कुसमी पुजारी हत्याकांड: जनाक्रोश चरम पर, तहसील पर अनिश्चितकालीन धरना

मंगलवार दोपहर 12 बजे से एसडीएम कार्यालय और तहसील प्रांगण में सैकड़ों ग्रामीण, ब्राह्मण समुदाय और व्यापारियों ने धरना शुरू किया। कुसमी बाजार पूरी तरह बंद रहा, इलाके में सन्नाटा पसरा। ब्राह्मण महासभा सहित सभी वर्ग एकजुट।

कुसमी पुजारी हत्याकांड: जनाक्रोश चरम पर, तहसील पर अनिश्चितकालीन धरना

सीधी :सीधी जिले के कुसमी क्षेत्र में हनुमान मंदिर के 75 वर्षीय पुजारी इंद्रभान द्विवेदी की महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) की सुबह निर्मम हत्या के बाद जनाक्रोश अब चरम पर पहुंच गया है। मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे से सैकड़ों ग्रामीणों, ब्राह्मण समुदाय के लोगों और स्थानीय व्यापारियों ने तहसील परिसर एवं एसडीएम कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।

इस आंदोलन के समर्थन में कुसमी का पूरा बाजार बंद रहा, जिससे इलाके में दिन भर सन्नाटा छाया रहा। प्रदर्शनकारी प्रशासन की निष्क्रियता से बेहद नाराज हैं और आरोप लगा रहे हैं कि हत्याकांड के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

घटना का संक्षिप्त विवरण

पुजारी इंद्रभान द्विवेदी महाशिवरात्रि की पूजा के बाद मंदिर से मोपेड पर घर लौट रहे थे, तभी आरोपी लाला केवट (या कामता प्रसाद केवट) ने उन पर धारदार हथियार (बका/गंडासा) से हमला किया। आरोपी ने पुजारी को गिराकर छाती पर पैर रखा और गले व सीने पर कुल 8 वार किए, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। आरोपी को ग्रामीणों और पुलिस ने तुरंत पकड़ लिया। कई रिपोर्ट्स में स्थानीय लोगों का दावा है कि आरोपी को ब्राह्मणों और पूजा-पाठ से नफरत थी, और वह पहले भी ऐसी घटनाओं में शामिल रहा है। उसके परिवार से जुड़े बूचड़खाने का भी जिक्र आ रहा है।

धरने में मुख्य मांगें

प्रदर्शनकारियों ने कई गंभीर मांगें रखी हैं:

  • मृतक पुजारी के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता।
  • आरोपी के घर में कथित अवैध निर्माण और अतिक्रमण को तत्काल जमींदोज (बुलडोजर से ध्वस्त) किया जाए।
  • क्षेत्र में चल रहे अवैध बूचड़खानों को पूरी तरह हटाया जाए।
  • हत्याकांड की निष्पक्ष और तेज जांच, साथ ही आरोपी के घर में अवैध हथियार होने की आशंका पर छानबीन।

धरने में ब्राह्मण समुदाय के अलावा सभी वर्गों के व्यापारी और ग्रामीण शामिल हैं। व्यापारियों ने कहा, "न्याय की मांग में हम सब एकजुट हैं।"

प्रशासन की अनुपस्थिति से बढ़ा गुस्सा

धरना स्थल पर तहसीलदार और एसडीएम की अनुपस्थिति ने लोगों का आक्रोश और बढ़ा दिया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अधिकारी सीधी कलेक्ट्रेट में जनगणना से जुड़े शासकीय कार्य में व्यस्त थे। देर शाम तक कोई अधिकारी धरना स्थल पर नहीं पहुंचा, जिससे भीड़ में असंतोष बढ़ता गया।

कुसमी के एसडीएम वी.के. आनंद ने बताया कि वे कलेक्ट्रेट में जनगणना कार्य में लगे हैं। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया और कहा कि आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

यह हत्याकांड अब सिर्फ एक अपराध नहीं रहा, बल्कि सामुदायिक तनाव और प्रशासनिक निष्क्रियता का प्रतीक बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, धरना जारी रहेगा। स्थिति को देखते हुए प्रशासन को अब त्वरित कदम उठाने होंगे, वरना आंदोलन और व्यापक हो सकता है।