Exclusive:पिचिंग के नाम पर सिमटता शहर का छोटा तालाब, प्रशासन की मंशा पर सवाल

भोपाल में बड़े तालाब से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी है, जबकि छोटे तालाब के सिमटने के आरोप सामने आए हैं। पिचिंग के नाम पर किनारों में मलबा डालने की शिकायत NGT तक पहुंची है।

Exclusive:पिचिंग के नाम पर सिमटता शहर का छोटा तालाब, प्रशासन की मंशा पर सवाल

भोपाल:तालाबों की नगरी भोपाल में जल संरक्षण की तस्वीर विरोधाभासी नजर आ रही है। जहां एक तरफ प्रशासन बड़े तालाब से अतिक्रमण हटाने के लिए सख्त कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ छोटे तालाब के सिकुड़ने के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिचिंग के नाम पर तालाब के किनारों में पत्थर और मलबा डालकर धीरे-धीरे उसका क्षेत्र कम किया जा रहा है।

जल स्तर में बदलाव ने बढ़ाई चिंता 

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, पहले जहां तालाब का पानी किनारों तक पहुंचता था, अब वह करीब 10 फीट पीछे चला गया है। यह बदलाव इस ओर इशारा करता है कि किनारों के साथ छेड़छाड़ की गई है। लोगों का आरोप है कि यह सिर्फ मरम्मत नहीं, बल्कि धीरे-धीरे तालाब की जमीन कम करने जैसा काम है।

मामला NGT में, नियमों पर सवाल

इस पूरे मुद्दे को पर्यावरणविद राशिद नूर खान ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में उठाया है। उनका कहना है कि छोटे तालाब को रामसर साइट का दर्जा मिला हुआ है और यह क्षेत्र वेटलैंड नियमों के तहत संरक्षित है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की छेड़छाड़ पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन मानी जाएगी।

राशिद नूर का मानना है कि तालाब के किनारों में इस तरह का हस्तक्षेप उसकी प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचा सकता है। मिट्टी और मलबा पानी में जाने से न सिर्फ जल गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि यहां की जैव विविधता पर भी असर पड़ेगा। लगातार हो रहे इस बदलाव से स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। राहगीरों का कहना है कि पहले यहां सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाई गई थी, लेकिन अब उसे हटाकर पत्थर और मिट्टी डाल दी गई है। लोगों को यह काम असुरक्षित और पर्यावरण के खिलाफ लग रहा है।

नगर निगम ने किया बचाव

वहीं नगर निगम के अधिकारी इन आरोपों से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह कार्य केवल तालाब के किनारों को मजबूत बनाने के लिए किया जा रहा है और इससे तालाब के दायरे में कोई कमी नहीं लाई जा रही है।

फैसले पर टिकी निगाहें

फिलहाल मामला सुनवाई के चरण में है। पर्यावरण प्रेमियों को उम्मीद है कि NGT इस पर गंभीर रुख अपनाएगा। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई के साथ-साथ मलबा हटाने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।