Indus Water Treaty : भारत बना सकता है पानी को हथियार, सिंधु समझौते पर दिखा पाक मंत्री का डर
Indus Water Treaty : मंत्री अहसान इकबाल ने कहा कि पाकिस्तान के सामने अब यह खतरा है कि भारत जरूरत के समय पानी रोककर उसे दबाव बनाने के साधन के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है।
Indus Water Treaty : पाकिस्तान के प्लानिंग मिनिस्टर अहसान इकबाल ने भारत और पाकिस्तान से जुड़े दो अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी है। पहला मुद्दा सिंधु जल संधि का है। दूसरा मुद्दा दक्षिण एशिया में भारत की भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति से जुड़ा है। इकबाल ने कहा कि पाकिस्तान के सामने अब यह खतरा है कि भारत जरूरत के समय पानी रोककर उसे दबाव बनाने के साधन के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है। उनके बयान से दोनों देशों के बीच पानी को लेकर जारी तनाव एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
भारत पर पानी को हथियार बनाने का आरोप
PAK मंत्री अहसान इकबाल ने भारत की भौगोलिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि भारत एक तटवर्ती देश है और कई नदियां भारत से होकर पाकिस्तान में आती हैं। उनके मुताबिक, इस भौगोलिक स्थिति के कारण भारत के पास पाकिस्तान की जल आपूर्ति पर प्रभाव डालने की क्षमता है।
इकबाल ने आरोप लगाया कि भारत इस स्थिति का इस्तेमाल पानी को पाकिस्तान के खिलाफ हथियार की तरह करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इसे पाकिस्तान के लिए एक गंभीर खतरा बताया है।
NEW: "Pakistan now faces the threat that India could use water as a weapon to deny us water when we need it.." acknowledges Pakistan minister Ahsan Iqbal on India placing Indus Waters Treaty in abeyance pic.twitter.com/yBaOG7LmNu
— Shashank Mattoo (@MattooShashank) August 22, 2026
पहलगाम हमले के बाद संधि एबेयंस में
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को एबेयंस में रखने का फैसला किया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन बंद नहीं करता, तब तक संधि को बहाल नहीं किया जाएगा।
पाकिस्तान लगातार भारत के इस फैसले को एकतरफा और गैरकानूनी बताता रहा है। अहसान इकबाल के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को लेकर जल सुरक्षा और अपनी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है।
पाक की कृषि सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर
पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था सिंधु नदी प्रणाली पर काफी निर्भर है। इसी वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच नदी के पानी का मुद्दा बेहद संवेदनशील माना जाता है। सिंधु जल संधि साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी।
इस समझौते में विश्व बैंक की मध्यस्थता की महत्वपूर्ण भूमिका थी। दोनों देशों के बीच कई राजनीतिक और सैन्य तनाव के बावजूद यह संधि लंबे समय तक जल बंटवारे का आधार रही है।
भारत की केंद्रीय भूमिका को माना जरूरी
अहसान इकबाल ने अपने दूसरे बयान में दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र के बिल्कुल केंद्र में है और बाकी देश उसके आसपास की परिधि में स्थित हैं।
उनके मुताबिक, दक्षिण एशिया को सही तरीके से काम करने के लिए भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि पाकिस्तान कई मौकों पर क्षेत्रीय सहयोग के मुद्दों पर भारत की भूमिका को लेकर आलोचनात्मक रुख अपनाता रहा है।
आकार और भौगोलिक स्थिति से भारत अहम
दक्षिण एशिया में भारत का क्षेत्रफल, आबादी, अर्थव्यवस्था और भौगोलिक स्थिति उसे क्षेत्र की केंद्रीय शक्ति बनाते हैं। नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देश भारत के साथ भौगोलिक या आर्थिक रूप से जुड़े हुए हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग के लिए भारत की भागीदारी को नजरअंदाज करना मुश्किल है। इकबाल की टिप्पणी इसी वास्तविकता की ओर इशारा करती है।
दोनों बयानों में दिखी पाकिस्तान की दोहरी चिंता
अहसान इकबाल के दोनों बयानों को एक साथ देखें तो पाकिस्तान की स्थिति के दो पहलू सामने आते हैं। एक तरफ वह भारत पर पानी को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने की आशंका जता रहा है।
दूसरी तरफ वह यह भी स्वीकार कर रहा है कि दक्षिण एशिया के प्रभावी संचालन के लिए भारत की भूमिका जरूरी है। इससे पता चलता है कि भारत के साथ तनाव के बावजूद पाकिस्तान क्षेत्र में भारत के प्रभाव और महत्व को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकता।
आगे भी जारी रह सकता है तनाव और संवाद
भारत का रुख है कि आतंकवाद के माहौल में सामान्य सहयोग संभव नहीं है। वहीं पाकिस्तान सिंधु जल संधि को लेकर भारत के फैसले का विरोध करता रहा है और इसे गंभीर कदम बताता है।
ऐसे में दोनों देशों के बीच पानी, आतंकवाद और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में भी महत्वपूर्ण बने रह सकते हैं। दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए सहयोग जरूरी है, लेकिन आपसी विश्वास की कमी इन प्रयासों के सामने बड़ी चुनौती है।

