घुसपैठिए दामाद नहीं जो बिठाकर खिलाएं, जल्दी भागो यहां से, बंगाल CM शुभेंदु अधिकारी की बांग्लादेशियों को दोटूक
पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर उन्हें BSF को सौंपा जाएगा। मुर्शिदाबाद में होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं और बॉर्डर पर सैकड़ों लोग जुटने लगे हैं। जानिए पूरा मामला।
पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों के खिलाफ राज्य सरकार ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को साफ शब्दों में देश छोड़ने की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में कहा कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की पहचान कर उन्हें पुलिस को सौंपा जाए, जिसके बाद BSF उन्हें वापस उनके देश भेजेगी। मुख्यमंत्री अधिकारी ने दोटूक कहा, जल्दी-जल्दी भागो यहां से, वरना एक्शन लेंगे। हम घुसपैठियों को जेल भेजकर रोटी नहीं खिलाएंगे। वह दामाद नहीं हैं, उन्हें भगाया जाएगा। बांग्लादेश के अधिकारी भी कह चुके हैं कि जो उनके लोग होंगे, वे उन्हें वापस ले लेंगे।
हम कपड़े दें, दवाई दें, खाना दें, ये घुसपैठिया हमारे जमाई है क्या?
— Panchjanya (@epanchjanya) May 26, 2026
जल्दी-जल्दी भागो बंगाल से, वरना सरकार को जो करना होगा वो करेगा।
: सुवेन्दु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल pic.twitter.com/wtxldRZeJ8
बॉर्डर पर दिखने लगा असर, हाकिमपुर चेक पोस्ट पर उमड़ी भीड़..
मुख्यमंत्री के इस कड़े बयान और सरकार के एक्शन का असर जमीन पर दिखने लगा है। उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर चेक पोस्ट पर मंगलवार सुबह से ही 100 से ज्यादा विदेशी नागरिकों की भीड़ इकट्ठा हो गई है। बताया जा रहा है कि ये लोग पश्चिम बंगाल के अलग-अलग हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे थे और अब सख्ती के बाद अपना सामान लेकर वापस बांग्लादेश लौटने के लिए बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं।

मुर्शिदाबाद बना पहला जिला, 3 घुसपैठिए भेजे गए होल्डिंग सेंटर..
राज्य सरकार की इस नई मुहिम के तहत मुर्शिदाबाद पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां 3 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार कर 'होल्डिंग सेंटर' भेजा गया है। इन तीनों को भारत में अवैध रूप से घुसपैठ करने के आरोप में पकड़ा गया था।
क्या है 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट' पॉलिसी..
राज्य सरकार ने एक दिन पहले ही घुसपैठियों से निपटने के लिए ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ (खोजो, हटाओ और बाहर निकालो) पॉलिसी को लागू करने का आदेश जारी किया था। इसके तहत:

- 30 दिन की हिरासत:
पकड़े गए संदिग्ध विदेशियों को जिलों में बनाए गए अस्थायी होल्डिंग सेंटर्स में अधिकतम 30 दिन तक रखा जा सकेगा। - बायोमेट्रिक जांच:
इस दौरान उनके दस्तावेजों और नागरिकता की जांच होगी। संदिग्धों का बायोमेट्रिक डेटा लेकर केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। - इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025:
यह पूरी कार्रवाई इसी नए कानून के तहत की जा रही है, जिसमें बिना वारंट गिरफ्तारी और तकनीक के जरिए डिपोर्टेशन की प्रक्रिया को जोड़ा गया है।
CAA के दायरे में आने वाले अल्पसंख्यकों को राहत..
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत आने वाले लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के शिकार होकर 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए 7 अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। उन्हें नागरिकता का लाभ मिलेगा। लेकिन, जो लोग CAA के दायरे में नहीं आते, उन्हें अवैध घुसपैठिया मानकर डिपोर्ट किया जाएगा।

घुसपैठ रोकने के लिए BSF को सौंपी गई जमीन..
बॉर्डर सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए राज्य सरकार ने भारत-बांग्लादेश बॉर्डर की 27 किलोमीटर जमीन BSF को सौंप दी है, जहां जल्द ही फेंसिंग (बाड़बंदी) का काम पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया है कि सीमा सुरक्षा के लिए जहां भी जमीन की जरूरत होगी, राज्य सरकार तुरंत उपलब्ध कराएगी।

बॉर्डर फैक्ट फाइल..
भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 4,097 किलोमीटर लंबी सीमा है। इसमें से सबसे बड़ा हिस्सा यानी 2,216 किलोमीटर अकेले पश्चिम बंगाल से लगता है। अब तक लगभग 3,240 किलोमीटर सीमा पर बाड़ लगाई जा चुकी है, जबकि नदी और दुर्गम इलाकों समेत करीब 850 किलोमीटर पर काम होना बाकी है।

