ट्रंप-खामेनेई के बीच सीजफायर: 14 दिन बाद फिर जंग? पाकिस्तान बना 'शांतिदूत', भारत पर क्या असर.
अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिन से जारी तनाव के बाद 14 दिन का सीजफायर हुआ। Donald Trump ने हमले रोकने का ऐलान किया, जबकि Shehbaz Sharif की मध्यस्थता अहम रही। होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तेल कीमतों में राहत संभव।
7 अप्रैल की रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी- आज रात ईरान की पूरी सभ्यता तबाह हो जाएगी, जो कभी वापस नहीं आएगी। लेकिन कुछ घंटों बाद 8 अप्रैल की सुबह 4 बजे ट्रंप ने खुद सीजफायर का ऐलान कर दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान 40 दिनों से चली आ रही जंग में 14 दिन का सीजफायर मान गए। ईरान ने भी होर्मुज स्ट्रेट खोलने की शर्त पर सहमति जताई।
कुछ सवालों और जवाबों में समझते हैं पूरा मुद्दा कैसे हुआ सीजफायर:
सवाल-1: अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर कब हुआ और शर्तें क्या हैं?
जवाब:
40 दिनों से चली अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान की जंग में अचानक 14 दिन की रोक लग गई है। भारतीय समयानुसार 8 अप्रैल की सुबह 4 बजे ट्रंप ने Truth Social पर लिखा- पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से बात के बाद, होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत पूरी तरह सुरक्षित खोलने की शर्त पर मैं ईरान पर बमबारी 14 दिनों के लिए रोकने को तैयार हूं। कुछ देर बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कन्फर्म किया कि दोनों पक्षों में सीजफायर हो गया है। ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने सभी सैन्य यूनिट्स को फायरिंग रोकने का आदेश दिया।
मुख्य शर्तें:
- ईरान होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों के लिए तुरंत खोलेगा।
- अमेरिका 14 दिनों तक हमले नहीं करेगा।
- ट्रंप ने ईरान के 10-पॉइंट प्रस्ताव को "workable basis" (बातचीत का आधार) बताया है। ईरान इसे अपनी जीत बता रहा है।
- इस प्रस्ताव में प्रमुख मांगें शामिल हैं: प्रतिबंध हटाना, जब्त संपत्ति लौटाना, अमेरिकी सैनिकों की वापसी, युद्ध क्षतिपूर्ति आदि।
सवाल-2: क्या इजराइल भी सीजफायर मान गया:
जवाब:
इजराइल ने सीजफायर का समर्थन किया है, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा- होर्मुज स्ट्रेट तुरंत खुलना चाहिए और ईरान अमेरिका-इजराइल पर हमले बंद करे। हालांकि, इजराइल ने साफ किया कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होगा। वहीं पाकिस्तान के पीएम शरीफ ने अपने बयान में लेबनान को भी शामिल बताया था। 7 अप्रैल को इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला भी किया था।
सवाल-3: आखिर सीजफायर कैसे हुआ? पाकिस्तान की भूमिका क्या रही:
जवाब:
6-7 अप्रैल को ट्रंप ने ईरान को दो बार कड़ी चेतावनी दी थी। 7 अप्रैल शाम को तो उन्होंने कहा- "आज रात ईरान की सभ्यता मिटा दूंगा।" इसी बीच पाकिस्तान एक्टिव हुआ। पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने वॉशिंगटन और तेहरान से लगातार संपर्क किया। उन्होंने अपील की कि 2 हफ्ते हमले रोके जाएं ताकि डिप्लोमेसी चल सके और ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोल दे। चीन ने भी ईरान पर दबाव डाला। आखिरी घड़ी में पाकिस्तान की मध्यस्थता और ईरान की रजामंदी से सीजफायर टल गया।
पाकिस्तान क्यों कूदा:
- पाकिस्तान और ईरान पड़ोसी हैं। बड़ा हमला होता तो शरणार्थी संकट और आर्थिक बोझ पड़ता।
- पाकिस्तान में पहले से डीजल महंगा हो चुका था, स्कूल-दुकानें बंद हो रही थीं।
- सऊदी अरब के साथ डिफेंस पैक्ट के कारण भी पाकिस्तान फंस सकता था।

सवाल-4: 14 दिन बाद क्या होगा? फिर जंग शुरू हो जाएगी:
जवाब:
पाकिस्तान 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में हाई-लेवल मीटिंग बुला रहा है, जिसमें अमेरिका और ईरान के अधिकारी शामिल हो सकते हैं। ट्रंप ने कहा- "अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान के पास न पुल बचेंगे, न पावर प्लांट।" वहीं ईरान कह रहा है- "यह युद्ध खत्म नहीं, सिर्फ विराम है।" अगर बातचीत में प्रोग्रेस हुई तो सीजफायर बढ़ सकता है। लेकिन इजराइल लेबनान में कार्रवाई जारी रख सकता है। अगर डील फेल हुई तो 14 दिन बाद फिर तनाव बढ़ने की आशंका है।
सवाल-5: भारत पर इस सीजफायर का क्या असर पड़ेगा:
जवाब:
पॉजिटिव असर:
भारत अपना 85% कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से आयात करता है। युद्ध के दौरान तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। सीजफायर के बाद तेल की कीमतें 16% तक गिर गईं। पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है, महंगाई पर काबू आएगा और रुपया संभल सकता है।
खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों का रेमिटेंस सुरक्षित रहेगा।
चिंता की बात:
अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है। यह भारत के लिए कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। भारत ने चाबहार पोर्ट में अरबों रुपए लगाए थे ताकि पाकिस्तान को बायपास कर मध्य एशिया पहुंचा जाए। अब पाकिस्तान तेहरान-वॉशिंगटन का 'बैकचैनल' बन गया है।
कई एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि ट्रंप की 'लेन-देन' वाली नीति में पाकिस्तान को इनाम मिल सकता है, जिससे भारत की रणनीति प्रभावित हो सकती है। यह सीजफायर फिलहाल राहत है, लेकिन स्थायी शांति दूर दिख रही है। अगले 14 दिन में इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

