केरलम में लौटा निपाह, राज्य में हाई अलर्ट: 2026 का पहला केस, Kozhikode में मरीज वेंटिलेटर पर

केरलम में निपाह वायरस का मामला सामने आने के बाद राज्य में हाई अलर्ट जारी, कोझिकोड में मरीज वेंटिलेटर पर, संपर्क में आए लोगों की ट्रैकिंग शुरू 

केरलम में लौटा निपाह, राज्य में हाई अलर्ट: 2026 का पहला केस, Kozhikode में मरीज वेंटिलेटर पर

केरल में एक बार फिर निपाह वायरस का मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। कोझिकोड जिले में 43 वर्षीय व्यक्ति के संक्रमित पाए जाने के बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।  इस साल यह राज्य में निपाह का पहला मामला है। आखिरी बार दो साल पहले 2024 में दो केस मिले थे। इनमें एक मरीज की जान चली गई थी। साल 2018 के बाद से केरलम में 6वीं बार संक्रमण फैला है। 

मरीज की हालत गंभीर, अस्पताल में भर्ती

जानकारी के अनुसार, मरीज को पहले हल्का बुखार हुआ था, जिसके बाद उसे कोझिकोड के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर उसे तुरंत कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल (Kozhikode Medical College Hospital) में रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार मरीज की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उसे आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि मरीज के संपर्क में आए सभी लोगों की पहचान की जा रही है और उन्हें निगरानी में रखा गया है।

राज्य में हाई अलर्ट, संपर्कों की ट्रैकिंग शुरू

मामला सामने आने के बाद केरल स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत राज्यभर में अलर्ट जारी कर दिया है। मरीज का “कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग रूट मैप” तैयार किया जा रहा है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल स्टाफ, परिजन और अन्य संभावित संपर्कों को क्वारंटीन किया जा रहा है। कई लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मरीज ने हाल ही में एक गोदाम किराए पर लिया था और उसकी सफाई खुद की थी। आशंका जताई जा रही है कि इसी दौरान वह संक्रमित हुआ होगा। निपाह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (fruit bats) से फैलता है, जो इस क्षेत्र में इसके प्राकृतिक वाहक माने जाते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारी अभी संक्रमण के सटीक स्रोत की पुष्टि के लिए जांच कर रहे हैं।

राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही संक्रमण की पुष्टि और आगे की रणनीति तय की जाएगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि निपाह वायरस एक गंभीर ज़ूनोटिक संक्रमण है, जो जानवरों से इंसानों में फैल सकता है और मानव-से-मानव संक्रमण की भी संभावना रहती है।

निपाह वायरस का इतिहास, 6 देशों में फैला

निपाह वायरस की पहचान सबसे पहले 1998–99 में मलेशिया के सुंगाई निपाह गांव में हुई थी, जिसके नाम पर इसे “निपाह वायरस” कहा गया। उस समय यह संक्रमण सूअरों के माध्यम से फैला था और फिर इंसानों तक पहुंचा। मलेशिया में इस संक्रमण से 265 लोग संक्रमित हुए थे और 100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

संक्रमण रोकने के लिए सरकार को 10 लाख से ज्यादा सूअरों को मारना पड़ा। इससे मलेशिया के पोर्क इंडस्ट्री को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। मलेशिया के बाद निपाह वायरस 6 देशों में फैला। बांग्लादेश, भारत, सिंगापुर, फिलीपींस में फैला। कंबोडिया और थाईलैंड में भी वायरस के कुछ केस मिले थे। हालांकि, यह ज्यादा नहीं फैल पाया। 

भारत में निपाह वायरस कब आया? 

भारत में निपाह वायरस का पहला मामला 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सामने आया था। उस वक्त 66 मामले सामने आए थे, जिसमें 45 मौतें हो गईं थीं। इसके बाद 2007 में बंगाल के नादिया में 5 मामले दर्ज हुए। 2018 से केरल इस वायरस का प्रमुख हॉटस्पॉट बन गया है। केरल में 8 सालों में 6 निपाह के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे यह राज्य लगातार निगरानी में रहता है।

फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और केवल आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करें। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों को तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचित करने के लिए कहा गया है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि समय पर पहचान और क्वारंटीन से संक्रमण के प्रसार को रोका जा सकता है।