अपने भतीजे अभिषेक को चुनो या मुझे... कल्याण बनर्जी को ममता से ऐसा क्यों कहना पड़ा?
Kalyan Banerjee: TMC के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी के सामने शर्त रख दी है. उन्होंने कहा है कि पार्टी बर्बाद हो गई, लेकिन, अभिषेक बनर्जी का घमंड नहीं गया. ऐसे में या तो पार्टी में अभिषेक बनर्जी रहेंगे या फिर वे खुद.
TMC से लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा है. उनका दावा है कि अभिषेक ने उन्हें ऐन मौके पर फर्जी हस्ताक्षर केस से पीछे हटने को कह दिया. इस बात वो इतने खीज गए कि ममता बनर्जी के सामने दो शर्तें रख दी. उन्होंने कहा. अभिषेक बनर्जी बहुत घमंडी आदमी हैं. ममता बनर्जी को अपने भतीजे और हम में सेक किसी को चुनना होगा.
कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर कई आरोप लगाए. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को अब किसी एक को ही चुनना होगा. उन्होंने साफ किया कि अभिषेक बनर्जी उनपर कभी भरोसा नहीं करते. वे कल केस लड़ने की तैयारी कर रहे थे और रात में उन्हें पता चला कि वकील बदल दिया गया है. अब उनकी जगह किशोर दत्ता केस लड़ेंगे.
“Abhishek Banerjee is arrogant, has habit to disrespect others.”
— News Arena India (@NewsArenaIndia) June 11, 2026
- TMC leader Kalyan Banerjee on Abhishek Banerjee pic.twitter.com/98YBBxJyCf
अभिषेक बनर्जी पर जमकर बरसे कल्याण
कल्याण बनर्जी ने अभिषेक के इस फैसले को अपमानजनक बताया. एक निजी चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा कि,
‘मैं केवल ममता बनर्जी के लिए काम करता हूं. किसी और के लिए नहीं. कौन हैं अभिषेक बनर्जी? आज पार्टी को बर्बादी की राह पर ले जाने वाले अभिषेक बनर्जी ही हैं. अब ममता दीदी के हाथ में है कि वो क्या चाहती हैं. मैंने बंगाल के लिए क्या किया है, मुझे इसकी लिस्ट देने की ज़रूरत नहीं है.’
कल्याण बनर्जी ममता के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं. फर्जी हस्ताक्षर केस, जिसमें अभिषेक बनर्जी आरोपी हैं, उसमें भी कल्याण बनर्जी ही वकील थे. कल्याण बनर्जी ने ये साफ़ किया कि अब वे अभिषेक के लिए केस नहीं लड़ेंगे. उन्होंने कहा ‘कोई मुझे डस्टबिन की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकता.’
TMC सांसदों ने दिया इस्तीफा
विधानसभा चुनाव हारने के एक महीने बाद ही पार्टी बिखरने लगी. 27 मई को पार्टी की राज्यसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. फिर 8 जून को ममता के करीबी राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने भी इस्तीफा दे दिया. और कल 10 जून को भी ममता की एक और करीबी राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव का इस्तीफा हो गया. यानी एक महीने में तीन इस्तीफे.
इससे कुछ रोज पहले TMC के 80 विधायकों में से 60 ने ममता बनर्जी द्वारा शोवनदेब चटर्जी को विपक्ष का नेता चुने जाने के खिलाफ बगावत कर दी थी. इन सबने मिलकर पश्चिम बंगाल विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुन लिया. इसी दौरान एक अन्य बागी गुट ने दावा किया कि पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 एनडीए का साथ देना चाहते हैं. अब कल्याण बनर्जी के इस बयान को TMC के ताबूत में आखिरी कील की तरह देखा जा रहा है.
shivendra 
