ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती करने वाले भोपाल के पहले किसान बने रामसिंह कुशवाह
पारंपरिक खेती से प्रगतिशील बागवानी तक का सफर। रामसिंह कुशवाह बने ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती करने वाले भोपाल के पहले किसान।
भोपाल। फन्दा क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ा बोंदर के किसान रामसिंह कुशवाह कभी धान, गेहूं और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहते थे, जिससे उन्हें सीमित आय ही प्राप्त होती थी। आज वे आधुनिक तकनीक से फूलों और फलों की खेती कर प्रतिमाह लाखों रुपये तक की आमदनी अर्जित कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा केवल आर्थिक उन्नति की कहानी नहीं, बल्कि किसान सशक्तिकरण और नवाचार की प्रेरक मिसाल भी है।
रामसिंह कुशवाह बताते हैं कि सरकार की योजनाओं से उन्हें खेती में नई दिशा मिली। वे कहते हैं, “मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। सरकार की एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना ने हमें आत्मनिर्भर बनाया है और समाज में नई पहचान दी है।”
योजना से बदली खेती की दिशा
कुशवाह का परिवार वर्षों से पारंपरिक खेती करता आ रहा था, लेकिन बढ़ती लागत और कम लाभ के कारण आर्थिक चुनौतियां बनी रहती थीं। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना की जानकारी मिली। उन्होंने इस योजना का लाभ लेकर शुरुआत में लगभग 1000 स्क्वायर फीट में पॉलीहाउस बनाकर गुलाब और जरबेरा फूलों की खेती प्रारंभ की।
एक एकड़ में पॉलीहाउस और 30 हजार पौधे
वर्ष 2023–24 में राज्य योजना के तहत उद्यानिकी विभाग से सब्सिडी लेकर उन्होंने एक एकड़ भूमि में पॉलीहाउस स्थापित किया और गुलाब, जरबेरा तथा गेंदा के लगभग 30 हजार पौधे लगाए। इससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 4 हजार कट फ्लावर प्राप्त होने लगे, जिन्हें बेचकर वे 4 से 6 हजार रुपये प्रतिदिन तक की आय अर्जित कर रहे हैं।
ऑटोमेशन सिस्टम से आधुनिक खेती
फूलों के उत्पादन को बढ़ाने और लागत कम करने के लिए इस वर्ष उन्होंने पॉलीहाउस में सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम स्थापित कराया। इस सिस्टम की कुल लागत लगभग 4 लाख रुपये है, जिसमें से 2 लाख रुपये की सब्सिडी सरकार से प्राप्त हुई।
इस ऑटोमेशन सिस्टम के माध्यम से एक एकड़ क्षेत्र में पानी, खाद और दवाइयों की संतुलित मात्रा 24×7 स्वतः नियंत्रित तरीके से दी जाती है। इससे पानी और खाद की बचत के साथ श्रम और समय की भी काफी बचत होती है। इस आधुनिक तकनीक को अपनाकर रामसिंह कुशवाह भोपाल जिले में ऑटोमेटेड पॉलीहाउस बागवानी करने वाले पहले किसान बन गए हैं।
देश के कई शहरों में सप्लाई
रामसिंह कुशवाह के पॉलीहाउस में उगाए गए गुलाब और जरबेरा फूलों की सप्लाई लखनऊ, दिल्ली और जयपुर जैसे बड़े शहरों में की जा रही है। उन्होंने एक एकड़ में लगभग 30 हजार जरबेरा के हाइब्रिड पौधे लगाए हैं और ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली अपनाई है, जिस पर उन्हें 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ भी मिला।
आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के कारण वे प्रतिदिन 1500 से 2000 फूलों का उत्पादन कर बाजार में बेच रहे हैं। कई बार उन्हें 4 हजार तक फूल स्पाइक भी प्राप्त होते हैं, जिससे उनकी प्रतिदिन 4 से 5 हजार रुपये तक की आय हो रही है।
किसानों के लिए प्रेरणा
फूलों और फलों की खेती ने रामसिंह कुशवाह की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।
रामसिंह कुशवाह की यह कहानी प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा है कि पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक बागवानी अपनाने से आय के नए रास्ते खुल सकते हैं।
Varsha Shrivastava 
