कागजों में दिवंगत हुए जीवित पिता : सचिव को रिश्वत न देने पर सरकारी रिकॉर्ड में मार दिया, अब कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहा बेटा

कैंसर पीड़ित मां के देहांत के बाद भवन निर्माण की सहायता राशि के लिए दर-दर भटक रहा परिवार; आरोप- घूस देने से इनकार पर सचिव ने जीवित व्यक्ति को घोषित कर दिया मृत

कागजों में दिवंगत हुए जीवित पिता : सचिव को रिश्वत न देने पर सरकारी रिकॉर्ड में मार दिया, अब कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहा बेटा

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का एक दिल दहला देने वाला और अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। अंबा गांव के रहने वाले हिमांशु पांडे अपने जीवित पिता को कागजों में जिंदा साबित करने के लिए अधिकारियों की चौखट और कलेक्ट्रेट परिसर के चक्कर काटने को मजबूर हैं। आरोप है कि पंचायत सचिव ने केवल इसलिए उनके जीवित पिता को शासकीय रिकॉर्ड में मृत दर्ज कर दिया, क्योंकि परिवार ने अनुचित रिश्वत देने से साफ इनकार कर दिया था।

कैंसर से हुआ माँ का निधन 

पीड़ित हिमांशु पांडे ने बताया कि उनकी माता स्व. सरोज पांडे का 27 फरवरी 2026 को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से निधन हो गया था। माताजी के निधन के पश्चात शासन की जनकल्याणकारी योजना के तहत भवन निर्माण के लिए मिलने वाली सहायता राशि के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई। योजना में नॉमिनी के तौर पर हिमांशु के पिता सुमरित लाल पांडे का नाम दर्ज था।

रिश्वत देने से मना किया 

हिमांशु पांडे का गंभीर आरोप है कि जब वे सहायता राशि की फाइल आगे बढ़ाने के लिए संबंधित ग्राम पंचायत सचिव के पास पहुंचे, तो सचिव द्वारा अनुचित पैसों की मांग की गई। आर्थिक तंगी और स्वाभिमान के कारण जब हिमांशु ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया, तो सचिव ने दुर्भावनापूर्वक और घोर लापरवाही बरतते हुए रिकॉर्ड में उनके जीवित पिता सुमरित लाल पांडे को ही 'मृत' घोषित कर दिया।

शासन की हितग्राही योजना की राशि अटकी 

एक तरफ जहां पीड़ित पिता रोजमर्रा के काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पंचायत के सरकारी दस्तावेज उन्हें मृत बता रहे हैं, जिसके कारण शासन की हितग्राही योजना की राशि अटक गई है। इस पूरे फर्जीवाड़े और संवेदनहीनता ने रीवा के मैदानी प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर भ्रष्ट सचिव के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, शासकीय अभिलेखों में पिता को तत्काल जीवित दर्ज किया जाए और बची हुई सहायता राशि जल्द से जल्द जारी की जाए।

पीड़ित हिमांशु पांडे