MP Transfer Policy 2026: मध्य प्रदेश सरकार ने जारी किया आदेश, 1 से 15 जून तक होंगे ट्रांसफर

मध्य प्रदेश तबादला नीति 2026: पति-पत्नी पोस्टिंग, गंभीर बीमारी और 3 साल नियम समेत राज्य की मोहन सरकार ने जारी किए नए ट्रांसफर नियम

MP Transfer Policy 2026: मध्य प्रदेश सरकार ने जारी किया आदेश, 1 से 15 जून तक होंगे ट्रांसफर

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 की नई स्थानांतरण नीति जारी कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 22 मई 2026 को जारी इस नीति में राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों तथा कर्मचारियों के तबादलों के लिए विस्तृत नियम तय किए गए हैं। नई नीति के अनुसार प्रदेश में सामान्य तबादलों की प्रक्रिया 1 जून से 15 जून 2026 तक पूरी की जाएगी। इसके बाद सामान्य तबादलों पर प्रतिबंध रहेगा। सरकार ने इस बार ऑनलाइन प्रक्रिया, गंभीर बीमारी, पति-पत्नी पोस्टिंग, दिव्यांग कर्मचारियों और महिला कर्मचारियों के लिए कई विशेष प्रावधान भी शामिल किए हैं।

1 जून से शुरू होंगे सामान्य तबादले

सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक राज्य और जिला स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण 1 जून से 15 जून 2026 के बीच किए जाएंगे। इसके बाद सामान्य ट्रांसफर बंद रहेंगे। हालांकि प्रशासनिक आवश्यकता या विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंध अवधि के दौरान भी तबादले किए जा सकेंगे। सरकार ने साफ किया है कि नीति से हटकर होने वाले ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री स्तर से मंजूरी लेना जरूरी होगा।

किन सेवाओं पर लागू नहीं होगी नीति

नई स्थानांतरण नीति भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय वन सेवा (IFS), न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा और मंत्रालय सेवा के अधिकारियों पर लागू नहीं होगी। इन सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था पहले से लागू रहेगी।

ट्रांसफर का अधिकार किसके पास रहेगा

जिला स्तर के कर्मचारियों के तबादले कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद किए जाएंगे। वहीं राज्य स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफर विभागीय मंत्री और कई मामलों में मुख्यमंत्री की मंजूरी से होंगे। प्रथम श्रेणी अधिकारियों के तबादलों में उच्च स्तर की स्वीकृति जरूरी रखी गई है।

प्रतिबंध अवधि में कब हो सकेंगे तबादले

सरकार ने कुछ विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंध अवधि के दौरान भी ट्रांसफर की अनुमति दी है। इनमें गंभीर बीमारी, न्यायालय के आदेश, गंभीर शिकायत, भ्रष्टाचार या अनियमितता के मामले, लोकायुक्त या आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की जांच, पद रिक्त होना और प्रशासनिक आवश्यकता शामिल हैं।

नीति के अनुसार कैंसर, हार्ट अटैक, लकवा या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों को राहत दी जा सकती है। यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है तो प्रशासनिक आधार पर उसका तबादला किया जा सकेगा।

पति-पत्नी को एक स्थान पर पोस्टिंग देने का प्रावधान

नई नीति में पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने पर उन्हें एक ही स्थान पर पदस्थ करने का प्रावधान रखा गया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसका मतलब यह नहीं होगा कि उन्हें अनिवार्य रूप से एक ही जिले में रखा जाए। प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार पोस्टिंग तय की जाएगी।

दिव्यांग और गंभीर बीमार कर्मचारियों को राहत

40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले कर्मचारियों का सामान्य तौर पर ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। यदि वे स्वयं आवेदन करेंगे तभी उनके मामले पर विचार होगा। इसके अलावा कैंसर, किडनी की बीमारी, डायलिसिस या ओपन हार्ट सर्जरी जैसे मामलों में जिला मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर इच्छित स्थान पर तबादला किया जा सकेगा।

महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान

सरकार ने अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिला कर्मचारियों को उनके गृह जिले में पदस्थ करने का प्रावधान रखा है। वहीं कम लिंगानुपात वाले जिलों में महिला अधिकारियों की पोस्टिंग को प्राथमिकता देने की बात भी नीति में कही गई है। इनमें मुरैना, भिंड, ग्वालियर, दतिया, सागर, विदिशा और रायसेन जैसे जिले शामिल हैं।

3 साल से अधिक एक जगह रहने वालों पर फोकस

नई नीति के अनुसार एक ही स्थान पर लगातार 3 वर्ष या उससे अधिक समय तक पदस्थ रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर किया जा सकता है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल 3 साल पूरे होना ही ट्रांसफर का अनिवार्य आधार नहीं होगा। प्रशासनिक जरूरत और कार्य प्रदर्शन को भी ध्यान में रखा जाएगा।

ऑनलाइन होंगे सभी ट्रांसफर आदेश

सरकार ने इस बार सभी ट्रांसफर आदेश ऑनलाइन ई-ऑफिस प्रणाली से जारी करने का निर्णय लिया है। 15 जून 2026 के बाद जारी होने वाले आदेश स्वतः अमान्य माने जाएंगे। इसके अलावा ट्रांसफर आदेश में कर्मचारी का एम्पलाई कोड दर्ज करना अनिवार्य होगा।

समय पर जॉइन नहीं करने पर होगी कार्रवाई

नई नीति के अनुसार ट्रांसफर आदेश जारी होने के दो सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को रिलीव करना जरूरी होगा। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी बिना अनुमति के जॉइन नहीं करता या आदेश का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। एकतरफा कार्यमुक्त करने का प्रावधान भी रखा गया है।

अनुसूचित क्षेत्रों में रिक्त पदों को भरने पर जोर

सरकार ने अनुसूचित क्षेत्रों में पहले रिक्त पद भरने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जहां स्वीकृत पदों से अधिक स्टाफ पदस्थ है वहां युक्तियुक्तकरण कर कर्मचारियों को अन्य स्थानों पर भेजा जाएगा। स्कूलों और कॉलेजों में अतिरिक्त शिक्षकों को भी दूसरी जगह भेजने की व्यवस्था की गई है। नई स्थानांतरण नीति को लेकर अब कर्मचारियों और विभिन्न विभागों में तैयारी शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि जून के पहले पखवाड़े में प्रदेशभर में बड़े स्तर पर तबादले देखने को मिल सकते हैं।