दिया है। दूसरी ओर कांग्रेस के 14 और माकपा के एक विधायक होता के पक्ष में माने जा रहे हैं। ऐसे में क्रॉस वोटिंग का असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।

नवीन पटनायक ने उठाए मतदान प्रक्रिया पर सवाल

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने मतदान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्रह्मगिरि की एक विधायक ने वोटिंग के दौरान गलती की थी, लेकिन मतदान अधिकारी ने नियमों के खिलाफ जाकर उनका वोट स्वीकार कर लिया और उन्हें दूसरा वोट डालने की अनुमति दे दी।

पटनायक ने कहा कि इस तरह की घटनाएं चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं और इसकी जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस विधायक ने अपनी ही पार्टी पर साधा निशाना

ओडिशा में कांग्रेस की विधायक सोफिया फिरदौस ने भी अपनी ही पार्टी पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव की तैयारियों में पार्टी ने उन्हें नजरअंदाज किया। उन्होंने बीजेडी को दिए जा रहे समर्थन की भी आलोचना की। उनके इस बयान के बाद ओडिशा की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद सामने आ रहे हैं।

तीनों राज्यों में हुए राज्यसभा चुनावों ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि विधानसभा में संख्याबल के साथ-साथ राजनीतिक रणनीति और विधायकों की एकजुटता भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। बिहार में जहां NDA ने पूरी तरह दबदबा दिखाया, वहीं हरियाणा और ओडिशा में क्रॉस वोटिंग और वोट विवाद के कारण चुनावी समीकरण आखिरी समय तक दिलचस्प बने हुए हैं।