अमेरिका की सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की इजाजत 4 साल बाद कच्चा तेल 100 डॉलर पार
अमेरिका की सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की इजाजत जंग के बीच 30 दिन की छूट, 4 साल बाद कच्चा तेल 100 डॉलर पार
अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। इसे काबू में करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दूसरे देशों को भी रूस से तेल खरीदने की अस्थाई मंजूरी दे दी है। रूस के कई ऑयल टैंकर समुद्र में फंसे हैं।
इससे पहले अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए प्रतिबंधों में ढील देने की बात कही थी। हालांकि, इस पर भारतीय अधिकारी कह चुके हैं कि भारत तेल खरीदने के लिए किसी भी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं है।

सिर्फ समुद्र में फंसे जहाजों से तेल खरीदने की मंजूरी
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 12 मार्च को एक लाइसेंस जारी किया। इसके तहत उन रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की डिलीवरी और बिक्री की जा सकती है, जो 12 मार्च की रात 12:01 बजे से पहले जहाजों पर लोड हो चुके थे।
यह छूट सिर्फ 11 अप्रैल तक के लिए दी गई है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि इसका मकसद दुनियाभर में तेल की सप्लाई बढ़ाना है, ताकि बढ़ती कीमतों पर लगाम लग सके।
अमेरिका ने कहा- रूस को ज्यादा फायदा नहीं होगा
अमेरिका के ट्रेजरी मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रम्प वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक शॉर्ट-टर्म फैसला है और इससे रूस को कोई बहुत बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा। बेसेंट के मुताबिक रूस की कमाई का बड़ा हिस्सा तेल निकालने के वक्त लगने वाले टैक्स से आता है, जबकि यह छूट सिर्फ उस तेल के लिए है, जो पहले से ही रास्ते में है।
.@POTUS is taking decisive steps to promote stability in global energy markets and working to keep prices low as we address the threat and instability posed by the terrorist Iranian regime.
— Treasury Secretary Scott Bessent (@SecScottBessent) March 12, 2026
To increase the global reach of existing supply, @USTreasury is providing a temporary…
कच्चा तेल 101 डॉलर प्रति बैरल पार
मिडिल ईस्ट में एनर्जी सप्लाई और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हाल ही में हुए हमलों के बाद फिर से कच्चे तेल की कीमतों में 9% से ज्यादा की तेजी आई है। इस उछाल के साथ ही तेल के की कीमत एक बार फिर 101.50 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गई है।
होर्मुज रूट पर कामकाज पूरी तरह से ठप
मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण ऊर्जा और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। खासकर होर्मुज रूट पर, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, वहां काम लगभग बंद हो चुका है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।
खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।

