TMC के बागी सांसदों की लिस्ट! शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान समेत 19 का नाम, ममता की करीबी सयानी घोष भी शामिल

ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में टूट। TMC के 19 बागी लोकसभा सांसदों के नाम। राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी पार्टी छोड़ी। 80 में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके।

TMC के बागी सांसदों की लिस्ट! शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान समेत 19 का नाम, ममता की करीबी सयानी घोष भी शामिल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा उथप-पुखल देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर लगातार टूट और बगावत की खबरों के बीच अब पार्टी के 19 लोकसभा सांसदों की एक कथित सूची सामने आई है। इस सूची में अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा, पूर्व भारतीय क्रिकेटर यूसुफ पठान और ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली जादवपुर से सयानी घोष जैसे बड़े नाम शामिल बताए जा रहे हैं। 

TMC के बागी 19 सांसदों की लिस्ट आई

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टीएमसी के बागी गुट ने 19 सांसदों के नामों वाली एक सूची जारी की है। दावा किया गया है कि इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजकर अलग संसदीय समूह के गठन का समर्थन किया है। बताया जा रहा है कि पत्र पर संबंधित सांसदों के हस्ताक्षर भी हैं और उन्होंने संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है।

सूची में शामिल नामों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है, क्योंकि इनमें कई ऐसे चेहरे हैं जो पार्टी के प्रमुख और चर्चित नेताओं में गिने जाते हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है तो लोकसभा में टीएमसी की ताकत पर सीधा असर पड़ सकता है।

TMC के 28 में से 20 लोकसभा सांसद टूटे

वर्तमान में लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। बागी गुट का दावा है कि इनमें से 20 सांसद उनके साथ हैं। यदि यह संख्या सही साबित होती है तो ममता बनर्जी के पास लोकसभा में बहुत कम सांसद बचेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में सांसदों का अलग होना किसी भी क्षेत्रीय दल के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। इससे न केवल संसद में पार्टी की ताकत कमजोर होगी, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर भी असर पड़ सकता है।

राज्यसभा में 13 में से 2 सांसद अलग हुए

टीएमसी को सिर्फ लोकसभा में ही नहीं, बल्कि राज्यसभा में भी झटके लगने की खबरें सामने आई हैं। बुधवार को राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी पार्टी और पद से इस्तीफा दे दिया। पिछले 3 दिनों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं। इससे पहले 8 जून को सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था, पार्टी भी छोड़ दी थी।

अब तक टीएमसी के लोकसभा में 28 में से 20 सांसद और राज्यसभा में 13 में से 2 सांसद यानी कुल 22 सांसद टूट चुके हैं। इन घटनाओं के बाद विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या टीएमसी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर कोई बड़ा असंतोष पैदा हो गया है।

80 में से 58 विधायकों ने बनाया अलग गुट

बंगाल में मामता की पार्टी के नुकसान का सिलसिला सिर्फ लोकसभा या राज्यसभा तक नहीं रुका है। ये आग विधायकों तक भी पहुंच चुकी है। टीएमसी के 80 में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। दरअसल, तृणमूल कांग्रेस में असंतोष की खबरें पिछले कुछ दिनों से लगातार सामने आ रही हैं। इसके बाद 8 जून को लोकसभा सांसदों के एक बड़े समूह के अलग होने की खबर सामने आई। अब सांसदों की नई सूची ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है।

3 जून को पार्टी के भीतर पहली बड़ी बगावत की चर्चा शुरू हुई थी, जब 58 विधायकों के अलग गुट बनाने का दावा किया गया। इन विधायकों ने कथित तौर पर ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना और विधानसभा स्पीकर को पत्र सौंपा। ऋतब्रत ने बुधवार को कहा कि हमारे पास 64 विधायक हैं। बाकी के 6 विधायक भी स्पीकर को चिट्ठी सौंपेंगे।

ममता सोनिया से अभिषेक राहुल से मिले

अब ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक और 19 सांसद बचे हैं। पार्टी में बढ़ती बगावत की खबरों के बीच टीएमसी नेतृत्व भी सक्रिय नजर आया। ममता बनर्जी ने हाल ही में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक चर्चा हुई।

वहीं, ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके अलावा 8 जून को करीब 2 साल बाद हुई INDIA की बैठक में ममता और अभिषेक भी शामिल हुए थे। 

राजनीतिक हलकों में इन बैठकों को विपक्षी एकता और बदलते राजनीतिक हालात से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इन मुलाकातों को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक तौर पर बागी नेताओं के मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।

पार्टी के नेताओं ने दावों पर उठाए सवाल

जहां बागी गुट लगातार बड़े दावे कर रहा है, वहीं टीएमसी के कुछ नेताओं ने इन खबरों पर सवाल भी उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि सोशल मीडिया और कुछ प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही सूची की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है।

कुछ नेताओं ने इसे भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित अभियान बताया है। उनका कहना है कि जिन नेताओं के नाम सूची में शामिल किए गए हैं, उनमें से कुछ ने सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी कदम से खुद को अलग बताया है।

अब मामला के आगे क्या है चुनौती?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित बागी सांसदों और विधायकों की वास्तविक संख्या कितनी है। इसके अलावा यह भी देखना होगा कि लोकसभा स्पीकर, विधानसभा स्पीकर और चुनाव आयोग के स्तर पर इन दावों का क्या असर पड़ता है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में टीएमसी नेतृत्व को संगठन को एकजुट रखने के लिए बड़ी राजनीतिक और रणनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, विपक्षी दल भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

सभी की नजरें आधिकारिक प्रतिक्रिया पर

फिलहाल बंगाल की राजनीति में चर्चा का सबसे बड़ा विषय टीएमसी के भीतर कथित बगावत है। शत्रुघ्न सिन्हा, यूसुफ पठान और सयोनी घोष जैसे चर्चित नामों के सामने आने से मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया है। हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से इस सूची की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है।

ऐसे में सभी की नजरें टीएमसी नेतृत्व, लोकसभा स्पीकर और सूची में शामिल बताए जा रहे सांसदों की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि यह सिर्फ राजनीतिक अटकल है या फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।