Sonam Wangchuk ने 26 दिन बाद खत्म की भूख हड़ताल, JP Nadda ने जूस पिलाकर तुड़वाया अनशन

Sonam Wangchuk का 27वें दिन अनशन खत्म, केंद्र सरकार से लिखित आश्वासन और 3 मुख्य बातों पर सहमति बनने के बाद यह लिया फैसला

Sonam Wangchuk ने 26 दिन बाद खत्म की भूख हड़ताल, JP Nadda ने जूस पिलाकर तुड़वाया अनशन

NEET UG पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 27 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे Sonam Wangchuk ने गुरुवार देर रात अपना अनशन समाप्त कर दिया। Central Minister JP Nadda और Jitendra Singh गुरुग्राम स्थित Medanta Hospital पहुंचे, जहां JP Nadda ने जूस पिलाकर Sonam Wangchuk का अनशन खत्म कराया।

Sonam Wangchuk ने शुक्रवार सुबह जारी वीडियो संदेश में बताया कि पिछले दो दिनों से सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही थी। बातचीत के बाद सरकार की ओर से उनकी कुछ प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया गया, जिसके बाद उन्होंने भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया।

सरकार ने तीन मांगों पर दिया लिखित आश्वासन

Sonam Wangchuk ने बताया कि सरकार ने तीन अहम मुद्दों पर सकारात्मक भरोसा दिलाया है। इनमें प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने या कार्रवाई नहीं करने, NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर Parliament में चर्चा कराने और पेपर लीक से प्रभावित होकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग शामिल है।

उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि आंदोलन में शामिल छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई न की जाए। Sonam Wangchuk ने कहा कि छात्रों के हितों को देखते हुए उन्होंने अनशन खत्म करने का निर्णय लिया।

हालांकि, उन्होंने साफ किया कि Education Minister Dharmendra Pradhan के इस्तीफे पर सरकार की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा उनकी मांगों में था, लेकिन अनशन खत्म करने के लिए इसे अनिवार्य शर्त नहीं बनाया गया।

Dharmendra Pradhan के इस्तीफे पर अलग-अलग रुख

Sonam Wangchuk के अनशन खत्म करने के फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े संगठनों के रुख में अंतर दिखाई दिया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के फाउंडर Abhijeet Deepke ने Sonam Wangchuk  के फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि जब तक Education Minister Dharmendra Pradhan इस्तीफा नहीं देते, तब तक Jantar Mantar पर उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

वहीं, Sonam Wangchuk ने अपने वीडियो संदेश में Education Minister के इस्तीफे को लेकर कोई नया बयान नहीं दिया। उन्होंने छात्रों की सुरक्षा, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही को अपनी प्राथमिकता बताया।

PM Modi ने Wangchuk के स्वास्थ्य को लेकर की अपील

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी Sonam Wangchuk के अनशन खत्म होने के बाद प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि Sonam Wangchuk डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या जारी रखें और जल्द स्वस्थ हों। PM Modi ने उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना करते हुए कहा कि वह जल्द अपना पुराना वजन हासिल करें और स्वस्थ रहें।

65 सांसदों ने दिया समर्थन

Sonam Wangchuk के आंदोलन को कई राजनीतिक दलों के सांसदों का समर्थन मिला। करीब 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की या संदेश भेजकर भरोसा दिया कि NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार का मुद्दा Parliament में उठाया जाएगा।

22 July को Parliament के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल Medanta Hospital पहुंचा था। इसमें Congress के Vivek Tankha, Trinamool Congress की Sagarika Ghose, CPI(M) के John Brittas और Aam Aadmi Party के Sanjay Singh समेत कई सांसद शामिल थे।

सांसदों ने Sonam Wangchuk को एक संयुक्त पत्र सौंपकर उनसे अनशन खत्म करने की अपील की थी। पत्र में भरोसा दिया गया था कि NEET पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही जैसे मुद्दों को Parliament में मजबूती से उठाया जाएगा।

28 June से शुरू किया था आंदोलन

Sonam Wangchuk ने 28 June को Delhi के Jantar Mantar पर NEET UG पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनकी प्रमुख मांगों में Education Minister Dharmendra Pradhan का इस्तीफा, NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल था।

लगातार 27 दिनों तक चले इस आंदोलन के दौरान Sonam Wangchuk की तबीयत पर भी असर पड़ा। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो विकल्प थे—या तो अनशन जारी रखकर स्वास्थ्य को खतरे में डालना या फिर आगे की लड़ाई के लिए अपनी ऊर्जा बचाना। छात्रों और समर्थकों की अपील के बाद उन्होंने दूसरा रास्ता चुना।

अब सरकार के आश्वासन के बाद यह देखना अहम होगा कि Parliament में परीक्षा सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए सरकार कौन से कदम उठाती है। NEET विवाद को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच आने वाला कानून और उसकी प्रक्रिया छात्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।