MP विधानसभा बजट सत्र का 9वां दिन, सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक मामले की जांच को लेकर विपक्ष का हंगामा
सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक मामले की जांच को लेकर सदन में हंगामा। कांग्रेस विधायकों ने जांच के लिए विधानसभा समिति गठित करने की मांग की।
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आज नौवां दिन है। कार्यवाही की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई, जिसमें विधायक विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगें। कांग्रेस विधायकों ने सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक मामले की जांच को लेकर सदन में हंगामा किया। कांग्रेस विधायक जांच के लिए विधानसभा समिति गठित करने की मांग पर अड़े रहे।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार को जनहित में अपनी योजनाओं के बखान के बजाय उनको कैसे लाभ पहुंचे उसकी बात करनी चाहिए। आपने देखा मंत्री योजनाओ के आंकड़े गिना रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर है। मुख्यमंत्री किसानों से बात करना नहीं चाहते, उनके मंत्री युवाओं के नौकरियों की बात नहीं करना चाहते ना पिछड़ों के आरक्षण की बात की है। आज सिंगरौली पुल ब्लॉक को लेकर चर्चा है। वहां विस्थापन को लेकर आदिवासियों में चिंता है। मैं समझता हूं कि सरकार सिंगरौली के लोगों के साथ न्याय करेगी।

सिंगरौली के धिरौली कोयला परियोजना का मामला
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल किया कितने गांव थे? कितनों का विस्थापन हो गया? कितनों का नहीं हुआ? जिसके जवाब में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने बताया कि 8 गांव में से 5 गांव की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। नेता प्रतिपक्ष ने फिर पूछा कि जब 8 गांव आते हैं, तो मतलब 3 गांव का अधिग्रहण नहीं किया गया है। तो फिर कोल विभाग अधिग्रहण किए बगैर कैसे दे दिया है? इस पर मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा- 3.68 अरब से अधिक की राशि से लोगों को बसाएंगे। हर आदिवासी को कम से कम 50 लाख रुपए मिलेंगे।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पूछा- 12 हजार 98 परिवार हैं। इस हिसाब से 2 लाख प्रति परिवार ही मिलेंगे। 50 लाख कैसे मिलेंगे? तो मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि भूमि का दोगुना मुआवजा दिया गया है। मकान का अलग मुआवजा दिया गया। 1552 लोगों को मुआवजा का लाभ मिलेगा। अतिक्रमण करने वालों को लाभ नहीं दिया जाएगा।

पेड़ भी उखड़े जा रहे हैं मिट्टी भी अलग की जा रही है
कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि पेड़ भी उखड़े जा रहे हैं मिट्टी भी अलग की जा रही है हम यही तो कह रहें हैं। क्या आप खुद बोल रहे हैं कि मिट्टी खुद रही है? और आप उससे इनकार कर रहे हैं। जांच करने से सरकार क्यों डर रही है? इस पर सिंगरौली की प्रभारी मंत्री संपत्तियां उइके ने सदन को जानकारी देते हुए बताया कि घिरौली खदान को लेकर 33 हजार पेड़ काटे गए हैं। खदान अभी शुरू नहीं हुई है, अभी पेड़ और मिट्टी हटाने की कार्यवाही हो रही है। इसके अलावा अधिगृहित जमीन को लेकर मुआवजा देना शुरू हो गया है। कई लोगों को मुआवजा दिया जा चुका है, बिना मुआवजा दिए खदान शुरू नहीं होगी। मैं खुद भी आदिवासी हूं और आदिवासियों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा- 3 गांव का अधिग्रहण नहीं हुआ है। पूरा मुआवजा नहीं दिया गया है और कंपनी को काम कैसे दे दिया गया? जब तक जांच नहीं होती काम रुकना चाहिए। आदिवासियों को कब 50-50 लाख मिलेंगे ? 2 महीने के लिए खदान रुक जाएगी तो कुछ बिगड़ेगा नहीं। सरकार ने माना कि पेड़ कट रहे हैं। वहां की लकड़ी छत्तीसगढ़ जा रही थी। वहां के लोगों को हटाया जा रहा है। हमारी मांग है कि एक जेपीसी बना दें, इसमें दोनों के सदस्य आ जाएंगे। इस पर अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा पात्र लोगों को मुआवजा शीघ्र मिलना चाहिए। कोई उल्लंघन होगा तो मंत्री जांच कराएंगे।
CM के निर्देश पर कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह का बयान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वल्लभ भवन, सतपुड़ा भवन और विंध्याचल भवन में अधिकारियों और कर्मचारियों के आने-जाने के समय को लेकर GAD विभाग को छापामार कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। इसको लेकर विधायक जयवर्धन सिंह ने अधिकारियों के निगरानी के लिए बनाई गई टीम पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि क्या यह कोई स्कूल चला रहे हैं? कि अटेंडेंस और निगरानी हर एक अधिकारी पर रखनी पड़ रही है। क्या अपने अधिकारियों पर सीएम को भरोसा नहीं है?
पूरी खबर यहां पढ़ें - मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों और कर्मचारियों...
जयवर्धन सिंह ने कहा कि अधिकारी जन सेवा का काम कर रहे हैं और अपने-अपने विभाग का काम संभाल रहे हैं। आखिर क्या नाैबत आ गई कि सीएम साहब को अलग से टीम बनानी पड़ी सबकी निगरानी करने के लिए? यह कहीं ना कहीं एक प्रकार से जो सरकार और अधिकारियों के बीच में जो संबंध में होना चाहिए जो तालमेल होना चाहिए उसे पर ही यह पूरी बात शंका डालता है। मेरी सलाह रहेगी मुख्यमंत्री जो लोग आपके साथ काम कर रहे हैं, आपके नीतियों को जमीन पर लाने के लिए लगातार उन पर भरोसा कीजिए। कहीं ना कहीं आपको आपके अधिकारियों पर ही भरोसा नहीं है।

पत्रों को पटल पर रखा जाएगा, 2 ध्यान आर्कषण लगाए गए
आज सदन की पटल पर विभिन्न पत्र और प्रतिवेदन रखे जाएंगे। साथ ही सदन में दो ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी लगाए गए हैं। विधायक अभय मिश्रा रीवा जिले में बिजली कार्यों में कथित अनियमितताओं का मामला उठाएंगे। वहीं विधायक लखन घनोरिया प्रदेश की शालाओं में बरती जा रही उदासीनता और व्यवस्थागत कमियों का मुद्दा सदन में रखेंगे।
इसके अलावा वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा के बाद मतदान भी प्रस्तावित है। ऐसे में आज का दिन वित्तीय मामलों और जनहित के मुद्दों को लेकर अहम माना जा रहा है। विपक्ष की ओर से सरकार को घेरने की रणनीति भी तय मानी जा रही है, जबकि सत्ता पक्ष अपने कामकाज और योजनाओं का पक्ष सदन में रखेगा।

8वें दिन निराश्रित गोवंश, अदाणी कोल माइंस, टूटते पुलों को लेकर हंगामा
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन सदन में निराश्रित गोवंश, अदाणी कोल माइंस, मास्टर प्लान और टूटते पुलों के मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस के चलते कार्यवाही कई बार बाधित हुई।
कोल माइंस के लिए पेड़ों की कटाई के मुद्दे पर कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताई। कांग्रेस का कहना था कि कोल माइंस परियोजना के लिए की जा रही पेड़ कटाई गैर जरूरी है और इससे पर्यावरण को नुकसान होगा। वहीं भाजपा की ओर से जवाब दिया गया कि पेड़ कटाई से कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा और सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार की जा रही हैं।
कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मंत्री कह रहे हैं कि मास्टर प्लान बनाकर मुख्यमंत्री को सौंप दिया गया है और वह उनके पास लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच समन्वय की कमी के कारण इंदौर जैसे ऐतिहासिक शहर का मास्टर प्लान अटका हुआ है।
वहीं तराना से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने लोक निर्माण विभाग को घेरते हुए कहा कि जब से राकेश सिंह पीडब्ल्यूडी मंत्री बने हैं, तब से पुल टूटने के मामलों में रिकॉर्ड बन रहा है। उन्होंने भोपाल में बने 90 डिग्री एंगल वाले ब्रिज का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि पुल सही बना था तो संबंधित अधिकारियों को प्रोत्साहित क्यों नहीं किया गया और उन्हें निलंबित क्यों किया गया। उन्होंने सरकार से इस पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
Varsha Shrivastava 
