सांसदों-विधायकों का कोटा खत्म किया हाउसिंग बोर्ड ने

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और शिकायतों को बनाया आधार सांसदों-विधायकों का कोटा खत्म किया हाउसिंग बोर्ड ने

सांसदों-विधायकों का कोटा खत्म किया हाउसिंग बोर्ड ने

मुक्तेश रावत भोपाल: मध्य प्रदेश हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के प्रोजेक्ट्स में सांसदों, विधायकों को मिलने वाला कोटा खत्म कर दिया गया है। पत्रकारों के कोटे पर भी कैंची चली है। अब उनको केवल ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी के मकान में ही आरक्षण का फायदा मिल पाएगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और कुछ शिकायतों का हवाला देते हुए सांसदों-विधायकों और पत्रकारों को मिलने वाला आरक्षण खत्म या फिर कम कर दिया गया है। यह फैसला हाल ही में हाउसिंग बोर्ड के संचालक मंडल की बैठक में लिया गया। हाउसिंग बोर्ड ईडब्ल्यूएस से लेकर एचआईजी श्रेणी तक के फ्लैट और स्वतंत्र डुप्लेक्स का निर्माण करता है। अब तक सभी हाउसिंग प्रोजेक्ट में सांसदों-विधायकों का कोटा रहता था और पत्रकारों को भी तीन फीसदी आरक्षण मिलता था। बोर्ड के ताजा फैसले के मुताबिक, सांसद- विधायकों का कोटा खत्म कर दिया गया है। और पत्रकारों को आरक्षण केवल ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के मकान में ही मिलेगा। वहीं मध्य प्रदेश के लोकतंत्र सेनानियों को आरक्षण देने का फैसला भी लिया गया है। अब तक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को चार फीसदी आरक्षण मिलता रहा है। इसमें ही लोकतंत्र सेनानियों को जोड़ दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा विशेष अधिकार क्यों दिया जा रहा

बताया जा रहा है तमिलनाडु के किसी व्यक्ति ने सरकारी एजेंसियों के प्रोजेक्ट में जनप्रतिनिधियों को दिए जा रहे आरक्षण को लेकर याचिका लगाई थी। उसने जानना चाह था कि उनको यह विशेषाधिकार (प्रिविलेज) क्यों दिया जा रहा है। इस पर पक्ष-विपक्ष के तर्कों को सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि प्रिविलेज यानी विशेष अधिकार की व्यवस्था खत्म की जाए। सांसद और विधायकों का सरकारी प्रोजेक्ट में आरक्षण खत्म किया जाए। इस पर अमल करते हुए हाउसिंग बोर्ड ने फैसला लिया है।

बुकिंग कर ऊंचे दाम पर दूसरों को बेचने की भी शिकायतें

इस निर्णय का एक दूसरा पहलू भी है। हाउसिंग बोर्ड के प्रोजेक्ट में कई प्रभावशाली व्यक्ति आरक्षित वर्ग में मकान बुक कर देते हैं और फिर तुरंत या कुछ समय बाद इनको ऊंचे दाम पर दूसरे लोगों को बेच देते हैं। इससे आरक्षण दिए जाने का प्रावधान ही पूरी तरह गलत साबित हो जाता है। ऐसी कई शिकायत उच्च स्तर तक पहुंच रही थी। ऐसे में कोटा खत्म करने के निर्णय में इस बिंदु का भी प्रमुख रोल रहा।