Gen-Z के मन में क्या है? C-Voter के सर्वे ने सब बता दिया
C-Voter Snap Poll में Gen-Z युवाओं की सोच की तस्वीर सामने आई है। सर्वे के मुताबिक 75.1% युवा माता-पिता को अपना सबसे भरोसेमंद मानते हैं। वहीं राष्ट्रवाद अब भी युवाओं के लिए महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा है। नेताओं की गाली-गलौज और अपमानजनक भाषा को लेकर भी युवाओं की राय बंटी हुई नजर आई।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में पली-बढ़ी Gen-Z को अक्सर इंटरनेट, इन्फ्लुएंसर्स और ऑनलाइन कंटेंट से प्रभावित पीढ़ी के तौर पर देखा जाता है। लेकिन C-Voter Snap Poll के हवाले से सामने आए आंकड़े युवाओं की सोच की एक अलग तस्वीर पेश करते हैं। सर्वे से जुड़े आंकड़ों में भरोसा, राष्ट्रवाद और नेताओं की भाषा जैसे मुद्दों पर Gen-Z की राय सामने आई है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि सोशल मीडिया की भारी मौजूदगी के बावजूद भरोसे के मामले में परिवार का प्रभाव सबसे मजबूत दिखाई देता है।
75.1% Gen-Z का सबसे बड़ा भरोसा माता-पिता पर
सर्वे के मुताबिक, 75.1 प्रतिशत Gen-Z युवाओं ने माता-पिता को अपना सबसे भरोसेमंद माना। इसके मुकाबले सिर्फ 6.9 प्रतिशत ने दोस्तों और 6.8 प्रतिशत ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को सबसे ज्यादा भरोसेमंद बताया।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Gen-Z को सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया से सबसे ज्यादा जुड़ी पीढ़ियों में गिना जाता है। इसके बावजूद भरोसे के मामले में परिवार का प्रभाव सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से कई गुना ज्यादा दिखाई देता है।
यानी ऑनलाइन लोकप्रियता और व्यक्तिगत भरोसा एक ही चीज नहीं है। कोई इन्फ्लुएंसर लाखों लोगों तक पहुंच सकता है, लेकिन युवाओं के निजी भरोसे में माता-पिता अब भी सबसे आगे हैं।
राष्ट्रवाद अभी भी चुनावी मुद्दा
C-Voter Snap Poll के दूसरे आंकड़े में Gen-Z से पूछा गया कि क्या राष्ट्रवाद अभी भी चुनावी पिच का बड़ा मुद्दा है?
इस सवाल पर 49.5 प्रतिशत युवाओं ने सहमति जताई। वहीं 26.5 प्रतिशत ने असहमति जताई, जबकि 24 प्रतिशत ने कोई स्पष्ट राय नहीं दी।
यानी करीब आधे Gen-Z युवाओं के लिए राष्ट्रवाद अभी भी चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा है। हालांकि, 26.5 प्रतिशत की असहमति और 24 प्रतिशत की स्पष्ट राय न होने की स्थिति यह भी बताती है कि युवा मतदाताओं के बीच इस मुद्दे को लेकर एक जैसी सोच नहीं है।
नेताओं की गाली-गलौज वाली भाषा पर बंटी राय
सर्वे में सोशल मीडिया पर नेताओं और चर्चित हस्तियों की गाली-गलौज या अपमानजनक भाषा को लेकर भी युवाओं से सवाल किया गया।
इसके जवाब में:
- 21.4% ने ऐसी भाषा को पूरी तरह स्वीकार्य माना।
- 15.1% ने इसे कुछ हद तक स्वीकार्य माना।
- 29.1% ने इसे शायद स्वीकार्य नहीं माना।
- 21.1% ने ऐसी भाषा को पूरी तरह अस्वीकार किया।
- 13.4% ने कोई स्पष्ट राय नहीं दी।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि नेताओं की आक्रामक या अपमानजनक भाषा को लेकर Gen-Z में स्पष्ट सहमति नहीं है। एक बड़ा वर्ग इसे स्वीकार नहीं करता, जबकि कुछ युवा इसे पूरी तरह या कुछ हद तक स्वीकार्य भी मानते हैं।
- पहला— डिजिटल युग के बावजूद परिवार और माता-पिता का प्रभाव बेहद मजबूत है।
- दूसरा— राष्ट्रवाद अभी भी Gen-Z के एक बड़े हिस्से के लिए चुनावी मुद्दा है।
- तीसरा— सोशल मीडिया और नेताओं की ऑनलाइन भाषा युवाओं के राजनीतिक अनुभव का हिस्सा बन चुकी है, लेकिन अपमानजनक भाषा को लेकर युवाओं की राय बंटी हुई है।
C-Voter के आंकड़े बताते हैं कि Gen-Z डिजिटल दुनिया से जुड़ी होने के बावजूद भरोसे के मामले में परिवार को सबसे ऊपर रखती है। वहीं राष्ट्रवाद अब भी युवाओं के लिए अहम चुनावी मुद्दा है, जबकि नेताओं की भाषा को लेकर उनकी राय बंटी हुई है।
Varsha Shrivastava 
