फर्जी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन का नया खेल: MP में गधे का बना सर्टिफिकेट, ₹2050 फीस भरते ही रजिस्ट्रेशन नंबर जारी

गधे की फोटो और अधूरे दस्तावेज: एमपी में गधे के नाम पर जारी हुआ नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, NSUI ने उठाए MPNRC की ऑनलाइन व्यवस्था पर गंभीर सवाल

फर्जी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन का नया खेल: MP में गधे का बना सर्टिफिकेट, ₹2050 फीस भरते ही रजिस्ट्रेशन नंबर जारी

भोपाल। मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने दावा किया है कि काउंसिल के ऑनलाइन पोर्टल पर गधे की फोटो और ऐसे दस्तावेज अपलोड करने के बाद भी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी हो गया। उनके मुताबिक, यह पूरा आवेदन ऑनलाइन व्यवस्था की जांच के लिए किया गया था। मामले के सामने आने के बाद रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

गधे की फोटो लगाकर किया ऑनलाइन आवेदन

रवि परमार के मुताबिक, ऑनलाइन आवेदन में आवेदक के नाम के तौर पर ‘डंकी’ लिखा गया और फोटो के स्थान पर गधे की तस्वीर अपलोड की गई। पिता और माता के नाम समेत अन्य जानकारियां भी मनमाने तरीके से भरी गईं। जाति के कॉलम में ‘एनिमल’ लिखा गया। आवेदन में भोपाल नर्सिंग कॉलेज और भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC) को ट्रेनिंग सेंटर के तौर पर दर्ज किया गया।

परमार का दावा है कि 10वीं और 12वीं के अंक और रोल नंबर भी वास्तविक शैक्षणिक रिकॉर्ड के बजाय मनमाने तरीके से भरे गए। ट्रेनिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट और डिग्री या डिप्लोमा से जुड़े दस्तावेजों की जगह कथित तौर पर खाली कागज अपलोड किए गए।

₹2050 फीस के बाद जारी हुआ सर्टिफिकेट

NSUI नेता के अनुसार, आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद 2050 रुपए ऑनलाइन फीस जमा की गई। उनका दावा है कि 25 सितंबर को भुगतान के करीब पांच मिनट बाद ऑनलाइन नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी हो गया।

परमार ने इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो भी जारी किया है। उनके मुताबिक, जारी हुए डिजिटल सर्टिफिकेट में रजिस्ट्रेशन नंबर और डिजिटल साइन दिखाई दे रहे हैं। इसी आधार पर NSUI ने काउंसिल की ऑनलाइन व्यवस्था में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

दस्तावेजों की जांच पर उठे सवाल

रवि परमार का कहना है कि अगर बिना वास्तविक शैक्षणिक दस्तावेजों और पहचान की पुष्टि के रजिस्ट्रेशन जारी हो सकता है, तो फर्जी दस्तावेजों के जरिए रजिस्ट्रेशन हासिल करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की है कि यह जांच की जाए कि आवेदन किस स्तर पर स्वीकृत हुआ और दस्तावेजों का सत्यापन कैसे किया गया।

उन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था संचालित करने वाली एजेंसी MP Online की भूमिका की भी जांच की मांग की है। NSUI का कहना है कि जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि सिस्टम में तकनीकी खामी थी या आवेदन की जांच करने की प्रक्रिया में लापरवाही हुई।

मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा मामला

NSUI जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सामान्य ऑनलाइन प्रमाणपत्र नहीं है। रजिस्टर्ड नर्स अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की देखभाल से जुड़ी जिम्मेदारी निभाते हैं। इसलिए रजिस्ट्रेशन से पहले आवेदक की पहचान, शैक्षणिक योग्यता, मार्कशीट, प्रशिक्षण और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच जरूरी है। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति बिना वास्तविक योग्यता के रजिस्ट्रेशन हासिल कर लेता है और बाद में इसका इस्तेमाल नौकरी के लिए करता है, तो इससे मरीजों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

स्वतंत्र जांच की मांग

NSUI ने पूरे मामले की तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराने की मांग की है। संगठन चाहता है कि जांच में यह पता लगाया जाए कि कथित आवेदन किस स्तर पर स्वीकार हुआ और सर्टिफिकेट जारी होने की प्रक्रिया में किन स्तरों पर सत्यापन किया गया। मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और डिजिटल रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध हैं।

मामले में अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित सर्टिफिकेट किस तकनीकी प्रक्रिया के तहत जारी हुआ और काउंसिल की ओर से इस पर क्या कार्रवाई की जाती है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, काउंसिल की ऑनलाइन व्यवस्था को लेकर जांच और जवाबदेही की मांग उठ रही है।