बता दें कि न्यूज चैनलों में आने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने खामेनेई की मौत को लेकर Truth Social पर एक पोस्ट कर कहा था कि—
"इतिहास के सबसे क्रूर व्यक्तियों में से एक खामेनेई मारा गया। यह ईरान की जनता के साथ-साथ अमेरिका और दुनियाभर के देशों के लिए न्याय है।"
खामेनेई की मौत के बाद ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने शोक व्यक्त किया है। ईरानी न्यूज़ एजेंसी फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने कहा कि—
"हमने एक महान नेता खो दिया है और पूरा देश उनका शोक मना रहा है। खामेनेई ने देश और इस्लाम की सच्ची सेवा की और उनकी यह कुर्बानी इसे साबित करती है।"

The Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार, इजराइली सेना ने खामेनेई के घर पर करीब 30 बम गिराए थे। इजराइल और अमेरिका की खुफिया एजेंसियां काफी समय से खामेनेई को मारने की प्लानिंग कर रही थीं। वे मौके की तलाश में थे कि कब खामेनेई बड़े-बड़े नेताओं के साथ मीटिंग में शामिल हों। और ऐसा हुआ भी।

शनिवार, 28 फरवरी की सुबह इजराइली सेना को एजेंट्स के थ्रू पता चला कि खामेनेई तीन अहम बैठकों में शामिल होने वाले हैं। बस मौका पाकर इजराइली लड़ाकू विमानों ने खामेनेई के घर पर करीब 30 बम गिरा दिए, जिससे पूरा घर टूट गया।
CBS की रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में मीटिंग में शामिल करीब 40 ईरानी अधिकारी मारे गए, जिनमें खामेनेई के कई करीबी सलाहकार अली शमखानी, रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर मोहम्मद पाकपुर और रक्षा मंत्री अजीज नसीरजादेह भी शामिल थे।
