मऊगंज में पंचायत भवनों की बदहाली पर सवाल: घरों से पंचायत संचालन के आरोप
मऊगंज जिले में पंचायत भवनों की बदहाली, नियमित रूप से कार्यालय नहीं खुलने और सरपंच-सचिव के घर से पंचायत संचालन के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने पंचायत भवनों की सफाई, मरम्मत और सरकारी निर्देशों के पालन की मांग की है।
मऊगंज से राजेंद्र पयासी की रिपोर्ट।
जिले में पंचायती राज व्यवस्था को लेकर जमीनी स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत भवनों की खराब स्थिति, नियमित रूप से कार्यालय नहीं खुलने और सरपंच-सचिव के घर से पंचायत का कामकाज संचालित होने के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए राशि खर्च होने के बावजूद पंचायत भवनों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
पंचायत भवनों पर लटके ताले
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि जिले की कई ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन नियमित रूप से नहीं खुलते। इसके कारण ग्रामीणों को अपने जरूरी कामों के लिए जनपद और तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई पंचायतों में पंचायत से जुड़े काम सरपंच या सचिव के निजी आवास से संचालित होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में पंचायत भवनों के निर्माण और रखरखाव पर खर्च होने वाली राशि की उपयोगिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
चूना-पानी को तरसती दीवारें
कई पंचायत भवनों की स्थिति खराब बताई जा रही है। कहीं दीवारों का प्लास्टर उखड़ा हुआ है तो कहीं खिड़की-दरवाजों की हालत खराब है।

कुछ भवनों के आसपास झाड़ियां और गंदगी होने की शिकायत भी सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत भवन ग्रामीणों के लिए सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों से जुड़ी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र होना चाहिए, लेकिन रखरखाव के अभाव में कई भवन खुद ही बदहाली का सामना कर रहे हैं।
स्वच्छता अभियान पर सवाल
गांधी जयंती और अन्य अवसरों पर स्वच्छता अभियान के तहत पंचायत स्तर पर साफ-सफाई की गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ पंचायत भवनों में नियमित साफ-सफाई नहीं होती। कई जगह शौचालयों की खराब स्थिति और परिसर में उगी झाड़ियों को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। इससे पंचायत स्तर पर चलाए जा रहे स्वच्छता अभियानों की जमीनी स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
आदेश के पालन पर सवाल
बताया गया है कि मऊगंज कलेक्टर की ओर से ग्राम पंचायतों को नियमित रूप से खोलने और पंचायत भवन में संबंधित कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। भवन के बाहर कर्मचारियों के नाम और मोबाइल नंबर प्रदर्शित करने की बात भी कही गई है। इसके बावजूद ग्रामीणों का दावा है कि कई जगह इन निर्देशों का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है। ग्रामीणों को जाति प्रमाण पत्र, निवास, खसरा-नकल और अन्य जरूरी कामों के लिए दूसरे सरकारी कार्यालयों का रुख करना पड़ता है।
निरीक्षण व्यवस्था पर भी सवाल
स्थानीय स्तर पर पंचायतों के नियमित भौतिक निरीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि जनपद और जिला स्तर पर नियमित निगरानी नहीं होने से पंचायतों की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो पा रहा है।

समाजसेवी राम सिपाही पटेल, राममिलन प्रजापति और नरेंद्र तिवारी ने जिला प्रशासन से पंचायत भवनों की स्थिति का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। उन्होंने जर्जर भवनों की मरम्मत और साफ-सफाई कराने के साथ पंचायतों को नियमित रूप से खुलवाने तथा सरकारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन पंचायत भवनों की वास्तविक स्थिति की जांच कराए और जहां भी लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हो, वहां जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

