ट्रंप ने पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका, रख दी ऐसी मांग जो मुनीर-शहबाज़ सरकार के लिए बनी 'रेड लाइन'
डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और कतर से अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करने की मांग की है। क्या पाकिस्तान इसराइल को मान्यता देगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में एक बार फिर अपनी 'अनप्रेडिक्टेबल' (अप्रत्यक्ष) कूटनीति से दुनिया को चौंका दिया है। ईरान और इसराइल के बीच जारी युद्ध को रोकने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान को ट्रंप ने एक ऐसा अल्टीमेटम दे दिया है, जो इस्लामाबाद के लिए गले की हड्डी बन गया है।
ट्रंप ने साफ शब्दों में मांग की है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और कतर जैसे प्रमुख मुस्लिम देश तुरंत 'अब्राहम अकॉर्ड्स' (Abraham Accords) पर हस्ताक्षर करें और इसराइल को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता दें। ट्रंप की इस मांग ने पाकिस्तान की सैन्य और नागरिक नेतृत्व को बेहद असहज स्थिति में डाल दिया है।
फोन कॉल पर छा गया सन्नाटा': ट्रंप की चौंकाने वाली मांग..
अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट एक्सिओस के मुताबिक, शनिवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, बहरीन और पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के साथ एक संयुक्त फोन कॉल पर चर्चा की। इस बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान शांति समझौते के बदले इन सभी देशों के सामने इसराइल को अपनाने की शर्त रख दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने नेताओं से कहा कि वह जल्द ही इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को लाइन पर लेने वाले हैं। ट्रंप ने जैसे ही गैर-मान्यता प्राप्त देशों से इसराइल के साथ राजनयिक संबंध बनाने को कहा, फोन लाइन पर कुछ पलों के लिए गहरा सन्नाटा छा गया। माहौल को भांपते हुए ट्रंप ने मजाकिया लहजे में पूछा, "क्या आप लोग अब भी लाइन पर हैं.

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा..
मैं अनिवार्य रूप से अनुरोध कर रहा हूं कि सभी देश तुरंत अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करें। इसकी शुरुआत सऊदी अरब और कतर के तत्काल हस्ताक्षर से होनी चाहिए और बाकी देशों को भी उनका अनुसरण करना चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते, तो उन्हें इस समझौते का हिस्सा नहीं होना चाहिए।
पाकिस्तान के लिए यह मांग 'राजनीतिक आत्महत्या' क्यों..
थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल के सीनियर फेलो माइकल कुगलमैन का मानना है कि पाकिस्तान के लिए ट्रंप की गुड बुक्स (अच्छी किताबों) में रहने का यह एक अनिवार्य जोखिम था। कुगलमैन ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, पाकिस्तान के लिए यह मांग असहज करने वाली जरूर है, लेकिन उसे इससे हैरान नहीं होना चाहिए। ट्रंप के साथ आप जितना काम करेंगे, जोखिम उतना ही बढ़ेगा। मौजूदा जनमत को देखते हुए, कोई भी पाकिस्तानी सरकार अगर इसराइल को मान्यता देती है, तो वह सीधे तौर पर राजनीतिक आत्महत्या का जोखिम उठाएगी।

क्या है पाकिस्तान की स्थायी नीति..
पाकिस्तान की स्थापना के बाद से ही उसकी विदेश नीति 'पैन-इस्लामिज्म' (अखंड इस्लामवाद) और फलस्तीन के समर्थन पर टिकी है।
पासपोर्ट पर प्रतिबंध..
हर पाकिस्तानी पासपोर्ट पर स्पष्ट रूप से लिखा होता है- यह पासपोर्ट इसराइल को छोड़कर दुनिया के सभी देशों के लिए मान्य है।
कड़ा रुख..
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ पूर्व में इसराइल को "मान्यता के लिए अभिशाप" और कैंसरग्रस्त स्टेट तक कह चुके हैं।
मुशर्रफ का दौर..
इतिहास में केवल एक बार सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के दौर में इसराइल के साथ संबंधों को सामान्य करने पर अनौपचारिक चर्चा हुई थी, लेकिन घरेलू विरोध के डर से कदम पीछे खींच लिए गए थे।
सऊदी अरब का रुख और पाकिस्तान पर दबाव..
ट्रंप के करीबी सहयोगी माइक इवांस ने द यरूशलम पोस्ट को दिए इंटरव्यू में एक बड़ा दावा किया है। इवांस के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने उनसे कहा था कि वह आज ही इसराइल को मान्यता दे देंगे, लेकिन उनके पिता (किंग सलमान) इसके लिए तैयार नहीं हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि निकट भविष्य में अमेरिकी दबाव या सुरक्षा गारंटी के बदले सऊदी अरब अब्राहम अकॉर्ड्स का हिस्सा बनता है, तो पाकिस्तान पर अपने रुख को बदलने का भारी दबाव होगा। चूंकि पाकिस्तान आर्थिक रूप से सऊदी अरब पर अत्यधिक निर्भर है, इसलिए रियाद का कोई भी फैसला इस्लामाबाद को प्रभावित करेगा।
क्या है 'अब्राहम अकॉर्ड्स' और ट्रंप का गेम प्लान..
अपने पहले कार्यकाल (2020) में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दामाद जारेड कुशनर के जरिए ऐतिहासिक 'अब्राहम अकॉर्ड्स' की शुरुआत की थी। इसके तहत यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान ने इसराइल के साथ अपने दशकों पुराने विवाद को खत्म कर राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। अब ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम जैसे नेता इस योजना को मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिए मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं। ग्राहम के अनुसार, यदि सऊदी और पाकिस्तान इसराइल से हाथ मिलाते हैं, तो यह क्षेत्र "बारूद के ढेर" से बदलकर वैश्विक आर्थिक शक्ति बन सकता है।
पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ के लिए ट्रंप की यह मांग एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा है। एक तरफ जहां भारत के साथ तनाव (ऑपरेशन सिंदूर के बाद) के बीच पाकिस्तान अमेरिका के करीब आया है, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप की यह 'रेड लाइन' पार करना पाकिस्तान के आंतरिक हालातों में आग लगाने जैसा होगा। अब देखना यह है कि इस्लामाबाद बिना ट्रंप को नाराज किए इस चक्रव्यूह से कैसे बाहर निकलता है।

