रियाज मंजिल शत्रु संपत्ति विवाद : कोर्ट में सुनवाई, प्रमाण-पत्र मिला लेकिन वैधता पर सवाल; अगली तारीख 28

Enemy Property Case : नोटिसधारियों को दस्तावेजों का परीक्षण कर अगली सुनवाई 28 सितंबर सोमवार को लिखित आपत्तियां, दस्तावेज और अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है।

रियाज मंजिल शत्रु संपत्ति विवाद : कोर्ट में सुनवाई, प्रमाण-पत्र मिला लेकिन वैधता पर सवाल; अगली तारीख 28

Enemy Property Case : भोपाल। भोपाल रियासत के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम से जुड़ी संपत्तियों को लेकर चल रहा ‘शत्रु संपत्ति’ विवाद गुरुवार को महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया। न्यायालय सहायक अभिरक्षक शत्रु संपत्ति एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) के समक्ष कोहेफिजा के खानूगांव स्थित रियाज मंजिल कोठी और उससे जुड़ी भूमि के कब्जाधारियों को जारी कारण बताओ नोटिसों पर सुनवाई हुई।

सुनवाई में उपस्थित नोटिसधारियों ने अपना पक्ष रखने से पहले कार्रवाई के आधार बने दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की। इस पर उन्हें शिकायतकर्ता अमिताभ अग्निहोत्री की शिकायत तथा शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय से संबंधित 29 अप्रैल 2024 के कथित प्रमाण-पत्र की प्रतियां उपलब्ध कराई गईं। नोटिसधारियों को अब इन दस्तावेजों का परीक्षण कर अगली सुनवाई 28 सितंबर सोमवार को लिखित आपत्तियां, दस्तावेज और अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है।

करीब 25 लोगों को नोटिस, खसरा नं. 42 से जुड़ा मामला प्रशासन ने 16 सितंबर से कोहेफिजा क्षेत्र में कारण बताओ नोटिस जारी करना शुरू किया था। सामने आए नोटिस में खसरा क्रमांक 42/10 से संबंधित कब्जाधारियों को 24 सितंबर को उपस्थित होने को कहा गया था। प्रकाशित रिपोर्टों में भी खसरा नं. 42 से संबंधित वर्तमान भू-स्वामियों को नोटिस जारी होने और राजस्व रिकॉर्ड के कॉलम-12 में “शत्रु संपत्ति जांच” की प्रविष्टि होने की पुष्टि हुई है।

नोटिस में कहा गया है कि शिकायत पर हुई जांच के दौरान रियाज मंजिल को File No. 16-01/03/84, दिनांक 29 अप्रैल 2024 के आधार पर शत्रु संपत्ति घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि सुनवाई में कुछ नोटिसधारियों ने उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की प्रामाणिकता और वर्तमान कार्रवाई की वैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग की।

‘स्टे’ का दावा 

कोर्ट ने कहा, आदेश की प्रति पेश करें सुनवाई के दौरान रियाज मंजिल के रहवासियों से जुड़े कुछ लोगों और नोटिसधारियों की ओर से इस मामले में स्थगन आदेश प्रभावी होने की मौखिक जानकारी भी दी गई। इस पर न्यायालय ने कथित स्टे- चाहे वह हाईकोर्ट का हो अथवा Enemy Property Act के तहत सक्षम प्राधिकारी का - अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा है।

इस बिंदु पर स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वर्ष 2024 में  सैफ अली खान, शर्मिला टैगोर और संबंधित पक्षों की 2015 से लंबित याचिकाओं का निस्तारण करते हुए उन्हें Enemy Property Act के तहत उपलब्ध वैधानिक remedy अपनाने को कहा था। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि 30 दिन में representation प्रस्तुत होने पर limitation को आड़े न आने दिया जाए और मामले पर merits के आधार पर विचार किया जाए।

आफताब जहां की नागरिकता भी जांच का अहम सवाल

इस बीच आफताब जहां बेगम की नागरिकता को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। कुछ पक्ष उनके ब्रिटिश नागरिक होने का दावा कर रहे हैं, जबकि इस संबंध में प्रमाणिक दस्तावेज सामने आने बाकी बताए जा रहे हैं। ऐसे में यह तथ्य कि उन्होंने कब और किस देश की नागरिकता ग्रहण की तथा उनकी मृत्यु के समय उनकी नागरिकता क्या थी, संबंधित संपत्तियों के मामले में दस्तावेजी परीक्षण का विषय बन सकता है।

पहले प्रमाण-पत्र की प्रामाणिकता और संपत्तियों की पहचान स्पष्ट हो

घर बचाओ संघर्ष समिति के उप संयोजक एवं अधिवक्ता जगदीश छावानी, जो पूर्व में शत्रु संपत्ति से प्रभावित लोगों की पैरवी कर चुके हैं, का कहना है कि यदि 29 अप्रैल 2024 का प्रमाण-पत्र वास्तव में आफताब जहां बेगम से जुड़ी संपत्तियों को लेकर जारी हुआ है तो सबसे पहले उसकी प्रामाणिकता, उसमें वर्णित संपत्तियों की पूरी सूची, खसरा नंबर और वर्तमान संपत्तियों से उनका संबंध आधिकारिक रिकॉर्ड से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

एडवोकेट छावानी के अनुसार, “लोगों से अपना हक साबित करने को कहने से पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि जिस प्रमाण-पत्र के आधार पर कार्रवाई की जा रही है, उसमें उनकी जमीन वास्तव में शामिल है या नहीं। संबंधित मूल रिकॉर्ड और आदेश सामने आने से अनावश्यक भ्रम और भय दोनों दूर होंगे।”

उनका कहना है कि एसडीएम की Enemy Property Act के तहत भूमिका को पूरी तरह अधिकारविहीन कहना सही नहीं होगा। केंद्र सरकार ने 25 अप्रैल 2024 की अधिसूचना से SDM को अपने क्षेत्र का पदेन Assistant Custodian of Enemy Property नियुक्त किया है। इसलिए मौजूदा विवाद का महत्वपूर्ण प्रश्न अधिकारी के पद का नहीं, बल्कि वर्तमान जांच/सुनवाई का वैधानिक आधार, 29 अप्रैल 2024 के प्रमाण-पत्र की वास्तविक विषय-वस्तु और संबंधित खसरों से उसका संबंध है।

अब अगली सुनवाई महत्वपूर्ण

जून 2026 में भोपाल कलेक्टर ने भी नवाब परिवार से जुड़ी शत्रु संपत्तियों की जांच के निर्देश विभिन्न एसडीएम को दिए थे, जिसमें रियाज मंजिल सहित अन्य संपत्तियों का उल्लेख सामने आया था। ऐसे में अगली सुनवाई सोमवार 28 सितंबर पर नजर रहेगी कि कथित स्टे आदेश, 29 अप्रैल 2024 के प्रमाण-पत्र की मूल/प्रमाणित स्थिति और आफताब जहां की नागरिकता से संबंधित दस्तावेजों में क्या सामने आता है।

फिलहाल पूरी कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- रियाज मंजिल तक सीमित यह विवाद क्या केवल चिह्नित संपत्तियों की जांच है या इसकी जद में दशकों से इन क्षेत्रों में रह रहे अन्य भू-स्वामी भी आएंगे? इसी सवाल का स्पष्ट और दस्तावेज-आधारित जवाब अब प्रभावित रहवासियों के साथ-साथ पूरे भोपाल के लिए जनहित का विषय बन गया है।