असम विधानसभा में Uniform Civil Code बिल पेश, उत्तराखंड और गुजरात में पास हो चुका है UCC बिल
असम विधानसभा में Uniform Civil Code (UCC) बिल पेश, लिव-इन रजिस्ट्रेशन और समान अधिकारों के प्रावधान शामिल
असम विधानसभा में Uniform Civil Code (UCC) बिल पेश किया गया है, जिससे राज्य में नए कानूनी और सामाजिक बदलावों की चर्चा तेज हो गई है। इस बिल को संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ओर से सदन में प्रस्तुत किया। इससे पहले राज्य मंत्रिमंडल ने इस बिल को मंजूरी दी थी। विधानसभा में इस पर 27 मई को विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
उत्तराखंड-गुजरात के बाद तीसरा राज्य बनने की तैयारी
अगर यह बिल पारित हो जाता है, तो असम देश का तीसरा राज्य बन जाएगा जो यूनिफॉर्म सिविल कोड की दिशा में आगे बढ़ेगा। इससे पहले Uttarakhand ने UCC को लागू किया था और Gujarat ने भी इससे संबंधित बिल पास किया है। इस तरह असम इस नीति को अपनाने वाला एक और प्रमुख राज्य बन जाएगा।
लिव-इन रजिस्ट्रेशन और समान अधिकारों के प्रावधान शामिल
बिल के प्रमुख प्रावधानों में शादी की न्यूनतम उम्र तय करना, बहुविवाह पर रोक लगाना, बेटियों को माता-पिता की संपत्ति में समान अधिकार देना और लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन शामिल है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों में समानता लाना और सामाजिक न्याय को मजबूत करना है।
अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है
हालांकि, इस बिल में अनुसूचित जनजातियों (पहाड़ी और मैदानी दोनों) को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा, पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं और अनुष्ठानों को भी इस कानून से छूट दी गई है। इससे स्थानीय सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखने की कोशिश की गई है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में एक समान कानून व्यवस्था लागू करना होता है। अगर यह बिल पास होता है, तो Assam में व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान नागरिक कानून प्रणाली लागू होने की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।
Varsha Shrivastava 
