पाकिस्तान के बाद MP में हिंदू खतरे में: सिंघार का बड़ा आरोप- जहरीली शराब के मालिकों को बचा रही सरकार
Singhar on Sagar Poisonous Liquor : नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि सरकार और आबकारी विभाग शराब के नेटवर्क को उत्तर प्रदेश से जुड़ा बता रहे हैं। इसकी कड़ियां मध्य प्रदेश के उज्जैन से जुड़ी हैं।
Umang Singhar on Sagar Poisonous Liquor : मध्य प्रदेश। सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार और आबकारी विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सागर दौरे से लौटने के बाद भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए सिंघार ने कहा कि मामले में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 112 लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारी डिस्टलरी संचालकों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
शराब नेटवर्क को लेकर सरकार से सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि सरकार और आबकारी विभाग शराब के नेटवर्क को उत्तर प्रदेश से जुड़ा बता रहे हैं। उन्होंने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी कड़ियां मध्य प्रदेश के उज्जैन से जुड़ी हैं। उन्होंने गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब से हुई मौतों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, उस मामले की जांच में उज्जैन से जुड़े शराब नेटवर्क का पता चला था। सिंघार ने मांग की कि उज्जैन में अवैध शराब के नेटवर्क की गहराई से जांच होनी चाहिए।
उज्जैन कनेक्शन पर मुख्यमंत्री से जवाब मांगा
नेता प्रतिपक्ष ने उज्जैन के अनीश यादव को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अनीश यादव किन लोगों के संपर्क में हैं और क्या उन्हें किसी राजनीतिक संरक्षण का फायदा मिल रहा है। सिंघार ने आरोप लगाया कि उज्जैन और धार में तैयार की जा रही जहरीली शराब सागर तक पहुंच रही है। सरकार को इस पूरे नेटवर्क की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
आबकारी आयुक्त के सागर दौरे पर सवाल
उमंग सिंघार ने आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के सागर पहुंचने को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि आयुक्त वहां जांच और कार्रवाई के लिए पहुंचे थे या किसी को बचाने के लिए। सिंघार ने कहा कि मामले में जिला आबकारी अधिकारी समेत वरिष्ठ अधिकारियों पर अब तक पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कथित तौर पर डिस्टलरी मालिकों के खिलाफ भी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
शराब की गुणवत्ता से जुड़े आदेश पर आपत्ति
नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने आबकारी विभाग के आदेशों में कथित बदलाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी शराब ब्रांड को पहले पीने के लिए अनुपयुक्त बताया गया और कुछ ही समय बाद उसे पीने योग्य घोषित कर दिया गया, तो इसकी जांच जरूरी है। उनके अनुसार, आदेश में बदलाव की परिस्थितियों और इसके पीछे की प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों और डिस्टलरी संचालकों के बीच संभावित मिलीभगत की भी जांच की मांग की।
यूपी को जिम्मेदार बताने पर हमला
सिंघार ने सरकार पर उत्तर प्रदेश को जिम्मेदार ठहराकर मामले से ध्यान हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि अवैध शराब का नेटवर्क मध्य प्रदेश में ही सक्रिय है। उनके अनुसार, नकली ब्रांड की शराब बाजार तक पहुंचने से आम लोगों की जान जा रही है। उन्होंने सरकार से पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
चार लाख के मुआवजे को बताया कम
जहरीली शराब से जान गंवाने वालों के परिवारों के लिए घोषित चार लाख रुपये के मुआवजे को सिंघार ने अपर्याप्त बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा महंगाई में इतनी राशि से प्रभावित परिवारों की मुश्किलें दूर नहीं होंगी। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की। साथ ही उन्होंने दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग भी दोहराई।
हिंदुत्व की राजनीति पर भी उठाए सवाल
सिंघार ने इंदौर, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सागर में हुई मौतों का जिक्र करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हिंदुत्व के नाम पर राजनीति करती है, लेकिन लोगों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के मामले में सरकार नाकाम है। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद और RSS प्रमुख मोहन भागवत से भी सवाल किए कि ऐसी घटनाओं पर उनकी प्रतिक्रिया क्या है।

